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Incest मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह

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Incest मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
rajbr1981 Offline
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#51
03-11-2013, 01:29 AM
दोस्तो मुझे कोई रेटिंग नही चाहिए. मुझे बस अपने दिल से निकले हुए विचार कहानी के बारे में देना.
जैसा की पहले अपनी दूसरी हिन्दी फ़ॉन्ट वाली कहानी में कह चुका हूँ मेरी हर हिन्दी फ़ॉन्ट वाली कहानी मे एक दिन छोड़ कर अपडेट आएगा जब तक कहानी पूरी नही होती. अब मैं हर पढ़नेवाले को खुश तो नही कर सकता क्यूंकी हर एक का रुझाव अलग होता है.
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rajbr1981 Offline
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#52
03-11-2013, 01:31 AM
**********************************
माँ - बेटियों ने एक दुसरे के सामने मुझे चुदवाया
**********************************
भाग 04
बिन्दा ने अपनी छोटी बेटी तो हल्के से झिड़का, "तू यहाँ बैठ कर क्या सुन रही है सब बात...जाओ जा कर सब के लिए एक बार फ़िर चाय बनाओ।"
रीता जाना नहीं चाहती थी सो मुँह बिचकाते हुए उठ गई।
मैंने उसको छेड़ दिया, "अरे थोड़े हीं दिन की बात है, तुम्हारा भी समय आएगा बेबी... तब जी भर कर चुदवाना। अभी चाय बना कर लाओ।"
वो अब शर्माते हुए वहाँ से खिसक ली। चलो अच्छा है दो-दो कप चाय मुझे ठीक से जगा देगा। साँढ़ जब जगेगा तभी तो बछिया को गाय बनाएगा।"
मेरी इस बात पर रागिनी ने व्यंग्य किया, "साँड़.....ठीक है पर बुढ़्ढ़ा साँड़" और खिल्खिला कर हँस दी।
मैंभी कहाँ चुकने वाला था सो बोला, "अरे तुमको क्या पता....नया-नया जवान साँढ़ सब तो बछिया की नई बूर देख कर हीं टनटना जाता है और पेलने लगता है, मेरे जैसा बुढ़्ढ़ा साँढ़ हीं न बछिया को भी मजा देगा। बाछिया की नई-नवेली चूत को सुँघेगा, चुमेगा, चुसेगा, चाटेगा, चुभलाएगा....इतना बछिया को गरम करेगा कि चूत अपने हीं पानी से गीली हो जाएगी, तब जा कर इस साँढ़ का लन्ड टनटनाएगा...."


अब रूबी बोल पोड़ी, "छी छी, कितना गन्दा बोल रहे हैं आप...अब चुप रहिए।"

मैंने उसके गाल सहला दिए और कहा, "अरे मेरी जान....यह सब तो घर पर बीवी को भी सुनना पड़ता है और तुम्हारी दीदी को तो रंडी बनने जाना हैं शहर। मैंने तो कुछ भी नहीं बोला है.....वहाँ तो लोग रंडी को कैसे पेलते हैं रागिनी से पूछो।"

रागिनी भी बोली, "हाँ मौसी, अब यह सब तो सुनने का आदत डालना होगा, और साथ में बोलना भी होगा"।

रीना का गाल लाल हुआ था, बोली, "मैं यह सब नहीं बोलुँगी..."।

मैंने उसकी चुची सहला दी वहीं सब के सामने, वो चौंक गई। मैं हँसते हुए बोला, "अभी चलो न भीतर एक बार जब लन्ड तुम्हारी बूर को चोदना शुरु करेगा तो अपने आप सब बोलने लगोगी, ऐसा बोलोगी कि तुम्हारे इस रूबी देवी जी का गाँड़ फ़ट जाएगा सब सुन कर।"

रीता अब चाय ले आई, तो मैंने कहा, "वैसे रूबी तुम भी चाहो तो चुदवा सकती हो...बच्ची तो अब रीता भी नहीं है। 14 साल की दो-तीन लड़की तो मैं हीं चोद चुका हूँ, और वो भी करीब-करीब इतने की हीं है।"

रीता सब सुन रही थी बोली, "अभी 14 नहीं पूरा हुआ है, करीब पाँच महीना बाकी है।"
मैं अब रंग में था, "ओए कोई बात नहीं एक बार जब झाँट हो गया तो फ़िर लड़की को चुदाने में कोई परेशानी नहीं होती। मैं तुम्हारे काँख में बाल देख चुका हूँ, सो झाँट तो पक्का निकल गया होगा अब तक तुम्हारी बूर पर..." रीता को लगा कि मैं उसकी बड़ाई कर रहा हूँ सो वो भी चट से बोली-"हाँ, हल्का-हल्का होने लगा है, पर दीदी सब की तरह नहीं है"।


बिन्दा ने उसको चुप रहने को कहा, तो मैंने उसको शह दी और कहा, "अरे बिन्दा जी, अब यह सब बोलने दीजिए। जितनी कम उमर में यह सब बोलना सीखेगी उतना हीं कम हिचक होगा वर्ना बड़ी हो जाने पर ऐसे बेशर्मों की तरह बोलना सीखना होता है। अभी देखा न रीना को, किस तरह बेलाग हो कर बोल दी कि मैं नहीं बोलुँगी ऐसे...।" सब हँसने लगे और रीना झेंप गई, तो मैंने कहा-"अभी चलो न बिस्तर पर रीना, उसके बाद तो तुम सब बोलोगी। ऐसा बेचैन करके रख दुँगा कि बार-बार चिल्ला कर कहना पड़ेगा मुझसे"।

उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मेरे तरह तिरछी नजर से देखते हुए पूछा-"क्या कहना पड़ेगा?"

मैंने उसको छेड़ा और लड़कियों की तरह आवाज पतली करके बोला, "आओ न, चोदो न मुझे....जल्दी से चोदो न मेरी चूत अपने लन्ड से"।

मेरे इस अभिनय पर सब लोग हँसने लगे। मैं अपने हाथ को लन्ड पर तौलिये के ऊपर से हीं फ़ेरने लगा था। लन्ड भी एक कुँआरी चूत की आस में ठनकना शुरु कर दिया था।मैंने वहीं सब के सामने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और उसकी आगे की चमड़ी पीछे करके लाल सुपाड़ा बहर निकाल कर उसको अपने अँगुठे से पोछा। मुझे पता था कि अब अगर मेरा अँगुठा सुँघा गया तो लन्ड की नशीली गन्ध से वस्ता होगा, सो मैंने अपने अँगुठे को रीना की नाक के पास ले गया-"सुँघ के देखो इसकी खुश्बू"।

मैं देख रहा था कि रागिनी के अलावे बाकी सब मेरे लन्ड को हीं देख रहे थे।

रीना हल्के से बिदकी-"छी: मैं नहीं सुँघुगी।"

रीता तड़ाक से बोली, "मुझे सुँघाईए न देखूँ कैसा महक है।"

मैंने अपना हाथ उसकी तरफ़ कर दिया, जबकि बिन्दा ने हँसते हुए मुझे लन्ड को ढ़्कने को कहा। मैं अब फ़िर से लन्ड को भीतर कर चुका था और रीता मेरे हाथ को सुँघी और बिना कुछ समझे बोली, "कहाँ कुछ खास लग रहा है...?"

अब रुबी भी बोली-"अरे सब ऐसे हीं बोल रहे हैं तुमको बेवकूफ़ बनाने के लिए और तू है कि बनते जा रही है।"

मैंने अब रूबी को लक्ष्य करके कहा, "सीधा लन्ड हीं सुँघना चाहोगी"।
वो जरा जानकार बनते हुए बोली-"आप, बस दीदी तक हीं रहिए....मेरी फ़िक्र मत कीजिए, मुझे इस सब बात में कोई दिल्चस्पी नहीं है।"

रीता तड़ से बोली-"पर मुझे तो इसमें खुब दिलचस्पी है...।

अब बिन्दा बोली, "ले जाइए न अब रीना को भीतर....बेकार देर हो रहा है।"

मैंने भी उठते हुए रूबी को कहा, "दिलचस्पी न हो तो भी चुदना तो होगा हीं, हर लड़की की चूत का यही होता है- आज चुदो या कल पर यह तय है।"

और मैंने खड़ा हो कर रीना को साथ आने का ईशारा किया। रीना थोड़ा हिचक रही थी, तो रागिनी ने उसको हिम्मत दी-"जाओ रीना डरो मत....अभी अंकल ने कहा न कि हर लड़की की यही किस्मत है कि वो जवान हो कर जरुर चुदेगी...सो बेहिचक जाओ। मुझे तो अनजान शहर में अकेले पहली बार मर्द के साथ सोना पड़ा था, तुम तो लक्की हो कि अपने हीं घर में अपने लोगों के बीच रहते हुए पहली बार चुदोगी.. जाओ उठो...।"
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indixxx Offline
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#53
03-11-2013, 01:32 AM
likhte raho mast kahani hai

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rajbr1981 Offline
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#54
03-11-2013, 01:35 AM
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माँ - बेटियों ने एक दुसरे के सामने मुझे चुदवाया
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भाग 05
रीना को पास और कोई रास्ता तो था नहीं सो वो उठ गई और मैंने उसको बाहों में ले कर वहीं उसके होठ चुमने लगा। तब बिन्दा मुझे रोकी, "यहाँ नहीं, अलग ले जाइए....यहाँ सब के सामने उसको खराब लगेगा।"

मैंने हँसते हुए अब उसको बाहों में उठा लिया और कमरे की तरफ़ जाते हुए कहा, "पर इसको तो अब सब लाज-शर्म यहीं इसी घर में छोड़ कर जाना होगा मेरे साथ...अगर पैसा कमाना है तो..." और मैं उसको बिस्तर पर ले आया। इसके बाद मैंने रीना को प्यार से चुमना शुरु किया। वो अभी तक अकबकाई हुई सी थी। मैं उसको सहज करने की कोशिश में था।

मैंने उसको चुमते के साथ-साथ समझाना भी शुरु किया - "देखो रीना, तुम बिल्कुल भी परेशान न हो. मैं बहुत अच्छे से तुमको तैयार करने के बाद हीं चोदुँगा. तुम आराम से मेरे साथ सहयोग करो. अब जब घर पर हीं परमीशन मिल गई है तो मजे लो. मेरा इरादा तो था कि मैं तुमको शहर ले जाता फ़िर वहाँ सब कुछ दिखा समझा कर चोदता. पर यहाँ तो तुमको ब्लू-फ़िल्म भी नहीं दिखा सकता. फ़िर भी तुम आराम से सहयोग करो तो तुम्हारी जवानी खुद तुमको गाईड करती रहेगी.। लगतार पुचकारते हुए मैं उसको चुम रहा था।
रीना अब थोड़ा सहज होने लगी थी, सो धीमी आवाज में पूछी, "बहुत दर्द होगा न जब आप करेंगे मुझे?"

मैंने उसको समझाते हुए कहा, "ऐसा जरुरी नहीं है, अगर तुम खुब गीली हो जाओगी तो ज्यादा दर्द नहीं करेगा। वैसे भी जो भी दर्द होना है बस आज और अभी हीं पहली बार होगा, फ़िर उसके बाद तो सिर्फ़ मस्ती चढ़ेगी तुम पर. फ़िर खुब चुदाना।"

अब वो बोली, "और अगर बच्चा रह गया तो...?"

मैंने उसको दिलासा दिया, "नहीं रहेगा, अब सब का उपाय है....निश्चिंत हो कर चुदो अब..." और मैंने उसके कपड़े खोलने लगा।

मैं उसके बदन से उसकी कुर्ती उतारना चाह रहा था जब वो बोली, "इसको खोलना जरुरी है क्या.सिर्फ़ सलवार खोल कर नहीं हो जाएगा?"

मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया...अब शर्म छोड़ों और अपना बदन दिखाओ. एक जवान नंगी लड़की से ज्यादा सुन्दर चीज मर्दों के लिए और कुछ नहीं है दुनिया में" और मैंने उसकी कुर्ती उतार दी। एक सफ़ेद पुरानी ब्रा से दबी चुची अब मेरे सामने थी। मैंने ब्रा के ऊपर से हीं उन्हें दबाया और फ़िर जल्दी से उसको खोल कर चुचियों को आजाद कर दिया। छोटे से गोरे चुचियों पर गुलाबी निप्पल गजब की दिख रही थी।

मैंने कहा, "बहुत सुन्दर चुची है तुम्हारी मेरी जान..." और मैं उसको चुसने में लग गया।
जल्द हीं उसने अपने पहलू बदले ताकि मैं बेहतर तरीके से उसकी चूची को चूस सकूँ। मैं समझ गया कि अब लौंडिया भी जवान होने लगी है।इसके बाद मैं उसकी सलवार की डोरी को खींचा। वो थोड़ा शर्माई फ़िर मुस्कुराई, जो मेरे लिए अच्छा शगुन था। लड़की अगर पहली बार चुदाते समय ऐसे सेक्सी मुस्कान दे तो मेरा जोश दूना हो जाता है। मैंने उसको पैरों से उतार दिया और उसने भी अपने कमर को ऊपर करके फ़िर टाँगें उठा कर इसमें सहयोग किया। मैंने अब उसकी जाँघो को खोला। पतली सुन्दर अनचुदी चूत की गुलाबी फ़ाँक मस्त दिख रही थी। उसके इर्द-गिर्द काले, घने, लगभग सीधे-सीधे बाल थे जो मस्त दिख रहे थे। उसकी झाँट इतनी मस्त थी कि पूछो मत। कोई तरीके से उसको शेव करने की जरुरत नहीं थी। बाल लम्बे भी बहुत ज्यादा नहीं थे और ना हीं बहुत चौड़ाई में फ़ैले हुए थे। पहाड़ की लड़कियों को वैसे भी प्राकृतिक रूप से सुन्दर झाँट मिलता है अपने बदन पर। वैसे उसकी उमर भी बहुत नहीं थी कि बाल अभी ज्यादा फ़ैले होते। मैं अब उसकी झाँटों को हल्के-हल्के सहला रहा था और कभी-कभी उसकी भगनाशा (क्लीट) को रगड़ देता था। उसकी आँखें बन्द हो चली थी। मैं अब झुका और उसकी चूत को चूम लिया। मेरी नाक में वहाँ का पसीना, गीलेपन वाली चिकनाई और पेशाब की मिली जुली गन्ध गई। मैंने अब अपने जीभ को बाहर निकाला और पूरी चौड़ाई में फ़ैला कर उसकी चूत की फ़ाँक को पूरी तरह से चाटा। मेरी जीभ उसकी गाँड़ के छेद की तरफ़ से चूत को चाटते हुए उसकी झाँटों तक जा रही थी। जल्द हीं चूत की, पसीने और पेशाब की गन्ध के साथ मेरे थूक की गन्ध भी मेरे नाक में जाने लगी थी। रीना अब तक पूरी तरह से खुल गई थी और पूरी तरह से बेशर्म हो कर अब सहयोग कर रही थी। मैंने उसको बता दिया था कि अगर आज वो पूरी तरह से बेशर्म हो कर चुद गई तो मैं उसको रागिनी से भी ज्यादा टौप की रंडी बना दुँगा। वो भी अब सोच चुकी थी कि अब उसको इसी काम में टौप करना है सो वो भी मेरे कहे अनुसार सब करने को तैयार थी।


मैंने कहा, "रीना, अब जरा अपने जाँघ खोलो न जानू...तुम्हारी गुलाबी चूत की भीतर की पुत्ती को चाटना है।"
यह सुन कर वो आह कर उठी और बोली, "बहुत जोर की पेशाब लग रही है...इइइइस्स्स अब क्या करूँ...।"

मैं समझ गया की साली को चुदास चढ़ गई है सो मैंने कहा, "तो कर दो ना पेशाब..."

वो अकचकाई, "यहाँ....कमरे में" और जोर से अपने पैर भींची।

मैंने कहा, "हाँ मेरी रानी, तेरी रागिनी दीदी तो मेरे मुँह में भी पेशाब की हुई है, तू भी करेगी क्या मेरे मुँह में?"

मैं उसके पैर खोल कर उसकी चूत को चाटे जा रहा था। वो ताकत लगा कर मेरे चेहरे को दूर करना चाह रही थी। मैं उसको अब छोड़ने के मूड में नहीं था सो बोला, "अरे तो मूत न मेरी जान. तेरे जैसी लौन्डिया की मूत भी अमृत है रानी।"

वो अब खड़ी हो कर अपने कपड़े उठाते हुए बोली, "बस दो मिनट में आई" तो मैंने उसके मूड को देखते हुए कहा, "ऐसे हीं चली जा ना नंगी और मूत कर आजा...प्लीज आज अगर तू नंगी चली गई तो मैं तुम्हें 5000 दुँगा अभी के अभी।"

पैसे के नाम पर उसके आँख में चमक उभरी, "सच में" और फ़िर वो दरवाजे के पास जा कर जोर से बोली, "मम्मी मुझे पेशाब करने जाना है, बहुत जोर की लगी है और अंकल मुझे वैसे हीं जाने को कह रहे हैं"

रागिनी सब समझ गई सो और किसी के कहने के पहले बोली, "आ जाओ रीना, यहाँ तो सब अपने हीं हैं, और फ़िर तुम अब जिस धन्धे में जा रही हो उसमें जितना बेशर्म रहेगी उतना मजा मिलेगा और पैसा भी।"

कहानी के बारे मे अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे ताकि मुझे अपडेट करने मैं होसला मिले

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rajbr1981 Offline
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#55
03-11-2013, 01:43 AM
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माँ - बेटियों ने एक दुसरे के सामने मुझे चुदवाया
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भाग 06
अब मैं बोला, "बिन्दा, अपनी बाकी बेटियों को तुम संभालो अब. मैं और रीना नंगे हैं और मैं भी सोच रहा हूँ कि एक बार पेशाब कर लूँ फ़िर रीना की सील तोड़ूँ", कहते हुए मैं नंगे हीं कमरे से बाहर आ गया और मेरे पीछे रीना भी बाहर निकल आई। मैंने उसकी कमर में अपना हाथ डाल दिया और आँगन की दूसरी तरफ़ ऐसे चला जैसे कि हम दोनों कैटवाक कर रहें हों। बिन्दा के चेहरे पर अजीब सा असमंजस था, जबकि उसकी दोनों बेटियाँ मुँह बाए हम दोनों के नंगे बदन को देख रही थी। रागिनी सब समझ कर मुस्कुरा रही थी। जल्द हीं हम दूसरी तरफ़ पहुँच गए तो मैंने रीना के सामने हीं अपने लन्ड को हाथ से पकड़ कर मूतना शुरु किया। रीना भी अब पास में बैठ कर मूतने लगी। उसकी चूत चुदास से ऐसी कस गई थी कि उसके मूतते हुए छर्र-छर्र की आवाज हो रही थी। उसका पेशाब पहले बन्द हुआ तो वो खड़ी हो कर मुझे मूतते देखने लगी।
मैं बोला, "लेगी अपने मुँह में एक धार..."। रीना ने मुँह बिचकाया, "हुँह गन्दे...."। अब मेरा पेशाब खत्म हो गया था। मैंने हँसते हुए अपना हाथ उसकी पेशाब से गीली चूत पर फ़िराया और फ़िर अपने हाथ में लगे उसके पेशाब को चाटते हुए बोला, "क्या स्वाद है....? इसमें तुम्हारे जवानी का रस मिला हुआ है मेरी रानी।"
यह सब देख रीता बोली, "आप कैसे गन्दे हैं, दीदी का पेशाब चाट रहे हैं"। मैंने अब अपना हाथ सुँघते हुए कहा, "पेशाब नहीं है, ऐसी मस्त जवान लौन्डिया की चूत से पेशाब नहीं अमृत निकलता है मेरी रानी। पास आ तो मैं तेरी चूत के भीतर भी अपनी उँगली घुसा कर तेरा रस भी चाट लुँगा।"
बिन्दा अब हड़बड़ा कर बोली, "ठीक है, ठीक है, अब आप दोनों कमरे में जाओ और भाई साहब आप अब जल्दी छोड़ लीजिये रीना को, इसे नहाना धोना भी है फ़िर उसको मंदिर भी भेजुँगी।"
मैंने रीना की चुतड़ पर हल्के से चपत लगाई, "चल जल्दी और चुद जा जानू, तेरी माँ बहुत बेकरार है तेरी चूत फ़ड़वाने के लिए...।"फ़िर मैंने बिन्दा से कहा, "बहुत जल्दी हो तो यहीँ पटक कर पेल दूँ साली की चूत के भीतर क्या?" बिन्दा अब गुस्साई, "यहाँ बेशर्मी की हद कर दी...कमरे में जाइए आप दोनों.।
मैं समझ गया कि अब उसका मूड खराब हो जाएगा सो मैं चुपचाप रीना को कमरे में ले आया।इतनी देर में पेशाब कर लेने के बाद मेरा लन्ड करीब 40% ढ़ीला हो गया था। मैंने रीना को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और फ़िर से उसकी चूत को चाटने लगा। मैं अपने हाथ से अपना लन्ड भी हिला रहा था कि वो फ़िर से टनटना जाए। देर लगते देख मैंने रीना को कहा कि वो मेरा लन्ड मुँह में ले कर जोर-जोर से चूसे।
रीना अब मुँह बना कर बोली-"नहीं, आप पेशाब करने के बाद इसको धोए नहीं थे, मैं देखी हूँ।" मैंने उसको समझाया, "और जैसे तुमने अपनी चूत धोई थी...तुम देखी थी न कि मैं तुम्हारे चूत पर लगे पेशाब को कैसे चाट कर तेरी छॊटी बहन को दिखाया था...औरत-मर्द जब सेक्स करने को तैयार हों तो ये सब भूल-भाल कर एक दूसरे के लन्ड और चूत को पूरा इज्जत देना चाहिए। चूसो जरा तो फ़िर से जल्द कड़ा हो जाएगा। अभी इतना कड़ा नहीं है कि तुम्हारी चूत की सील तोड़ सके। अगर एक झटके में चूत की सील पूरी तरह नहीं टूटी तो तुमको हीं परेशानी होगी। इसलिए जरुरी है कि तुम इसको पूरा कड़ा करो।"
इसके बाद मैंने पहली बार रीना को असल स्टाईल में कहा, "चल आ जा अब, नखरे मत कर नहीं तो रगड़ कर साली तेरी चूत को आज हीं भोसड़ा बना दुँगा साली रंडी मादरचोद..." और मैंने अपने ताकत का इस्तेमाल करते हुए उसका मुँह खोला और अपना लन्ड उसकी मुँह में डाल दिया।
वो अनचाहे हीं अब समझ गई कि मैं अब जोर जबर्दस्ती करने वाला हूँ। वो बेमन से चूसने लगी पर मेरा तो अब तक कड़ा हो गया था। पर मैं अपना मूड बना रहा था, उसकी मुँह में लन्ड अंदर-बाहर करते हुए कहा, "वाह मेरी जान, क्या मस्त हो कर अपना मुँह मरवा रही हो, मजा आ रहा है मेरी सोनी-मोनी..." और मैं अब उसको प्यार से पुचकार रहा था। वो भी अब थोड़ा सहज हो कर लन्ड को चुस रही थी।
थोड़ी देर में मैं बोला, "चल अब आराम से सीधा लेटॊ, अब तुमको लड़की से औरत बना देता हूँ...बिन कोई फ़िक्र के आराम से पैर फ़ैला कर लेट और अपनी चूत चुदा....और फ़िर बन जा मेरी रंडी..."।
मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी जाँघो के बीच में आ गया। मेरा लन्ड एकदम सीधा फ़नफ़नाया हुआ था और उसकी चूत में घुसने को बेकरार था। मैंने उसको आराम से अपने नीचे सेट किया और फ़िर उसकी दोनों टाँगों से अपनी टाँगे लपेट कर ऐसे फ़ँसा दिया कि वो ज्यादा हिला न सके। इसके बाद मैंने अपने दाहिने हाथ को उसके काँख के नीचे से निकाल कर उसके कंधों को जकड़ते हुए उसके ऊपर आधा लेट गया। मेरा लन्ड अब उसकी चूत के करीब सटा हुआ था। अपने बाँए हाथ से मैंने उसकी दाहिनी चुची को संभाला और इस तरह से उसके छाती को दबा कर उसको स्थिर रखने का जुगाड़ कर लिया। पक्का कर लिया कि अब साली बिल्कुल भी नहीं हिल सकेगी जब मैं उसकी चूत को फ़ाड़ूंगा। सब कुछ मन मुताबिक करने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो अपने हाथ से मेरे लन्ड को अपने चूत की छेद पर लगा दे। और जैसे हीं उसने मेरे लन्ड को अपनी चूत से लगाया, मैंने जोर से कहा, "अब बोली साली....कि चोदो मुझे...बोल नहीं तो साली अब तेरा बलात्कार हो जाएगा। लड़की के न्योता के बाद हीं मैं उसको चोदता हूँ...मेरा यही नियम है।"
वो भी अब चुदने को बेकरार थी सो बोली, "चोदो मुझे...." मैं बोला, "जोर से बोल कि तेरी माँ सुने....बोल कुतिया....जल्दी बोल मदर्चोद...."
वो भी जोर से बोली, "चोदो मुझे, अब चोदो जल्दी...आह...".और उसकी आँख बन्द हो गयी। मैंने अब अपना लन्ड उसकी चूत में पेलना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे मेरा सुपाड़ा भीतर चला गया और इसके बान वो दर्द महसूस की। उसका चेहरा बता रहा था कि अब उसको दर्द होने लगा है। मैं उसके चेहरे पर नजर गड़ाए था और लन्ड भीतर दबाए जा रहा था। मै रुका तो उसको करार आया वो राहत महसूस की और आँख खोली।
मैं पूछा, "मजा आ रहा था?"रीना बोली,"बहुत दर्द हुआ था...."। मैं बोला - अभी एक बार और दर्द होगा, अबकि थोड़ा बरदास्त करना"। मैंने अपना लन्ड हल्का सा बाहर खींचा और फ़िर एक जोर का नारा लगाया, "मेरी रीना रंडी की कुँआरी चूत की जय....रीना रंडी जिन्दाबाद...." मैंने इतनी जोर से बोला कि बाहर तक आवाज जाए। इस नारे के साथ हीं मैंने अपना लन्ड जोर के धक्के के साथ "घचाक" पूरा भीतर पेल दिया।
रीना दर्द से बिलबिला कर चीखी, "ओ माँ....मर गई......इइइइस्स्स्स्स्स्स्स्स अरे बाप रे...अब नहीं रे....माँ...." वो सच में अपनी माँ को पुकार रही थी।" पर एक कुँआरी लड़की की पहली चुदाई के समय कभी किसी की माँ थोड़े न आती है, सो बिन्दा भी सब समझते हुए बाहर हीं रही और मैं उसकी बेटी की चूत को चोदने लगा। घचा-घच....फ़चा-फ़च....घचा-घच....फ़चा-फ़च.....। रीना अब भी कराह रही थी और मैं मस्त हो कर उसके चेहरे पर नजर गड़ाए, उसके मासूम चेहरे पर आने वाले तरह-तरह के भावों को देखते हुए उसकी चूत की जोरदार चुदाई में लग गया।
रीना के रोने कराहने से मुझे कोई फ़र्क नहीं पर रहा था। आज बहुत दिन बाद मुझे कच्ची कली मिली थी, और मेरी नजर तो अब इसके बाद की संभावनाओं पर थी। घर में रीना के बाद भी दो और कच्ची कलियाँ मौजूद थीं। मैं रीना को चोदते हुए मन हीं मन रागिनी का शुक्रिया कर रहा था जो वो मुझे यहाँ बुलाई। करीब दस मिनट की कभी धीरे तो कभी जोर के धक्कमपेल के बाद जब मैं झड़ने के करीब था तो रीना का रोना लगभग बंद हो गया था। मैं रीना को बोला की अब मैं झड़ने वाला हूँ तो वो घबड़ा कर बोली, अब बाहर कीजिए, निकालिए बाहर, खींचिए न उसको मेरे अंदर से" और वो उठने लगी।
मगर मैं एक भार फ़िर उसको अपनी जकड़ में ले चुका था। पहली बार चूद रही थी, सो मैंने भी सोंचा कि उसको मर्द के पानी को भी महसूस करा दूँ। मैं रीना की चूत को अपने पानी से भर दिया।
वो घबड़ा रही थी, बोली - "बाप रे, अब कुछ हो गया तो कितनी बदनामी होगी। मैं अब निश्चिन्त हो कर अपना लन्ड बाहर खींचा, एक फ़क की आवाज आई। रीना की चूत एकदम टाईट थी, अभी भी मेरे लन्ड को जकड़े हुए थी।
मैंने रीना को कहा की अब वो पेशाब कर ले, ताकि जो माल भीतर मैंने गिराया है उसका ज्यादा भाग बाहर निकल जाए, और पेशाब से उसकी चूत भी थोड़ा भीतर तक धुल जाए। चुदाई के खेल के बाद पेशाब करना बेहतर हैं समझ लो इस बात को", मैंने उसको समझाया।
वो अब कपड़े समेटने लगी तो मैंने कहा, "अब इस बार ऐसे बाहर जाने में क्या प्रौब्लम हैं चुदने के पहले तो नंगा बाहर जा कर मूती थी तुम?"
मैं देख रहा था कि अब वो थोड़ा शान्त हो गई थी और उसका मूड भी बेहतर हो गया था। मेरे दुबारा पूछने पर बोली, "अब ऐसे जाने में मुझे शर्म आएगी?"मैं पूछा, "क्यूँ भला..."।
वो सर नीचे कर के कही, "तब की बात और थी, अब मैं नई हूँ... पहले मैं लड़की थी और अब मैं औरत हूँ तो लाज आएगी न शुरु में सब के सामने जाने में...।"
मुझे शरारत सुझी, सो मैंने सब को नाम ले ले कर आवाज लगाई, "रागिनी...बिन्दा....रूबी....रीता...सब आओ और देखो, रीना को अब तुम लोग के सामने आने में लाज लग रहा है...मेरा सब माल अपने चूत में ले कर बैठी है बेवकूफ़..., बाहर जाकर धोएगी भी नहीं" कहते हुए मैं हँसने लगा।
मेरी आवाज पर रागिनी सबसे पहले आई और रीना की चूत में से उसकी जाँघो पर बह रहे पानी देख कर मुस्कुराई, "आप अंकल इस बेचारी की कुप्पी पहली हीं बार में भर दिए, ऐसे तो कोई सुहागरात को अपनी दुल्हन को भी नहीं भरता है" और वो कपड़े से उसकी चूत साफ़ करने लगी।
रीना शर्मा तो रही थी पर चुप थी। मैं भी बोला, "अरे सुहागरात को तो लड़कों को डर रहता है कि अगर दुल्हन पेट से रह गई तो फ़िर कैसे चुदाई होगी.... मैं तो हर बार नई सुहागरात मनाता हूँ। वैसे भी इतनी बार मैं निकालता हूँ कि मेरे वीर्य से स्पर्म तो खत्म ही हो गये होंगे, फ़िक्र मत करों, यह पेट से नहीं रहेगी।
अब तक मैंने कपड़े बदल लिए और बाहर निकल गया, कुछ समय बाद रागिनी अपने साथ रीना को ले कर बाहर आई। बिन्दा ने एक नजर रीना को देखा, और फ़िर झट से कहा, "जाओ, अब नहा-धो कर साफ़-सुथरी हो जाओ, मंदिर चलना है।"
रीना भी चुपचाप चल दी। मैंने देखा रूबी चुल्हे के पास है सो मैंने कहा एक कप और चाय पिला दो रूबी डार्लिंग , तुम्हार अहसान होगा, बहुत थक गया हूँ।" रूबी ने मुँह बिचकाते हुए कहा, "हूँह, साँढ़ भी कहीं थकता है....।"
मैंने भी तड़ से जड़ दिया, "बछिया को चोदने में थकता है डार्लिंग ...और तुम्हारी दीदी तो लाजवाब थी... अंत-अंत तक मेरे धक्के पर कराह रही थी, ऐसी कसी हुई चूत की मालकिन है।"
इस बात को सुन कर बिन्दा फ़िक्रमंद हो गई। मेरे से पूछी, "तब अब आगे कैसे होगा, शहर में तो बेचारी अकेली रह जाएगी, घुट-घुट कर रोएगी..."।
मैंने समझाया, "अरे नहीं बिन्दा, ऐसी बात नहीं है, अभी दो-चार बार और कर दुँगा तो सही हो जाएगी, जब पुरा मुँह खुल जाएगा। असल में न उसको आप सब के प्रोत्साहन की जरुरत है। आप उसको सब करने बोल रहे हैं पर खुल कर नहीं, जब सब आपस में बेशर्मी से बात-चीत करेंगे तो उसका दिमाग भी इस सब के लिए तैयार होने लगेगा और फ़िर बदन भी तैयार हो जाएगा। ऐसे मैं तो उसको 2-3 बार में ढ़ीला कर हीं दुँगा। आप तो जान चुकी हैं कि मेरा लंड आम लोग से मोटा भी है....सो जब मेरे से बिना दर्द के चुदा लेगी तो बाजार में कुछ खास परेशानी नहीं होगी। अभी तो जितनी टाईट है, अगर मैं हीं पैसा वसूल चुदाई कर दूँ जैसा कि कस्टमर आमतौर पर रंडियों की करते हैं तो बेचारी इतना डर जाएगी कि चुदाने के नाम पर उसकी नानी मरेगी।"
रूबी चाय ले आई थी और वहीं खड़े हो कर सब सुन रही थी। मैं कह रहा था, "उसको बहुत प्यार से आराम-आराम से अपने मोटे लन्ड के चोदा हूँ आज"। रूबी अब बोली, "आपको अपनी मुटाई पर बहुत नाज है न, खुद से अपनी बड़ाई करते रहते हैं।"
उसको शायद मैं कुछ खास पसन्द नहीं था।"मैंने उसको जवाब दिया, "ऐसी कोई बात नहीं है, मेरे से ज्यादा सौलिड लन्ड वाले हैं दुनिया में...पर मेरा कोई खराब नहीं है बल्कि ज्यादातर मर्दों से बहुत-बहुत बेहतर है....जब तुम बाजार में उतरोगी और कुछ अनुभव मिलेगा तब समझोगी।"
अब मैं दिल में सोंच रहा था कि जब इस कुतिया की सील तोड़ने की नौबत आएगी उस दिन वियाग्रा खा कर साली को फ़ाड़ दुँगा, वैसे भी मैं इसको खास पसन्द हूँ नहीं तो बेहतर होगा कि साली का बलात्कार हीं कर दूँ। इस घर में तो अब मेरे सात खून माफ़ होंगे।
बिन्दा सब सुन कर सर हिलाई, "ठीक है, अब तो यह आपके और रागिनी के हीं भरोसे है।"रीना अब तैयार हो कर आ गयी तो बिन्दा, रीना और रूबी मंदिर चली गई। घर पर मेरे साथ रागिनी और रीता थीं। मैं भी अब नहाने धोने के सोच रहा था। जब मैं टट्टी के लिए गया तो रीता आंगन में नल पर नहाने लगी। मैं भी वहीं ब्रश करने लगा। सब दिन की तरह रीता आज भी सिर्फ़ एक पैन्ट में नहा रही थी। उसकी छॊती-छोटी चुचियाँ अभी तरीके से चुची बनी भी नहीं थी...एक उभार था जिसका आधा हिस्सा गुलाबी था, बड़े से एक रुपया के सिक्के जितना और उस पर एक बड़े किशमिश की साईज की निप्पल थी। आज आराम से गौर से उसकी छाती का मुआयना कर रहा था तो लगा कि कल मैंने जिसे चुचक कहा था...वह सही में अब चूची लग रहा है। यह बात अलग है कि अभी उसमें और ऊभार आना बाकी था। मैंने एक तौवेल लपेट रखा था अपनी कमर में।
रीना को चोदने के बाद से मैं ऐसे हीं टौवेल में घुम रहा था। नहाते हुए रीता बोली, "अंकल, क्या दीदी को बहुत तकलीफ़ हुई थी?"मैंने उससे ऐसे सवाल की अभी उम्मीद नहीं की थी सो चौंक कर कहा, "किस बात से?"
अब रीता फ़िर से पूछी, "वही जब आप दीदी को कमरे में ले जाकर उसकी चुदाई कर उसको औरत बनाए तब?"मै बोला, "अब थोड़ा बहुत तो हर लड़की को पहली बार में परेशानी होती है कुछ खास नहीं। पर इसमें मजा इतना मिलता है लड़की को कि वो इसक काम को बार-बार करते है मर्दों के साथ। अगर सेक्स में मजा नहीं आता तो क्या इतना परिवार बनता, फ़िर बच्चे कैसे होते और दुनिया कैसे चलती...सोचों।"
रीता कुछ सोंची, सब समझी फ़िर बोली, "तब दीदी इस तरह से कराह-कराह कर रो क्यों रही थी?"मैं अब उसको समझाया, "वो रो नहीं रही थी बेटा...ऐसी आवाज जब लड़की को मजा मिलता है तब भी मुँह से निकलता है...आह आह आह। असल में तुम कभी ब्लू-फ़िल्म तो देखी नहीं होगी सो तुमको कुछ पता नहीं है। वैसे मैंने कमरा बन्द नहीं किया हुआ था, तुम चाहती तो आ जाती देखने।"
रीता अब खड़े हो कर बदन तौलिए से पोछते हुए बोली, "जैसे माँ तो मुझे जाने हीं देती...देखते नहीं हैं जब आप लोग बात करते हैं तो कैसे मुझे किसी बहाने वहाँ से हटाने की कोशिश करती है। अभी इतना बात कर पा रही हूँ कि वो अभी 2-3 घन्टे नहीं आएगी, मंदिर से बाजार भी जाएगी"। कल मैं उसको नहाते समय जब देखा तो चूची और खाँख का बाल हीं देख पाया था और बूर पर कैसे बाल होंगे सोचता रह गया था। आज मुझे भी मौका मिल रहा था कि उसकी बूर पर निकले ताजे बालों को देखूँ।
मैंने अब उसको एक औफ़र दिया, "रीता तुम मेरा एक बात मानो तो मैं तुमको अभी सब दिखा सकता हूँ, रागिनी है न...उसको अभी तुम्हारे सामने चोद दुँगा, फ़िर तुम सब देख समझ लेना कि कैसे तुम्हारी दीदी को मैंने औरत बनाया था।"
रीता की आँख में अनोखी चमक दिखी, "क्या बात है बोलिए जरुर मानुँगी।"मैंने मुस्कुरा कर कहा, अगर तुम मेरे सामने अपनी पैन्ट भी खोल कर अपना बदन पोंछो...तो। असल में मैं तुम्हारी बूर पर निकले बालों को देखना चाहता हूँ, कभी तुम्हारी उम्र की लड़की की बूर नहीं देखी है न आज तक।"


कहानी के बारे मे अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे ताकि मुझे अपडेट करने मैं होसला मिले

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03-11-2013, 02:18 AM
likhte raho mast kahani hai


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03-11-2013, 03:12 AM
Aaj kuch maza nhi aayd kuch naya aur majedar ho to maza aaye
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#58
03-11-2013, 03:28 AM
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06-11-2013, 02:26 AM
Nice post
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06-11-2013, 11:01 PM
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