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Desi JULIEE MERA NAME HAI

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Poll: MUJ KO KASE CHODNA CHO GEY
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GHORI BANA KE
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UPER BETHA KER
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Desi JULIEE MERA NAME HAI
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#21
20-08-2016, 01:41 PM
मैं देवर की सेवा मे ( PART 2nd )
मैंने रॉकी का मुँह पकड़ कर अपने मम्मों की तरफ़ किया तो वो सूँघ कर धीरे-धीरे से अपनी जुबान मेरे मम्मों के ऊपरी हिस्से पर रगड़ने लगा। ‘आअहहह’ क्या एहसास था उसकी जुबान का। वो ब्रा के बीच भी अपना मुँह डालने की कोशिश करता मगर ब्रा टाईट होने के कारण उसका मुँह अंदर नहीं जा पाता था। मगर उसकी जुबान थोड़ी सी मेंरे मुम्मो को छू जाती तो मेरे तन बदन में और भी बिजली दौड़ जाती।अब मैंने अपनी ब्रा के हुक पीछे सो खोल दिये और फ़िर ब्रा को भी उतार दिया। रॉकी अब इन खुले कबूतरों को देख कर और भी तेजी से निप्पल पर अपनी जुबान चलाने लगा। वो अपने लौड़े को बड़े अंदाज़ से हिला रहा था। मैं उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगी और फ़िर अपना हाथ उसके लंड कि तरफ़ ले गयी। जब मैंने रॉकी का लंड हाथ में पकड़ा तो शायद वो परेशान हो गया और जल्दी से अपना हाथ बढ़ा कर मेरे हाथ की तरफ़ लपका। मैंने उसका लंड छोड़ दिया मगर मुझे उसके लंड की जगह वाला हिस्सा काफी सख्त लगा। रॉकी फ़िर से मेरे निप्पल को चाटने लगा। अब मैंने अपनी पजामी (सलवार) जो मेरी टाँगों से चिपकी हुई थी, उसका नाड़ा खोलना शुरू किया तो रॉकी पहले से ही मेरी पजामी को सूँघने लगा। मैंने अपने चूतड़ उठा कर अपनी पजामी को नीचे किया और फ़िर अपने सैंडल पहने पैरों से निकाल कर अलग कर दिया। मेरी पैंटी पर चूत वाली जगह पर मेरी चूत का रस लगा हुआ था। रॉकी इसे तेजी से सूँघने लगा और फ़िर मैं खड़ी हो गयी और मैंने अपनी पैंटी भी उतार फेंकी। अब मैं बिल्कुल नंगी थी और बस पैरों में काले रंग के ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। मेरी चिकनी चूत को देख कर रॉकी मेरी टाँगों में मुँह घुसाने लगा और मेरी जाँघों पर अपनी जुबान से चाटने लगा। एक तो पहले से ही शराब का नशा था और रॉकी की हरकतों से तो मैं और ज्यादा मदहोश हुई जा रही थी। मैं बेड के किनारे पर बैठ गयी और अपनी टाँगें फैला दी। रॉकी के सामने मेरी चूत के होंठ खुल गये जिसमें रॉकी ने जल्दी से अपनी जुबान का एक तगड़ा वार किया और मैं सर से पाँव तक उछल पड़ी। मुझे इतना मज़ा तो किसी और मर्द से चूत चटवा कर भी नहीं आया था जितना मज़ा जवान होता देवर रॉकी मेरी चूत चाट कर दे रहा था। जब रॉकी अपनी जुबान को मेरी चूत पर ऊपर नीचे करता और उसकी जुबान मेरी चूत के दाने से टकराती जिसके कारण मैं भी अपनी चूत को मसलने लगी और मेरी चूत में से मेरे चूत-रस की एक तेज धार निकल कर रॉकी की जुबान पर गिरी। रॉकी को तो जैसे मलाई मिल गयी हो। वो और भी तेजी से चूत को चाटने लगा और अपनी जुबान को चूत के अंदर तक घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। मैंने देखा रॉकी का लंड भी खड़ा था और पैंट मे से ही बाहर आने को हो रहा था और मुझसे भी अब और सब्र नहीं हो रहा था। और मैनें फटाफट से रॉकी के सारे कपड़े उतार ड़ाले और उस को पूरा नंगा कर दिया हे भगवान क्या लौड़ा था रॉकी का मेरे पति से दोगुना और मेरे बाँस के लौड़े की लम्बाई के बराबर पर मोटाई बाँस के लौड़े से ज्यादा थी और मेरे देवर रॉकी का लौड़ा थोड़ा नोकीला किस्म का था और रॉकी के लौड़े की स्कीन भी नही फटी थी इस का मतलब रॉकी का लौड़ा अभी कुवाँरा था और रॉकी को बैड़ पर गिरी कर मैं जल्दी से रॉकी के लौड़े को मुहँ मे लेकर चुसने लगी और कोई 2 मिनट के बाद रॉकी के लौड़े ने अपना गढ़ा और गर्म वीर्य मेरे मुहँ मे छोड़ दिया जिसे मैंने बड़े चाव से पी लिया तभी मैंने रॉकी से बोला तेरा तो जल्दी छुट गया तो रॉकी बोला सौरी भाभी किसी औरत ने पहली बार मेरा लौड़ा चुसा है और मैं पहली बार किसी औरत के साथ नंगा हुँ तो मैं बोली कोई बात नही आज से तु मुझको अपनी गर्लफ्रंड़ समझ या अपनी बीवी या अपनी राण्ड़ मेरे तीनो छेद (मुहँ,चूत,गाण्ड़) तेरे से चुदने के लिये हमेशा तैयार हैं और फिर वो तो मेरी साइड में से होकर मेरी चूत को ही चाटने की कोशिश कर रहा था। मैं कुत्तिया की तरह चल कर घूम गयी और अपनी चूत पीछे से उसके सामने कर दी। वो फ़िर से मेरी चूत को चाटने लगा। अब रॉकी मेरे पालतू कुत्ते की तरह था और उसने पहले कभी किसी को नहीं चोदा था और चुदाई का उसे कोई तजुर्बा नहीं था। काफी देर के बाद भी जब वो मेरे ऊपर नहीं चढ़ा तो मैं अपनी गाँड के बल पर बैठ गयी और मैंने उसके दोनों अगले पाँव पकड़े और उनको अपनी कमर के साथ लपेट लिया और फ़िर से आगे की ओर झुक गयी। इससे उस की कमर मेरी गोद में आ गई और मैं आगे से और नीचे झुक गयी मैं उसका लंड अपने मुहँ में लेकर चुसने लगी। जिससे अब रॉकी को भी ये अच्छा लगा और वो भी अपनी कमर हिला-हिला कर अपना लंड मेरे मुहँ में ठोकने लगा और अपने अगले पैरों से मेरी कमर को कस के पकड़ लिया। मैं ने अपने एक हाथ से रॉकी का लंड अपनी उंगलियों में हल्का सा पकड़ लिया। उसके लंड धीरे धीरे सख्त होता महसूस हो रहा था। मेरी उंगलियों के स्पर्श से रॉकी को शायद ऐसा लगा कि उसका लंड मेरी चूत में घुस गया है तो वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा और अपने अगले पाँव से मुझे अपनी ओर खींचने लगा। इतने तेज झटकों से मेरे हाथ से भी लंड इधर उधर हो रहा था और ठीक से मुहँ में नहीं जा रहा था।
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#22
20-08-2016, 01:45 PM
मैं देवर की सेवा मे ( PART 3rd )
मगर फ़िर अचानक रॉकी का लंड सही ठिकाने पर टकराया और तेजी से मेरे मुहँ में गले तक घुस गया और रॉकी ने अपने दोनो हाथो से मेरे सर को कड़ कर अपने लंड पर दबाया लंड़ गाले की दीवारों से ऐसे टकराया जैसे कोई तेज नोकीला सारिया मेरे गाले में घुस गया हो। इस वार ने मेरा तो बैलेंस ही बिगाड़ कर रख दिया। मैंने जल्दी से लंड को छोड़ा और अपना हाथ आगे ज़मीन पर लगा कर रॉकी से छुटने की कोशीश करने लगी उधर रॉकी भी मुझे अपनी ओर खींच रहा था तो उसका भी सहारा मिल गया। मगर इतनी देर में रॉकी का एक और धक्का लगा और उसका लंड दोबारा मेरे गाले की दीवारों से रगड़ता हुआ पहले से भी ज्यादा अंदर घुस गया। मेरे मुँह से फ़िर घुटी घुटी सी ‘आह’ की आवाज़ निकल गयी। मैं समझ गयी कि अनाड़ी तो मुझे अनाड़ी की तरह ही चोदेगा। इसलिये मैं झट से संभल गयी और अगले वार के लिये तैयार भी हो गयी। रॉकी ने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल के फ़िर से लंड को मेरे गाले में घुसेड़ दिया। मैंने भी अपने गाले को हिला कर लंड के धक्के सहने के लिये अड्जस्ट कर लिया। रॉकी के हर वार से मुझे मीठा-मीठा एहसास होने लगा था। रॉकी की ज़ुबान बाहर थी और वो अपने कंधे के ऊपर से अपना मुँह आगे को उपर ऊठाये हुए था और अपने अगले दोनों पैरों से मेरी कमर को इस तरह से पकड़े हुए था कि मेरी कमर उसके धक्के से आगे ना जा सके। अब ज़रा भी दर्द बाकी नहीं रहा था, बस मज़ा ही मज़ा था। रॉकी के लंड का आगे वाला पतला नोकीला हिस्सा जब मेरे मुहँ के अंदर तक जाता तो एक अजीब सा नशा मेरे दिमाग में घुल जाता था। मगर अब फ़िर एक दर्दनाक हमला होने वाला था। रॉकी का लंड पूरा खड़ा होकर कर अब मुझे कुछ ज्यादा ही मोटा महसूस होने लगा। मगर मैं इस लौड़े को अब चूत में लेना चहती थी। मैंने देखा तो सच में रॉकी का लंड एक दम खड़ा हुआ था और मोटा भी काफी था। रॉकी तो लगातार अपने धक्के तेज कर रहा था, ताकि उसका वो मोटा हिस्सा भी मेरे मुहँ में घुस जाये। मगर मैं जानबूझ कर उसका झटका लगते ही अपने मुहँ को ऊपर कर देती ताकि उसका वो मोट हिस्सा मेरे मुहँ में ना जाये। पर रॉकी को ये सब मंज़ूर नहीं था। वो अपना काम अधूरा नहीं छोड़ने वाला था। उसने मुझे अपने पैरों से कस के जकड़ लिया और अपने हाथो से मेरे सर को पकड़ लिया। अब उसकी टाँगें मेरी जाँघों के साथ चिपकी हुई थीं। मुझे एहसास हो गया था कि अब रॉकी मेरे मुहँ के बलात्कार पर उतर आया है। रॉकी फ़िर से अपने मोटे लंड का प्रहार मेरे मुहँ पर करने लगा था और हर एक धक्के से मुझे एहसास होता कि उसका मोटा लौड़ा मेरे मुहँ में और अन्दर तक घुस रहा है। मैंने एक बार कोशिश भी कि के रॉकी के हाथों से छूट जाऊँ, मगर उसने मुझे इतनी मजबूती से जकड़ रखा था कि मैं डर गयी कि उसके नाखून मेरे बदन में न लग जायें तब मेनें रॉकी के लौड़े पर जोर काट खाय जिस से रॉकी पकड़ धीली हो गई और मैं जल्दी से रॉकी से अलग हो कर खड़ी हो गई मेरे काटने के कारण रॉकी को गुस्सा आ गया और मेरे दोनो गालो पर जोरदार थप्पड़ो की बरसात कर दी और मुझको उठा कर मेरे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी टाँगो को चोड़ै कर के मेरी चूत के छेद पर अपने नोकीले लौड़े रख कर जोर से धक्के लगाने लगा अब मैंने मोटे लौड़े को चूत में घुसवा लेना ही ठीक समझा। मेरी चूत मुझे फैलती हुई महसूस होने लगी और इससे दर्द भी होने लगा था। मेरे मुँह से ‘आह-आह’ की आवाजें निकलने लगी थी। मगर रॉकी को तो मज़ा आ रहा था। वो हर धक्के के साथ मुझे अपनी ओर खींच लेता और  जोरदार झटका लगा देता। फिर एक और झटका लगा और उसका लौड़ा पुरा मेरी चूत में घुस गया। मेरे मुँह से चींख निकल गयी। मेरी चूत का मुँह जो बुरी तरह फैल कर फट रहा था अब फिर से नॉर्मल हो गया जिससे मुझे कुछ राहत मिली।
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#23
20-08-2016, 01:47 PM
मैं देवर की सेवा मे ( PART 4th )
मगर मुझे अपनी चूत में मोटा और लम्बा लौड़ा ठूँसा हुआ थोड़ा अजीब भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था। अब रॉकी थोड़ी देर के लिये रुका और फ़िर से झटके लगाने लगा। मैं भी उसके साथ अपनी कमर हिलाने लगी कोई 25 मिनट के बाद रॉकी के चोदने की स्पीड़ बढ़ गई मगर अब उसका लंड चूत में फंस चुका था। वो बाहर नहीं आ रहा था और अंदर ही अपना कमाल दिखा रहा था। इतनी देर में रॉकी ने तेज-तेज कमर हिलायी और फ़िर अपनी कमर को ऊपर उठा कर मुझे जोरदार धक्का लगाते हुए कस के जकड़ लिया। मुझे भी अपनी चूत में उसके लंड का तेज झटका लगा, जो अब तक के झटकों से सब से आगे तक पहुँचा था और फ़िर रॉकी के लंड का गरम-गरम पानी मैंने अपनी चूत में महसूस किया। रॉकी के तेज झटकों की वजह से मैंने भी एक बार फ़िर से अपना पानी छोड़ दिया। उधर रॉकी ने मेरी चूत में जितनी भी पिचकारियाँ छोड़ी मुझे सब का बारी-बारी एहसास हुआ। मैं बेहद मज़े और मस्ती में थी और थोड़ी देर ऐसे ही लंड को चूत में रखना चाहती थी। मगर रॉकी जो बुरी तरह से हाँफ रहा था, उसने मेरी कमर को छोड़ दिया और एक साइड को उतरने लगा। 
मेरी चूत में उसका मोटा और लम्बा फंसा हुआ था और रॉकी के नीचे उतरने से मेरी चूत पर बहुत प्रेशर पड़ा और दर्द का एहसास होने लगा। इसलिये मैंने झट से अपने दोनों हाथो से रॉकी की कमर को पकड़ा और उसको उतरने से रोक लिया। मगर रॉकी अब रुकने वाला नहीं था, वो बेतहाशा हाँफ रहा था। रॉकी मेरे ऊपर से हटा कर नीचे उतर गया लेकिन उसका लंड मेरी चूत में वैसे ही फंसा रहा। मुझे एहसास हुआ कि उसके लंड से मेरी चूत में अब भी काफी रस बह रहा था। मैं ऐसे ही पंद्रह-बिस मिनट तक किसी तरह रॉकी से जुड़ी रही जैसे कि अक्सर लोग आपस में गाले मिलते दिखायी देते हैं। फिर मुझे अपनी चूत में रॉकी के लंड थोड़ा ढीला होता महसूस हुआ तो मैंने एक हाथ से उसके लंड को पकड़ा और पीछे कि तरफ़ खींचा तो उसका मोटा औऱ लम्बा लौड़ा बाहर आने लगा। जैसे ही उसका मोटा और लम्बा लंड मेरी चूत में से बाहर आया तो मेरी चूत में से ‘फ़च’ की आवाज आयी जैसे की शैम्पेन की बोतल खोली हो। रॉकी भी शायद इसी के इंतज़ार में था। लंड बाहर निकलते ही वो बिस्तर पर एक और लुढ़क गया। अब मैंने उसका पूरा लंड लटका हुआ देखा। करीब सात-आठ इंच का होगा और आखिर में वो मोटा लौड़े की जड़ वाला हिस्सा अभी भी काफी फूला हुआ था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसा थी। मैं उसके लंड की तरफ़ देखती रही और खुद भी सीधी होकर बैठ गयी। मेरी चूत में से मेरा और रॉकी का मिला जुला माल बहने लगा। मैं नीचे ही फ़र्श पर बैठी थी और नीचे ही मेरी चूत में से निकल रहा पानी फ़ैल रहा था। मैं भी निढाल होकर बैठ गयी और रॉकी की तरफ़ देखती रही। रॉकी मेरी कच्छी से अपने लंड को साफ कर रहा था और थोड़ी देर में ही वो सो गया और धीरे धीरे उसका लंड भी छोटा होकर सो गया। जब मैं उठ कर खड़ी हुई तो मेरी चूत में से निकलता मेरा और रॉकी का मिला-जुला माल मेरी टाँगों से होता हुआ मेरे पैरों और सैंडलों के बीच में बहने लगा। मैंने बाथरूम में जाकर पेशाब किया। मेरी चूत टाँगें और सैंडलों में मेरे पैर चिपचिपा रहे थे और बेडरूम के फर्श पर भी काफी रस फैला हुआ था मगर उस वक्त मैंने कुछ साफ नहीं किया। बस बेडरूम में आकर धम्म से बेड पर लुढ़क गयी और सो गयी। और करीब 1 से 2 धंटे सोने के बाद दब मैं जागी तो देखा की रॉकी अपने लौड़े पर तेल लगा कर सहला रहा था फिर मेरे देखते ही देखते रॉकी का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था फिर रॉकी हाथ में तेल की बोतल ले कर बिस्तर पर आ गया और मेरी दोनो टाँगो को ऊपर उठा के  मेरे गाण्ड़ के छेद पर तेल ड़ालने लगा मैं उठ के बिस्तर से भागने लगी तो रॉकी ने मुझे पकड़ कर फिर से बिस्तर पर धक्का दे दिया और वहाँ पड़ी अपनी पैंट मे से बैल्ट निकाल कर मुझे बिस्तर पर पेट के बल लिटा कर और मेरे को आघा बिस्तर से नीचे कर दिया और फिर लगा मेरे चूतड़ो को बैल्ट से पीटने मैं चीखती चिल्लाती और रोती रही पर रॉकी बिना कोई रहम के मेरे चूतड़ो को पीटता रहा और पीट पीट के एकदम लाल कर दिये और चूतड़ो की पीटाई के कारण सूज भी गये थे मैं अब कोई भी विरोध करने कबिल नही थी तब रॉकी ने मुझको सीधा किया और मुझ को कमर तक बिस्तर पर ही रहने दिया और रॉकी ने मेरे दोनो हाथ पीछे कर के मरी कमर के साथ अपनी बैल्ट से बन्ध दिये और मेरी टाँगो को चौड़ा कर के घुटनो के पास से पकड़ कर ऊपर मेरे कधोँ तक कर दिया जिस के कारण मेरी गाण्ड़ का छेद ऊपर उठ कर पूरी तरह खुल कर रॉकी के लौड़े के सामने आ गया और रॉकी ने बिना देर और बिना रहम किये अपना मोटा और लम्बा लौड़ा बड़ी बेदर्दी से मेरी चुदी हुई गाण्ड़ मे धुसा दिया और मैं जोर से चीख पड़ी और जोर जोर से धक्के लगाने लगा रॉकी के धक्के मेरी गाण्ड़ मे इतने जोरदार थे की हर धक्के के साथ मेरा मुम्मे ऊपर नीचे होने 
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#24
20-08-2016, 01:49 PM
मैं देवर की सेवा मे ( FIENAL PART 5th )
लगे और मैं आगे सरकती तो रॉकी मुझे फिर पीछे खीचं लेता और मुझको ये लगने लगा की रॉकी आज मेरी गाण्ड़ फड़ के ही छोड़ेगा कोई 30 मिनट के बाद रॉकी ने मेरे मुम्मो को जोर सो पकड़ा और एक जोरदार धक्का मेरी गाण्ड़ मे मारा मेरी आंखे फटी की फटी रह गई और मुहँ खुला का खुला और फिर रॉकी के गर्म गर्म वीर्य मेरी गाण्ड़ मे गिरने लगा और फिर रॉकी ने मेरे ऊपर गिर कर मेरे होठों का एक जोरदार चुम्बन लिया और अपना लौड़ा मेरी गाण्ड़ मे से बाहर निकाला पक की आवाज के साथ और मेरे हाथों को खोल दिया और अपने लौड़े पर लगे खून को मुझे दिखाने लगा जैसे कह रहा हो की देख तेरी गाण्ड़ फड़ ड़ाली मेनें तभी मेनें रॉकी को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और बोला मादरचोद मुफ्त मे मिली तो चोद चोद के फाड़ ड़ाली मेरी गाली से और ऊपर से जोरदार थप्पड़ से रॉकी को गुस्सा आ गया और मेरे बालो को पकड़ कर बोला माँ की लौड़ी चुदक्कड़ रण्ड़ी साली चुदना भी है और फाड़वाने से ड़ारना भी है और फिर रॉकी ने मेरे गालो पर 4,5 जोरदार थप्पड़ मारे और मुझको बुरी तरह से पीटने लगा पीटाई वजह से मैं जमीन पर गिर गई और वहीं पड़ी रही तभी रॉकी मेरे पास आया और मुझको अपने पैर से सीधा किया और बोला उठीयो मत और न ही हिलयो समझी भौसड़ी की और रॉकी ने पर पेशाब करना शुरू कर दिया कभी मुहँ पर कभी मुम्मो पर कभी चूत पर मूतने के बाद रॉकी बोला बहन की लौड़ी गाश्ती साली आज से तू मेरी गुलाम है और मै तुझको जब चाहुँगा तब तुझको मेरे से चुदना होगा चाहे सब के सामने हो या फिर अकेले मे मैं बोली ठीक है रॉकी तो रॉकी ने पैर से ठोकर मर कर बोला रॉकी नही अपना मलिक बोल मैं बोली टीक है मलिक आप जहाँ और जब बोलोगे मैं आप से चुदने के लिये तैयार रहुँगी

इसके बाद दोस्तो मैं रॉकी की गुलाम बन कर चुदती रही और चुदाई के मजे लेती रही और अपनी चुदने की इच्छा को जितना हो सका शांत करती रही और रॉकी ये समझता रहा की वो मुझको चोदता है पर हकीकत मैं खुद रॉकी से चुदती थी (वरना क्या मजाल किसी की जो मेरी मर्जी के बिना मुझे छु भी जाये)

इसके बाद दोस्तो मैं आप को बताऊंगी की कैसे मैं रॉकी के दोस्तो से भी जम कर चुदी और जो मेरे पहले तलाक का कारण भी था

तो मुझे अपने विचार मेल करें, मेरी कहानी पड़न के बाद मुझे सेक्स या सेक्स चैट के लिए सम्पर्क करने के लिये ये कहानी लिख रही हूँ या किसी नए साथी खोजने के लिए।तुम मुझे अपने विचार, विचारों और भावनाओं को आप इसे पढ़ने के बाद मेल कर सकते है और आशा है कि यह तुम सब पुरुषों के साथ ही महिलाओं के लिए हर किसी को मुझे मेरी concubine86ATyahooDOTcom. पर मेल कर सकते हैं 

तब तक के लिये नमस्कार

आपकी प्यारी चुदक्कड़

जूली             
 
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#25
16-12-2016, 01:10 AM
गुण्डो ने मेरी गैंगबैंग चुदाई की
हैलो दोस्तो
जैसे कि अपनी पिछली कहानियों में बता चुकी हूँ कि मेरा नाम जूली है और मेरा दो बार तलाक हो चुका है और इसलिये मैंने अपने बॉस और उस के साथ दोस्त के साथ सेट हूँ (जिस का बाँस को पता नही है)और दोनो से अल़ग अलग चुद चुद कर काफी ज़मीन-जायदाद और रुपये कमाये है। मैं बहुत ही चुदक्कड़ किस्म की औरत हूँ।और मुझको अपनी नंगी फोटो भी खीचवाने का शौक है तथा अपने शारीर पर गन्दी गन्दी बाते लिखवाने का भी शौक है जो की मर्द की चुदाई की ईच्छा को बड़ाये मेरे कई ग्राहको ने मेरी बहुत फोटो खीची है और एम एम एस भी बनाये है मेरी चुदाई की प्यास इतनी ज्यादा है कि दिन में कम से कम आठ-दस बार तो मुठ मार कर झड़ती ही हूँ या फिर चुद कर मेरी उम्र पैतीस की है। मेरी लम्बाई वास्तव में हालांकि पाँच फुट दो इंच है पर दिखने मैं पाँच फुट सात इंच के करीब लगती हूँ क्योंकि मुझे हर वक्त ऊँची ऐड़ी की चप्पल सैंडल पहनने का शौक है। मेरा गोरा बदन, बड़े-बड़े गोल मटोल चूतड़ (40) और उसके ऊपर कमर (32) और फ़िर ढीले और लटके हुए गोल गोल मम्मे (36 डी) किसी का भी लंड खड़ा करने के लिये काफी हैं। मगर फ़िर भी जब मैं अपने हुस्न के नखरे और अपनी कातिलाना अदायें बिखेरती हूँ तो बुढ्ढों के भी लंड खड़े होते मैंने देखे हैं। मैंने कईयों से चुदाई भी करवाई है जिसमें से कुछ किस्से पिछली कहानियों में बता चुकी हूँ तो दोस्तो आज मैं बाँस और उसके दोस्त से चुदने के अलावा अपना खुद का गश्तीबाजी का धन्धा करती हुँ उन दोनो से चोरी छुपे
 जब भी मैं कहीं बाहर जाती हूँ तो सभी मर्द मुझे कामुक नज़रों से देखते हैं। मुझे भी ये बहुत पसंद है कि सभी मर्द मुझे देखें। मेरी दूसरी शादी को 1 साल हो गया हैं और मेरे पति दुबई में रह कर नौकरी करते हैं। साल में एक-दो बार घर आना हो पाता है वो भी हफ्ते या दो हफ्ते के लिये। जब भी मेरे शौहर आते थे तो हम दोनों जम कर चुदाई करते थे लेकिन उनके जाने के बाद मैं चुदाई की भूख मेरा बाँस और उसके दोस्त से चुद कर या फिर सड़क छाप गश्ती बन कर चुदती और रूपेये भी कमाती थी। पर अलग अलग मर्दो से चुदने के कारण मेरी चुदाई की भूख और ज्यादा बढ़ाने लगी इसलिये मैंने सोचा कि इस तरह तड़पने से तो अच्छा है कि क्यों ना और ज्यादा मर्दो से चुदवाने शुरू कर दूँ। पहले तो मैंने बहुत सोचा कि ये गलत है पर क्या करती… चूत मान ही नहीं रही थी मेरी। चूत को तो लन्ड चाहिये थे बस। दिन - रात मैं हर वक्त बस चुदाई के बारे में सोचने लगी। किसी और चीज़ में मन ही नहीं लगता। चाहे कोई भी हो मैं हर मर्द को गंदी नज़रों से ही देखती। मेरी नज़र हमेशा मर्दों की टाँगों के बीच में ही जम जाती थी। हद ये हो गयी थी कि कोई जानवर भी दिख जाता तो नज़रें उसके लन्ड को ही ढूँढतीं। इसलिये मैंने सोच लिया था कि अब तो ज्यादा ज्यादा लन्डो से जरूर चुदना है। मुश्किल ये थी कि किस से और कैसे चुदवाया जाये तो इस बारे में मैंने अपनी सहेली शबाना (जिसने मेरी सील तुड़वाई थी) से बात करने की सोची। वो हाई लेवल की गश्ती है इसलिये वो अक्सर गैर-मर्दों से चुदवाया करती है। और उसकी उम्र 38 साल है और दिखने में वो भी काफी सैक्सी है पर मेरे से कम सैक्सी और हॉट है वो। हम दोनों कॉलेज में साथ थीं और नये-नये यारों और नये-नये लोगो से रूपये लेकर खुब चुदवाती थीं और खूब मौज-मस्ती करती थीं।
एक दिन मैं उसके घर गयी। हम दोनों बैठी पैग लगा रही थीं तो दो पैग पीने के बाद मैंने उससे इस बारे में ज़िक्र किया। उसने कहा कि चुदाई के लिये वो मुझे अपने एक यार से मिलवा देगी। उसने मुझे बताया कि उसके सभी यार गुँडे मवाली किस्म के हैं। मैंने उससे पूछा कि तूने ऐसे यार क्यों बनाये तो उसने कहा कि ऐसे मर्दों से चुदवाना उसे अच्छा लगता है और उनमें जोश भी ज्यादा होता है और वो जम कर चोदते हैं जिससे उसकी पूरी तरह तसल्ली हो जाती है। मुझमें तो चुदाई की भूख थी तो मैंने कहा जैसा मरज़ी मर्द हो... मुझे तो लन्ड चाहिये बस और वो भी उसी वक्त। तभी उसने अपने एक यार को फोन लगाया और उससे मेरी बात की और कहा कि अभी नयी गश्ती चोदनी है क्या? उसके यार का नाम विकी था। विकी ने कहा कि वो तैयार है और अभी आ जायेगा मुझे लेने के लिये। मैं बहुत नर्वस थी क्योंकि मैं पहली बार किसी गुँडे मवाली से चुदवाने जा रही थी शादी के बाद। और करती भी क्या... इतनी चुदासी थी कि मुझे तो लन्ड चाहिये थे बस। मैंने खुद को रिलैक्स करने के लिये एक और तगड़ा पैग लगाया। तकरीबन ५० मिनट बाद विशाल मुझे लेने के लिये आ गया। उसकी उम्र तकरीबन २३-२४ साल की होगी और उसका जिस्म भी बहुत हट्टा-कट्टा और गठीला था। उसकी हाइट ६ फीट होगी। उसने आते ही शबाना को किस किया और उसके बोब्बे उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लग पड़ा। उसके बाद उसने मुझे अपने साथ चलने को कहा तो मैंने शबाना को बॉय कहा और उसकी गाड़ी में जा कर बैठ गयी। मुझे लन्ड लेने की इतनी जल्दी थी कि उससे पूछा भी नहीं कि कहाँ जा रहे हैं। हम पहले नॉर्मल बातें करते रहे। मैं शबाना के घर पर शराब के तीन पैग पी कर निकली थी और मुझ पर नशा सवार होने लगा था और मेरा मूड बहुत ज्यादा सैक्सी हो गया था। मैंने बिल्कुल बेशरम होकर उसकी जाँघ पर हाथ रख दिया और उसकी जीन्स के ऊपर से ही मैं उसके लन्ड को सहलाने लगी। ये सब देख कर उसका लन्ड भी कड़ा हो गया। विकी ने अपनी कार सड़क से थौड़ा हटकर एक पुराने खँड़र पर रोक ली। तभी हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग पड़े। हमारी दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में थी और मुझे वो बहुत उत्तेजित लग रहा था। और उसने मुझे अपने कपड़े उतारने को कहा। मैंने उससे कहा कि यहाँ सड़क में कोई देख लेगा तो उसने कहा कि ये सड़क एक सुनसान सड़क है और पास मे ही एक सुनसान खँड़र है और जहाँ शाम के वक्त यहाँ कोई नहीं आता जाता है। मैंने दोनों तरफ़ देखा तो कोई भी नहीं था दूर-दूर तक। वैसे भी नशे की खुमारी और उत्तेजना में मुझे चुदाई करने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था। मैंने फौरन अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मैं अपने कपड़े धीरे-धीरे उतार रही थी तो इस बात पर विकी को गुस्सा आ गया और उसने एक दम से मेरे गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और सूट की कमीज़ खींच कर कर उतार दी और कहने लगा साली इतनी देर क्यों लगा रही है जल्दी कर! मेरे सूट की कमीज़ अब उतार चुकी थी और मैंने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। उसके बाद विकी के तेवर देखते हुए मैंने अपने सैंडल खोले बगैर ही जल्दी से अपनी सलवार और पैंटी भी उतार दी। विकी भी नीचे से पूरा नंगा था। उसका नौ इंच का लन्ड देख कर मैं हैरान हो गयी क्योंकि इतना बड़ा लण्ड़ और मोटा भी खूब की देख कर चूत गीली हो गई। तभी विकी ने मुझे कहा, “साली रंडी अब इसे देखती ही रहेगी क्या? चल साली रंडी इसे अपने मुँह में डाल और अच्छी तरह से चूस इसको!” अब विकी मेरे से एक दम टपोरी वाली ज़ुबान में बात कर रहा था। मैंने तभी उसका लन्ड चूसना चालू कर दिया। मुझे लन्ड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं तकरीबन दस मिनट तक उसका लन्ड चूसती रही। तब तक मेरी चूत गीली हो चूकी थी। अब मैं उसका लन्ड चूत में लेना चाहती थी पर कार में जगह कम होने की वजह उसने मुझे कहा कि वो मुझको बाहर चोदेगा। हम दोनों कार के बाहर आ गये। उसने मेरी चूत में अपना लन्ड डाल दिया और मुझे चोदने लग पड़ा। वो पहले धीरे-धीरे से और फ़िर वो और तेज हो गया। जैसे-जैसे उसका लन्ड मेरे अंदर जा रहा था मुझे और मज़ा आ रहा था। सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने मैं पूरी नंगी हो कर खँड़र की दिवार के सहारे घोड़ी बनकर  चुद रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं कभी ऐसे भी चुदवाऊँगी। तकरीबन 40 मिनट तक चोदने के बाद उसका माल निकल गया और उसने अपना सारा माल मेरे जिस्म पर गिरा दिया। मुझे चुदाने में बहुत मज़ा आया था पर मेरी अभी तक पूरी तरह से तसल्ली नहीं हुई थी। उसने मुझे अपने कपड़े पहनने को कहा तो मैंने उससे कहा- “अभी मुझे और चुदवाना है।” विकी बोला, “साली रंडी! लगता है तू पकी लन्ड खोर औरत है और तुने लन्ड़ नही लिया बहुत समय से...?” तो मैंने कहा कि “हाँ! मैंने बहुत वक्त से लन्ड नहीं लिया है।”विकी ने कहा कि अगर मुझे और चुदना है तो अपने दोस्तों से चुदवा देगा क्योंकि अब वो और नहीं चोद सकता क्योंकि वो पहले ही सुबह से 10 औरतों को चोद चुका है और इसलिये थक गया है। मैं नशे में थी। मैंने कहा, “मुझे लन्ड चाहिये बस!” विकी ने कहा, “लेकिन एक शर्त है!” मैंने कहा कि मुझे उसकी सब शर्तें मंज़ूर हैं बस मेरी चूत की प्यास किसी तरह शाँत करवा दे। वो बोला, “सोच ले... मेरी और मेरे दोस्तों की हर बात माननी पड़ेगी... हम जैसे चाहें तुझे चोदेंगे और तू मना नहीं करेगी!” कहाँ तो मैं एक मर्द से चुदने के लिये इतनी तड़प रही थी और अब मुझे दो-तीन लण्ड मिलने वाले थे। मैंने बिना सोचे खुशी-खुशी हाँ कर दी। वो बोला, “चल साली रंडी... कार में बैठ जा जल्दी... तुझे और लन्ड दिलवाता हूँ!” वो मुझे अपनी कार में अपने घर ले कर जाने लगा। तकरीबन एक घंटे के बाद हम शहर से बहार उसके छोटे से फार्म हाऊस में पहुँच गये। उसका फार्म हाऊस एक गाँव के पास था जहाँ बहुत कम घर थे और फार्म हाऊस के पास काफी खेत थे वहाँ पहुँचते हुए रात के आठ बज चुके थे और पूरी तरह से अंधेरा हो गया था। उसने मुझे बताया कि जहाँ पर उसका फार्म हाऊस है वहाँ उस तरफ़ के इलाके में कोई औरत नहीं रहती, बस उनका अड्डा है जहाँ वो मस्ती करते हैं। उसने अपनी गाड़ी एक किनारे पर खड़ी कर दी और मुझे अपनी कार में ही नंगी होने को कहा। मैंने उसे मना कर दिया तो उसे गुस्सा आ गया और उसने मुझे एक थप्पद मार दिया और मेरे जब्रदस्ती मेरे सूट की कमीज़ पूरी तरह से उतार दी और निकाल कर बाहर फेंक दी। मैंने सोचा कि कार में ही तो नंगी होने को कह रहा है इसलिये उसकी बात मान कर मैंने सलवार उतार दी और तुरंत पूरी नंगी हो गयी। तभी उसने मुझे नंगी ही कार से नीचे उतरने को कहा ओर बोला घोड़ी बन मैं अब तेरी गाण्ड़ चोदुगा , “दूर सामने जो घर है वो मेरा ही घर है और तुझे वहाँ तक ऐसे ही चुदते चुदते जाना है।” वहाँ से उसका घर तकरीबन एक किलोमीटर होगा। वहाँ ना के बराबर आबादी थी इसलिये खेतों के पार इतनी दूर से भी वो घर दिखायी दे रहा था। मैंने विकी से कहा, “प्लीज़ ऐसा मत करो कोई देख लेगा... मैंने ड्रिंक भी कर रखी है.... वहाँ तक चल कर जाना मुश्किल होगा!” चुद चुद के जाना तो और भी मुश्किल वो बोला, “चूतिया साली रंडी! ज्यादा नाटक मत कर... कोई नहीं देखेगा तुझे और अगर देख भी लिया तो क्या होगा साली... जितनी जल्दी करेगी उतना ही अच्छा होगा वरना रास्ते में जो मिलेगा तुझे चोद देगा।” मेरे पास कोई चारा नहीं था तो मैं धीरे से कार से नीचे उतरी। और वो भी नीचे उतरा उसने तुरंत अपनी पैंट की जीप खोली और अपना लौड़ा चूसने को बोला मेनें लौड़ा चूस के खड़ा किया और विकी ने मुझको अपनी गाड़ी के सहारे घोड़ी बनाया और मेरी गाँड़ मे एक ही धक्के मे अपना लौड़ा घुसा दिया और मैं जोर से चीख उठी और विकी वहीँ सड़क के किनारे लगभग ½ घँटे तक मेरी गाण्ड़ चोदता रहा और मैं चीखते हुऐ चुदती रही और फिर अपना सारा वीर्य मेरी गाण्ड़ मे छोड़ दिया अब मैं सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने वहाँ पूरी नंगी खड़ी थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था कि कोई मुझे इस हालत में देख लेगा तो क्या होगा। मेरा सारा सामान विकी की कार में पड़ा हुआ था। की तभी विकी ने गाड़ी मे से रस्सी निकाली और मेरे हाथों को बाँघ कर उस रस्सी को अपनी गाड़ी से बाँघ दिया और बोला चल रण्ड़  गाड़ी के पीछे पीछे आ जा औऱ अब मैंने उसके घर की तरफ़ जाना शुरु कर दिया। उस सड़क पर एक दम अंधेरा था और जैसे जैसे गाड़ी और मैं आगे जा रहे थे तो रोश्‍नी आनी चालू हो गयी थी। तकरीबन दस मिनट तक मैं ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल पहने नंगी उस कच्चे रास्ते पर चलती रही और अभी आधा रास्ता भी तय नहीं हुआ था। नशे में थोड़ा सिर घूम रहा था और मैं बहुत ज्यादा डर रही थी। तभी एक दम से पीछे कोई गाड़ी आने की आवाज़ आयी और मैंने घबराहट में भागना चालू कर दिया तकी गाड़ी मे बैठ जाऊ। पर ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल और नशे की हालत में भागना आसान नहीं था पर फिर भी जितना मुझसे हो सका, जैसे-तैसे मैं भागी। पर विकी भी मुझको भागता देख कर गाड़ी तेज कर देता था अभी मैं थोड़ा दूर तक ही भागी थी कि पीछे से एक सफारी कार आयी और उन्होंने मुझे देख लिया और कार एक दम मेरे पास ला कर रोक दी। उसमें दस गुण्ड़े मवाली टाईप के मर्द मौजूद थे। तभी एक बोला, “लगता है ये ही विकी का नया माल है तभी तो ऐसे सड़क पर नंगी घूम रही है!” तभी विकी ने उनसे बोला इसको चोदोगे उन्होंने विकी से मेरा रेट पुछा तो विकी  बोला 1500/- एक आदमी वो गुण्ड़े बोले ठीक है फिर उन्होंने मुझे कहा कि “चल आजा अंदर आ जा! तुझे विकी के घर ले जाते हैं... हम भी वहीं जा रहे हैं।” और उसने ही हमें बुलाया है... चल साली रंडी कुत्तिया... आ जा अंदर... ज्यादा नखरे मत कर!”

मैंने उनकी बात मान ली पर उनकी गाड़ी पूरी तरह से भरी हुई थी और बैठने के लिये कोई जगह नहीं थी। तभी उन्होंने मुझे अंदर खींच लिया और पीछे जो चार मर्द बैठे थे उन्होंने अपने पास बिठा लिया। मैं अब एक कार में दस मर्दों के बीच में नंगी पड़ी हुई थी। वो कह रहे थे “क्या माल फ़सा कर लाया है विकी! यार ये तो बड़ी मस्त है!” कोई मेरे बोब्बे दबा रहा था तो कोई चूत में उँगली देने लगा तो कोई गाँड में। सभी ने शराब पी रखी थी और उनमें से कुछ के हाथ में शराब की खुली बोतलें भी थीं। उनमें से एक मर्द ने मेरे मुँह में भी वो देसी शराब उड़ेल दी। मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था और मैं बहुत ज्यादा ठरकी हो रही थी। मेरी आँखों में तो वासना के लाल ड़ोरे आ गये थे। वासना में अंधी हो कर विकी और उसके दोस्तों से चुदने के लिये मैंने ही तो ज़िद्द करी थी। तभी उन्होंने गाड़ी विकी के फार्म हाऊस के आगे रोक दी और मुझे नीचे उतार दिया। सभी दस मर्द भी नीचे उतर गये। तभी उनमें से एक बोला, “यार इस कुत्ती को अपनी गुलाम बना लेते हैं!” तभी उनमें से एक मर्द ने मेरी गर्दन में कुत्ते वाला पट्टा बाँध दिया और मुझे एक कुत्ती कि तरह अपने दोनों हाथ और पैरों के बल चलने का हुक्म दिया।मैंने वैसा ही किया जैसा उन्होंने कहा था। फ़िर वो मुझे कुत्ती कि तरह विशाल के घर के अंदर ले गये। वहाँ जो मैंने देखा वो देख कर मैं हैरान रह गयी। वहाँ पर आठ मर्द पहले से ही मौजूद थे। मैं इतने मर्द देख कर मैं और भी ठरकी हो गयी और विकी से मिन्नत करने लगी कि “प्लीज़ मुझे एक बार मे एक ही लौड़े से चुदवाये मैं इतने लौड़ो से एक साथ नहीं चुदवा पाऊँगी।” इस बात पर सभी हंसने लगे और विकी बोला कि “सभी लड़कियाँ पहले ऐसे ही कहती हैं! तेरी सहेली शबाना भी पहले ऐसे ही बोली थी पर अब देख वो किस तरह मस्त हो कर दर्जनों मर्दों से एक साथ चुदवाती है!” मुझे शबाना पर बहुत गुस्सा और प्यार आया कि उसने मुझे कहाँ पक्के चोद्दुओ के बीच फंसा दिया। 
तभी विकी ने इन्नोवा कार वाले मर्दों से पूछा के क्या मैं रास्ते मे चुद चुद कर आयी हूँ या उनकी कार में तो उन्होंने कहा कि “नही।” इस बात पर विकी को बहुत गुस्सा आया और उसने मुझे कहा, “साली भेनचोद रंडी! मैंने कहा था ना कि पूरा रास्ते मे चुद चुद कर आना है तो तू इनकी कार में बिना चुदे क्यों आयी? अब तुझे इसकी सज़ा मिलेगी।” मैंने कहा, “इन सभी ने कहा था कि ये तुम्हारे दोस्त हैं तो इसलिये तुम मुझे कुछ नहीं कहोगे अगर मैं इनके साथ बिना चुदे आ भी जाती हूँ!” विकी ने कहा, “भेनचोद! कोई भी मेरा नाम लेगा तो उसके साथ बिना चुदे चली जायेगी क्या ऐसे ही? सज़ा तो मिलेगी तुझे और अगर अब तू कुछ बोली तो सज़ा और बढ़ती जायेगी और वैसे भी यहाँ आस पास कोई नहीं रहता… जितना मरज़ी चींख लेना... यहाँ पर कोई नहीं सुनेगा तेरी... इसलिये भलायी इसमें ही है कि चुप चाप जो मैं कहता हूँ वो ही करती रह।” विकी ने मुझे कहा कि “तेरी सज़ा तुझे कल देंगे... अभी फ़िलहाल वक्त के लिये माफ़ कर रहा हूँ पर कल को सज़ा जरूर मिलेगी!” मैं खुश हो गयी कि अब तो सज़ा से बच गयी। तभी सभी अठारह मर्द नंगे हो गये। सभी के लौड़े 8 इंच से ज्यादा लम्बे और 3 इंच तक मोटे थे। मैं सोच रही थी कि आज इतने लन्ड मैं कैसे ले पाऊँगी। उन्होंने मुझे देसी ठर्रे की बोतल पकड़ायी और पीने को कहा। पहले कभी देसी शराब नहीं पी थी। बहुत ही तीखा अजीब सा स्वाद था पर मैंने गटागट वो आधी बोतल पी डाली। इतने में ही ज़ोरदार नशा चढ़ गया और मैं झूमने लगी। तभी सभी मर्दों ने मुझे बीच में ज़मीन पर बिठा लिया और मेरे चरों तरफ़ एक घेरा बना लिया। अब मैं सभी के लन्ड चूसने लग पड़ी। मैं कभी किसी का लन्ड चूस रही थी तो कभी किसी और का। मुझे लौड़े चूसने मे बड़ा आन्नद आ रहा था और सब का टेस्ट भी अलग अलग था इसी बीच में किसी ने मेरी चूत में लन्ड भी डाल दिया। एक और जने ने मेरी गाँड मारनी चालू कर दी। जब गाँड में लन्ड घुसा तो बहुत तेज दर्द होने लगा। मेरी दर्द के मारे जान निकली जा रही थी। मेरे मुँह से कोई आवाज़ भी नहीं निकल रही थी क्योंकि मुँह में भी लन्ड डला हुआ था। अब मेरी हर तरफ़ से चुदाई हो रही थी। मेरे तीनों छेदों, चूत, गाँड और मुँह में लन्ड थे। उसके अलावा मैंने अपने दोनों हाथों में भी लन्ड पकड़ रखे थे और कईं जने मेरे बोब्बे दबा रहे थे। दो जने झुक कर मेरी दोनों बगलों में अपना लन्ड रगड़ रहे थे और दो जने मेरे दोनों पैर पकड कर मेरे सैंडलों पर अपने लन्ड रगड़ रहे थे। हद तो तब हो गयी जब उन्होंने मेरी चूत में एक ही वक्त पर दो लण्ड घुसाने शुरू कर दिये। मैंने कहा, “प्लीज़ ऊपर वाले के वास्ते ऐसा मत करो मेरी चूत फट जायेगी... मैं दो लन्ड नहीं ले पाऊँगी!” पर सभी मर्द दारू और चुदाई के नशे में चूर थे। वो मेरी बात कहाँ सुन रहे थे... बस चुदाई में मसरूफ थे। 
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meltdown Offline
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#26
16-12-2016, 01:13 AM
गुण्डो ने मेरी गैंगबैंग चुदाई की पार्ट- 2
अब आगे
बस चुदाई में मसरूफ थे। तभी एक तेज झटके ने मेरी बहुत जोर से चींख निकाल दी। मेरी चूत में दो लन्ड एक साथ जा चुके थे। मेरी चूत में बहुत तेज़ दर्द होने लगा था और मेरी आंखों में आँसू आ गये थे। पर अभी तो मेरी चुदाई स्टार्ट हुई थी। अभी तो सिर्फ़ छः-सात जनों ने ही मुझे चोदा था। ऊपर से पूरी रात अभी पड़ी थी। सभी मुझे चोद रहे थे बारी-बारी से। सभी अपना वीर्य मेरे जिस्म पर ही गिरा देते या मेरे मुँह में। मेरा पूरा चेहरा और जिस्म उन मर्दों के पसीने और वीर्य से भर गया था। और जिसको भी मूत आता वो भी मुझ पर मूत देता था इस तरह मैं पसीने,वीर्य और मूत का मजा भी एकसाथ ले रही थी चुदाई करते हुए सुबह के तीन बज चुके थे पर उन मर्दों की चुदाई की भूख कम नहीं हो रही थी। हर किसी ने कम से कम दो बार वीर्य निकाल दिया होगा मेरे ऊपर और अब भी चोद रहे थे मुझे। इस वहशियाना चुदाई में मज़ा तो मुझे भी खूब आ रहा था। ऐसा सुबह तक चलता रहा और वो सुबह के सात बजे तक मुझे चोदते रहे। मेरे पूरे जिस्म पर वीर्य था पसीना और उन मर्दों के मूत के तलाब का स्नान था। अब तो दिन भी चढ़ने लगा था। सभी मर्दों ने अब चुदाई बंद कर दी थी और मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थे। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था ठीक तरह से। तभी विकी ने मुझे कहा कि “तुम्हें रात कि सज़ा मिलनी अभी बाकी है।” मैंने विकी से कहा, “अब कोई सज़ा मत देना प्लीज़... मैंने तुम लोगों का हर तरह से चुदाई में साथ दिया और मुझे मज़ा भी आया लेकिन मेरी हालत अब बहुत खराब है इतनी चुदाई करवा कर।”इस बात पर विकी और गुस्सा हो गया और कहने लगा, “साली रंडी! तुझे कहा था ना कुछ बोलना मत और अब तुझे डबल सज़ा मिलेगी!” मैं चुप कर गयी और कुछ देर बाद कहा, “ठीक है मुझे तुम्हारी हर सज़ा मंज़ूर है पर बताओ तो सही करना क्या है?” इस पर विकी ने अपने एक दोस्त को कार में से मेरे कपड़े लाने को कहा। वो जल्दी से मेरे कपड़े ले कर आ गया। मेरे सूट की कमीज़ मे विकी ने पहले ही दो छेद कर दिये थे मुम्मो वाली जगह पर। इस बार विकी ने मेरे पूरी सालवार को फाड़ दिया और सिर्फ़ मेरी पैंटी बची थी। उसने मुझे मेरी पैंटी दी और कहा ये लो इसे पहन लो और घर चली जाओ। मैंने विशाल से कहा, “मैं ऐसे घर नहीं जा सकती इस हालत में! और मेरी चुदाई के रूपेये” इस पर उसने कहा, “ठीक है अगर तुम्हे कपड़े और रूपेये चाहिये तो वो तुम्हें यहाँ से दो किलोमीटर दूर एक घर है... वहाँ मिलेंगे और तुम्हे वहाँ तक नंगी ही जाना पड़ेगा और वो भी चल कर।” ये मेरी पहली सज़ा थी। मैंने मना नहीं किया और मान गयी। रात भर अठारह मर्दों से चुदने के बाद मैं पक्की बेशरम बन चुकी थी। मैं तुरंत घर के बाहर आ गयी विशाल के साथ और उसने मुझे उस घर का रास्ता भी समझा दिया जहाँ जा कर मुझे अपने कपड़े लाने थे। अब दिन का वक्त था और सुबह के साढ़े सात बज चुके थे। उस छोटे गुण्ड़ो और मवालीयों के गाँव में ले दे कर एक बस्ती थी जो की चोरो,गुण्ड़ों और मवालीयों की थी इसलिये उस गाँव में ज्यादातर सिर्फ गश्तीयाँ ही रहती थी या फिर उनके दलाद जो उस गाँव में लोगो को आयय्शी करवाते थे। अब मैं बेशरम बन कर गाँव में मादरजात नंगी ही ऊँची हील की सैंडल खटखटाती चल पड़ी। वैसे तो वो रास्ता सुनसान ही था पर बीच में इक्का-दुक्का लोग आ जा भी रहे थे और सभी मेरी तरफ़ देख रहे थे। शायद विकी के चुंगल में फंसी मेरी जैसी हालत में और औरतें भी देखी होंगी उन्होंने पहले। इस कहानी की लेखिका जूली है!पूरी रात की घमासान चुदाई की वजह से मैं ठीक तरह चल नहीं पा रही थी। दारू का नशा भी उतरा नहीं था और पैरों में ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल भी थे। सैंडल उतार देती पर गाँव के कच्चे पत्थरीले रास्ते पर नंगे पैर चलने से तो ऊँची हील के सैंडल पहन कर दो किलोमीटर चलना ज्यादा मुनासिब था। सबसे पहले दो मर्दों ने मुझे नंगी देखा। उन्होंने मेरे को वहीं पर पकड़ लिया और उन्होंने मेरा रेट पुछा तो मैं बोली 1500/- एक आदमी उन्होंने मुझे वहीं पर चोदना चालू कर दिया। मैंने भी कोई ऐतराज़ नहीं किया और खुशी से अमादा हो कर चुदाई में शामिल हो गयी। अभी वो मुझे चोद ही रहे थे कि वहाँ पर और तीन आदमी आ गये। उन्होंने भी मेरा रेट पुछा तो मैं बोली 1500/- एक आदमी तो उन्होंने भी मुझे चोदने का मन बना लिया। इस तरह वहाँ पर अब पाँच मर्द मुझे चोदने लगे। मेरी चूत और गाँड तो अब तक बहुत खुल चूकी थी क्योंकि रात में मैंने एक साथ दो-दो लन्ड लिये थे अपनी चूत और गाँड़ में। अब उन्होंने मुझे वहीं कच्ची सड़क के किनारे ले जकर चोदना स्टार्ट कर दिया। सभी चुदाई के भूखे थे और मेरे ऊपर कुत्तों की तरह टूट पड़े। अब मुझे पाँच मर्द चोद रहे थे। एक लन्ड मेरी चूत में, दूसरा मेरी गाँड में और तीसरा मेरे मुँह में, चौथा और पाँचवा मेरे हाथों में। उन सभी ने बारी-बारी से अपनी जगह बदली और तकरीबन डेढ़-दो घंटे तक मुझे वहीं चोदते रहे। जब चुदाई खत्म हुई तो वो मैं ने पैसे माँगे तो उन लोगो ने मुझको 7500/- रूपेये दिये और बोला तु बहुत सस्ती गश्ती है। मैंने हैरान हो कर पूछा कि कैसे, तो वो वो बोले कि तेरी जैसी गश्ती तो 3000/- से कम मे नही चुदती। तब मेरे को एहसास हुआ की मैं कितना सस्ते मे चुद गई हूँ और मैं उठ कर आगे चल पड़ी। अब मैं बहुत धीरे चल रही थी क्योंकि मेरी बहुत ज्यादा चुदाई हो चूकी थी और मैं बहुत थक चुकी थी और मुझे मालूम था कि अभी और चुदाई होगी। मैं तकरीबन साढ़े दस बजे उस घर में पहुँची तो देखा कि वहाँ पर ताला लगा हुआ था और बाहर एक पर्ची थी जिस पर लिखा था कि हम ने तुम से झुठ बोला है, तुम्हारे कपड़े वहीं पर हैं जहाँ से तुम आयी हो। इसलिये वापिस चली जाओ। मैं ये पढ़कर वापस जाने लगी। मैं ये सोच रही थी कि अगर फ़िर से रास्ते में कोई मिल गया तो फिर से चुदाई हो जायेगी और इस बार 3000/- एक आदमी का रेट होगा। मैं थक भी गयी थी और मेरी टाँगें भी दुख रही थीं पर मैं फिर भी जितना हो सके तेज़ चलने लगी। इस बार मुझे रास्ते में चार आदमी और मिले और उन्होंने भी मेरी चुदाई का रेट पुछा तो मैं बोली 3000/- एक आदमी का तो उन लोगो ने वहीं सड़क पर मेरी चुदाई शुरू कर दी। तकरीबन डेढ़ घंटे तक मैं उनसे बारी-बारी से चुदवाती रही। मैं हैरान थी कि इन मर्दों ने भी मुझसे मेरी चुदाई का रेट कम बोला और 12000/- दे कर बोले तेरे जैसी गशती 4000/- मे चुदती है उसके बाद मैं वहीं पहुँच गयी जहाँ से आयी थी। मैंने विकी से कहा, “अब तो मेरी सज़ा हो गयी है... प्लीज़ अब कपड़े दे दो!” इस पर उसने कहा, “अभी तो तेरी एक सज़ा पूरी हुई है... अभी दूसरी बाकी है और तेरी दूसरी सज़ा बहुत ही मुश्किल होगी।” उसके बाद उसने कहा कि “तुझे आज भी यहीं रहना पड़ेगा और कल सुबह तू यहाँ से जायेगी!” इस के बाद उसने मेरे से मेरी चुदाई के सारे रूपये भी छीन लिये जो मैं चुद के लई थी और उसके बाद विकी ने मुझे खाना और पानी दिया और कुछ देर के लिये आराम करने को कहा। मैंने तकरीबन दो घंटे आराम किया। अभी मैं सो रही थी कि विकी ने आ कर मुझे उठा दिया और कहने लगा, “अगर अबकि बार कुछ भी बोली तो सज़ा और बढ़ा दी जायेगी इसलिये जो कहता हूँ चुपचाप करती जा।” मैं कुछ भी नहीं बोली और चुप रही। अब दोपहर के तकरीबन एक बज चुके थे और अभी भी मैं नंगी ही थी। विकी ने मुझे कहा, “आज तुझे और बहुत जनों से चुदना है!” अब तो मैं बेशरम बन चुकी थी और मेरी चूत, गाँड और मुँह सभी छेद बहुत बुरी तरह चुद के खुल चुके थे और अच्छी तरह से खुल चुके थे क्योंकि मैंने सभी में बहुत मोटे-मोटे लन्ड लिये थे। विकी ने मुझे कहा कि “तेरी दूसरी सज़ा ये है कि तुझे आज शाम के सात बजे तक गाँव में से 50000/- रुपये कमा कर लाने हैं और वो भी नंगी रह कर ही और अगर सात बजे से लेट हुई या पैसे कमा कर नहीं ला पायी तो तेरी चुदाई पूरे एक हफ़्ते तक होती रहेगी!”मैं ये सुनकर कुछ नहीं बोली क्योंकि अगर कुछ बोलती तो मेरी सज़ा विकी और बढ़ा सकता था। ये सब बातें सुनकर मैं बहुत डर गयी और सोचने लगी कि अगर मैं पैसे ना ला पायी तो पता नहीं क्या होगा आज मेरे साथ। मैं ये सोच ही रही थी और अपने ख्यालों में खोयी हुई थी कि तभी मुझे विकी ने एक जोर से थप्पड़ मारा और कहा “साली रंडी! यहीं खड़ी रहेगी अब क्या? चल हरामज़ादी जल्दी से नहा-धो कर बाहर जाने की तैयारी कर और चुदवा कर पैसे कमा कर ला।”मैं सैंडल उतार कर बाथरूम में जा कर जल्दी-जल्दी नहायी और जिस्म पोंछ कर फिर से पैरों में अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन लिये। मेरे पर्स में लिप्स्टिक पाऊडर वगौरह था तो मैंने हल्का मेक-अप भी कर लिया। तभी मुझे मेज पर देसी ठर्रे की बोतल दिखायी दी जिसे उठा कर मैं मुँह लगा कर पीने लगी। पीते-पीते मैंने सोचा कि मैं पूरी कोशिश करुँगी 50000/- रुपये कमाने की और ना कमा सकी तो जो भी होगा देखा जायेगा। इतने दिनों से मैं चुदने के लिये ही तड़प रही थी और जब ऊपर वाले के करम से मुझे इतनी चुदाई नसीब हो रही है तो क्यों ना खुल कर मज़े लूँ। इतने में विकी फिर कमरे में आया और चिल्लाते हुए कहा कि “साली यहाँ खड़ी दारू पी रही है! चल वक्त बर्बाद न कर और सात बजे के पहले रुपये कमा कर ला!” अब मैं एक बार फिर से बस ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी ही बाहर चल पड़ी। मेरे एक हाथ में ठर्रे की बोतल थी और मैं अब एक पूरी रंडी बन चुकी थी और मैं फैसला कर चुकी थी कि मैं इस गाँव की रंडी ही बन जाऊँगी और लोगों से ऐसे ही चुदवाया करूँगी। खैर अभी तो मुझे ऐसे मर्द ढूँढने थे जो मुझे चोदें और पैसे भी दें पर गाँव में ये काम बहुत मुश्किल नही था क्योंकि वहाँ पर सभी चोदने वाले लोग थे। और सभी के सभी गुण्ड़े और मवाली थे और ये गाँव भी गश्तीयों का था अब मैं शराब पीती हुई नशे में झूमती हुई गाँव कि उस तरफ़ चल पड़ी जहाँ पर गुण्ड़ो और मवालीयों की छोटी सी बस्ती थी और उस तरफ़ मर्द भी ज्यादा रहते थे। वो इलाका एक गंदी बस्ती जैसा था पर मेरे पास और कोई चारा नहीं था। मैं वहाँ पर अंदर घुस गयी और तभी मेरी तरफ़ मर्दों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गयी। मैं ये देखकर हैरान रह गयी कि वहाँ करीब तीन-चार औरतें और भी थीं जो अलग-अलग जगह पर गाँव के कईं मर्दों से ग्रुप-चुदाई करवा रही थीं। उन्हें देखकर साफ ज़ाहिर था कि ये गाँव की रहने वाली औरतें नहीं थीं बल्कि मेरी ही तरह शहर से आयी हुई गश्ती औरतें थीं। मैंने तभी उन मर्दों से कहा कि “आप सब मेरी चुदाई कर लो पर इसके बदले में मुझे पैसे चाहिये।” इस पर वो कहने लगे कि “पहले चुदाई होगी तेरी और बाद में पैसे दे देंगे और तेरा दलाल कोन है तो मैं बोली विकी है तेरा रेट बोल तो मैं बोली 5000/- एक आदमी का तो वो बोले 3500/- एक आदमी का तो मैं बोली ठीक है आ जाऔ” फिर मेरी चुदाई वहीं पर स्टार्ट हो गयी। ऊपर वाला जाने मेरे अंदर घंटों इतनी चुदाई करवाने ताकत कहाँ से आ गयी थी। पिछली शाम से मैं कितने ही मर्दों से बेतहाशा चुदी थी और अब फिर चुदने के लिये तैयार थी। सभी मर्द मेरे को चोदने के लिये आ गये। वहाँ पर भीड़ इतनी बढ़ गयी कि कोई भी मुझे चोद नहीं पा रहा था। तभी उनमें से जो थोड़ा नेता किस्म का था उसने कहा, “बारी-बारी से चोद लेना सभी लोग और एक लाइन लगा लो सभी मर्द!” तकरीबन 20 गुण्ड़े मवाली मर्द होंगे वहाँ पर। उन सभी ने लाइन लगा ली और बारी-बारी से मुझे चोदने लगे। मुझे कुछ नहीं होश था कि मुझे कौन-कौन चोद रहा था। बस मैं तो अब ऐसे ही गंदी गली में ज़मीन पर पड़ी थी जो कोई आ रहा था बस मुझे चोदते जा रहा था और मेरी चुदाई की कीमत मुझको देकर और अपना वीर्य पीला कर जा रहा था और कोई कोई तो मूत भी रहा था। तकरीबन शाम के 5 बजे मैंने उनसे कहा कि “बस अब मुझे जाने दो!” तो उन्होंने कहा “अभी कुछ देर और रुक जा। और थोड़ी देर में चली जाना।” तकरीबन सवा पाँच बजे उन्होंने मेरी चुदाई बंद कर दी और मुझे कहा “चल अब दफ़ा हो जा यहाँ से!”और मैंने अपने रूपेये गिने और विकी के फार्म हाऊस की और चल पड़ी तो कुछ गुण्ड़े बोले “लगता है ये छिनाल विकी ने यहाँ भेजी है! चलो इस कुत्ती से थोड़े बहुत पैसे हम भी कमाये ! हमारा ही फायदा है क्योंकि ये भी अब हमारी नई गश्ती बनेगी।” तो उन गुणड़ो ने  मुझको उठा लिया और मैंने उनसे फ़िर से मिन्नत की और कहा कि मुझे जाने दो वो बोले नही तो मैं बोली “मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ पर मुझे जाने दो।” इस पर उनमें से एक ने कहा कि “तुझे अभी के अभी एक कुत्ते और गधे का लन्ड लेना होगा।” मैं ये सुनकर मैं हैरान रह गयी। मैंने पहले सोचा कि अगर पैसे ना लेकर गयी तो एक हफ़्ते तक कईं मर्दों से चुदाई होगी और पता नहीं विकी क्या-क्या उल्टी सीधी सज़ा दे मुझे। इससे अच्छा तो है कि मैं अभी कुत्ते और गधे से चुदवा लूँ... एक नया तजुर्बा भी हो जायेगा। मैं इतनी ठरकी और बेशरम बन गयी थी कि जानवरों से चुदने का सोच कर गरम हो रही थी। मैंने तुरंत हाँ कर दी। तभी वहाँ पर थोड़ी ही देर में कुछ मर्द एक बड़े से कुत्ते और गधे को ले कर आ गये। कुत्ते के मुँह बन्धा हुआ था ताकि वो किसी को काट ना ले। वहाँ पर बहुत भीड़ जमा हो गयी मुझे देखने के लिये। तकरीबन पूरा गुण्ड़ो और मवालीयों का गाँव मुझे देखने के लिये आ गया। तकरीबन साठ-सत्तर मर्द वहाँ पर आ गये थे। मैंने तभी गधे का लन्ड चूसना स्टार्ट कर दिया और कुत्ते को मेरी कमर पर चढ़ा कर मेरी चूत में कुत्ते का लन्ड डाल दिया गया। गाँव के सभी लोग कहकहे लगा रहे थे और मजे ले रहे थे। सभी बहुत मजे ले रहे थे और कह रहे थे “आज तो मज़ा आ गया! ऐसी चुदाई काफी दिनों बाद देखने को मिली है!” कुत्ते के लण्ड से चुदाई में मुझे भी जम कर मज़ा आया। कुत्ते से चुदते हुए मैं गधे के लन्ड का टोपा भी चुस रही थी। गधे के लन्ड के छेद से चीकना सा पानी बह रहा थ जिसे मैं पीने लगी। बहुत ही अजीब सा स्वाद था। जब कुत्ते का वीर्य मेरी चूत में निकल गया तो मेरी चूत में गधे का लन्ड लेने की बारी थी। मेरे चूसने और मेरे हाथों की मालिश से गधे का लन्ड तो तन कर बहुत ही ज्यादा बड़ा हो गया था। तकरीबन पंद्रह-सोलह इंच से भी ज्यादा बड़ा लन्ड होगा उस गधे का। उस तने हुए लन्ड का साइज़ देखकर एक बार तो मैं सिहर गयी लेकिन मेरी चूत उससे चुदने के लिये मचलने लगी। मैंने गधे के नीचे लेट कर चुदने के लिये पोज़िशान ले ली। मेरा सिर और कंधे ज़मीन पर टिके थे और पैर मज़बूती से ज़मीन पर गड़ाये हुए मैंने अपने घुटने मोड़कर अपनी गाँड हवा में उठा कर अपनी चूत गधे के फनफनाते लन्ड के पास ठेल दी। मैंने एक हाथ बढ़ा कर उसका लन्ड अपनी चूत के ऊपर टिका दिया और तभी वो गधा झटके से लन्ड मेरी चुत में पेलने लगा तो मैंने भी अपने कुल्हे लन्ड पर आगे ठेल दिये। वो लन्ड थोड़ा सा मेरी चूत में अंदर जा कर फंस गया। थोड़ा मैंने अपनी गाँड घुमा-घुमा कर हिलायी और थोड़ा गधे ने लन्ड को झटके मारे और उसका लन्ड मेरी चूत में उतरने लगा। आखिर में गधा जोर से रेंका और एक ज़ोर का धक्का मार कर लन्ड इतना अंदर उतार दिया कि अब और अंदर जाने कि गुंजाइश नहीं थी। मैं मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैं ये भी भूल गयी थी कि हमारे चारों तरफ गुण्डों और मवालीयों का झुण्ड़ खड़े गधे से मेरी चुदाई का नज़रा देख रहे थे। और फोटो भी खिचं रहे थे उसके बाद मेरी गधे से चुदाई स्टार्ट हो गयी। तकरीबन २-३ मिनट की चुदाई के बाद ही मेरा जिस्म ऐंठ गया और मैं जोर से चींखते हुए भरभरा कर झड़ गयी। मेरा जिस्म इस तरह झनझनाने लगा जैसे मिर्गी का दौरा पड़ा हो। इतनी ज़ोर से मैं झड़ी कि मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया। उसके बाद तो मुझे कुछ होश ही नहीं रहा। तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट तक गधा मुझे चोदता रहा और मैं बे-होशी की हालत में भी बार-बार झड़ती रही। जब मुझे होश आया तो मैं वहीं ज़मीन पर पड़ी हुई थी और मेरे ऊपर गधे का बहुत सारा वीर्य था। उसके बाद मैं उठी और मुझे उन्होंने मुझको मेरे 50000/- रुपये दे दिये। मैं वहाँ से विकी के घर की तरफ़ चल पड़ी। मैं वहाँ पहुँची तो देखा कि वहाँ पर शबाना कि चुदाई चल रही थी। मैंने विकी को कहा कि “मैं 50000/- रुपये ले आयी हूँ।” इसपर विकी ने मुझे मेरे नये हुए कपड़े दे दिये। मैं एक बार फिर से बाथरूम में जा कर नहायी और मैंने वो कपड़े पहन लिये। उसके बाद विकी ने मुझे बताया कि शबाना एक हफ़्ते के लिये यहाँ पर रह कर उससे और उसके दोस्तों से चुदने के लिये आयी है। उसके बाद मुझे विकी ने मेरे घर छोड़ दिया। और मेरी चुदाई की कमाई भी दे दी और बोला आज से तु मेरी राण्ड़ जिस से मैं बोलू तुझको चुदना पड़ेगा मैं बोली रूपये तो मिलेगें तो विकी  ने मेरे को बालों से पकड़ कर बोला गश्ती ये मैं तय करूगाँ की तुझ को रूपये ले कर चुदना है या बिना रूपये के और एक तेरी नगीं पिक्चर और एम एम एस भी मेरे पास इस लिये मना करने की सोचीयो भी मत समझे राण्ड़ इस बात को तकरीबन तीन साल हो गये हैं मैं आज भी विकी की राण्ड़ हूँ। उसके बाद से मुझे लन्ड लेने की ऐसी लत्त लगी कि अब तक मैं तकरीबन 1000 से भी ज्यादा मर्दों से अपनी चूत और गाँड़ चुदवा चूकी हूँ। हर महीने में तकरीबन दो-तीन बार मैं विकी के फार्म हाऊस में जा कर उसके दोस्तों के अलावा गाँव के गुण्ड़ों और मवाली मर्दों से चुदवाती हूँ वो भी पैसे ले कर। इसके अलावा भी मैं जहाँ कहीं भी हूँ वहीं किसी ना किसी से चुदवा लेती हूँ। अपने मोहल्ले में भी कईं पड़ोसियों के साथ-साथ दूध वाले, सब्ज़ी वाले, चौंकीदार और यहाँ तक कि मुठ मारने तक से बाज़ नहीं आती।मर्दों के अलावा मुझे जानवारों से भी चुदने की लत्त पड़ गयी। मेने एक कुता भी पाल लिया है जिससे मैं अक्सर रोज चुदवाया करती हूँ। कुते का लन्ड झड़ने के बाद जब मेरी चूत या गाँड में फूल कर फंस जाता है तो मुझे खूब मज़ा आता है और मैं आधा-आधा घाँटा कुत्ती की तरह उनसे जुड़ी रहती हूँ। जब भी विकी के फार्म हाऊस में जाती हूँ तो गाँव के गुण्ड़ों और मवालीयों मर्दों की मदद से किसी ना किसी गधे से ज़रूर चुदवाती हुँ। उनकी मेहरबानी से ही कुत्तों और गधों के अलावा कईं बार तो दूसरे जानवर जैसे कि घोड़ा, बकरा, बैल, इनके लन्ड से भी चुदवाने का खूब मज़ा लेती हूँ।मेरे शौहर जब भी छः-सात महीने में दो हफ्तों की छुट्टी लेकर आते हैं तो मैं उन्हें भी नहीं छोडती। उन्हें भी वायग्रा खिला-खिला कर घंटों उनसे चुदवाती हूँ। उन्हें मैंने ये एहसास दिला रखा कि उनके ना रहने पर मैं कितना तड़पती हुँ और जब वो आते हैं तो मैं चुदाई की महीनों की कसर उनके साथ निकालती हूँ। मुझे चोदते-चोदते अधमरे हो जाते हैं और बारह-बारह घंटे बेसुध होकर सोये पड़े रहते हैं। इस दौरान उनकी मौजूदगी में भी मैं दुसरे मर्दों और कुत्तों से चुदवा लेती हूँ।
!!!! समाप्त !!!!
तो मुझे अपने विचार मेल करें, मेरी कहानी पड़न के बाद मुझे सेक्स या सेक्स चैट के लिए सम्पर्क करने के लिये ये कहानी लिख रही हूँ या किसी नए साथी खोजने के लिए।तुम मुझे अपने विचार, विचारों और भावनाओं को आप इसे पढ़ने के बाद मेल कर सकते है और आशा है कि यह तुम सब पुरुषों के साथ ही महिलाओं के लिए हर किसी को मुझे मेरी concubine86ATyahooDOTcom. पर मेल कर सकते हैं 
तब तक के लिये नमस्कार
आपकी प्यारी चुदक्कड़
जूली             
 
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sameer28 Offline
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01-11-2017, 03:50 AM
So so hot and sexy
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dpmangla Online
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#28
02-11-2017, 02:56 PM
Nice End
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