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Romantic महक का जादू

महक का जादू

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महक का जादू

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मेरा नाम महक है, मैं २५ साल की हूँ .मैं और मेरा परिवार एक छोटे से कसबे
में रहते थे. मेरा परिवार बहोत ही छोटा है, जिसमे मेरे पिता, माँ और मेरा
छोटा भाई और मैं ये चार ही लोग रहते थे. मेरे दादाजी का देहांत मेरे बचपन
में ही हो गया था.


मेरे पिता एक मेहनती किसान है. हमारी फार्म सारे इलाके में जानी पहचानी है.
पिताजी एक पढ़े लिखे किसान है जो नए तरीके से खेती करने में विश्वास करते
है. मेरी माँ एक मेहनती गृहिणी है, वो घर के साथ साथ खेती के कामो में भी
हाथ बाटती हैं . मेरा छोटा भाई मेरे से सिर्फ दो साल छोटा है.


मेरी ये कहानी वहा से शुरू होती है जब मैं 18 साल की थी और मेरा दसवी कक्षा
का नतीजा आया था . मुझे पुरे ८५ प्रतिशत मार्क्स मिले थे, माँ पिताजी
दोनों बहोत ही खुश थे. मेरे गाँव में १० के बाद पढाई की सुविधा नहीं थी.
पिताजी चाहते थे की मैं खूब पढू, बहोत सोच विचार के बाद ये फैसला हुवा की
मुझे मामाजी के यहाँ आगे की पढाई के लिए भेजा जाये. मेरे मामाजी शहर में
रहते थे. मामाजी के शादी माँ से पहले हो चुकी थी पर मामाजी अभी तक बेऔलाद
थे.


मामाजी और मामिजी दोनों मुझे और मेरे भाई से बेहद प्यार करते थे.


मैं पिताजी के साथ शहर आ गई , मेरे मामाजी का बहोत बड़ा मकान था, और रहने वाले सिर्फ दो लोग.


मामिजी ने कहा "अच्छा हुवा तुम यहाँ आ गई , अब हमारे घर में थोड़ी रौनक आएगी"


मामीजी ने मेरे लए ऊपर वाला कमरा ठीक कर दिया. ताकि मेरी पढाई में कोई डिस्टर्ब ना हो .

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शुरुवात में कुछ दिनों तक मुझे घर की बहोत याद आती थी. लेकिन फिर मै ये सोच
के खुश होती थी की अगले साल मेरा भैया भी वही आने वाला है.



दोस्तों तब तक मै सेक्स से पूरी तरह से अपरिचित थी. जबकि मुझमे कुछ
जिस्मानी तब्दीलिया आनी शुरू हो गई थी, जैसे मेरी छाती के उभार बड़े होने
लगे थे, अब ये छोटे संतरे की तरह थे. पर अब तक मै ब्रा नहीं पहेनती थी. मैं
अन्दर से समीज पहनती थी. मेरी कांख में भी बाल उगने शुरू हो गए, और वैसे
ही बाल मेरी योनी पर भी आने लगे थे.मेरी माहवारी तो पिछले साल ही आना शुरू
हुई थी. पर माँ ने इस बारे में जादा कुछबताया नहीं था.



लेकिन शहर में आने के कुछ दिनों बाद मेरी सेक्स की जानकारी बढ़ने लगी.



मेरी क्लास में जो लडकिया थी उन सबकी छाती मुझसे काफी बड़ी लगती थी. और वो लडकिया काफी फेशनेबल भी थी



उनमे से एक लड़की थी रिया जो की मेरे घर से थोडा पास ही रहती थी, उससे मेरी
अच्छी दोस्ती हो गयी. रिया मेरे घर पढाई करने आने लगी, कभी कभार मै उसके घर
जाती थी .



एक दिन जब रिया मेरे घर आई थी, हम उपर वाले कमरे में पढाई करने बैठे थे, मै
कुर्सी पर और रिया टेबल से टिक कर बैठे थे . अचानक मैं उठ के खड़ी हो गयी,
और उसी समय रिया भी सीधी होने जा रही थी, परिणामवश हम दोनो जोरो से टकरा
गई. मेरी कोहनी रिया की छाती से जा टकराई ...




रिया : उई माँ ........ मर गई .....




मै: सॉरी रिया .... बहोत लगा क्या



रिया छाती से हाथ लगाये बैठ गई मैंने उसे फिर पूछा"बहोत दर्द हो रहा है
क्या? और मैंने उसकी छाती पर हाथ रखा, रिया ने पटक से मेरा हाथ अपने सिने
पे दबाते हूए लाबी साँसे लेना शुरू किया . मैंने सोचा की मालिश करने से उसे
कुछ राहत मिलेंगी इसलिए मैंने धीरे से उसकी छाती को मसलना शुरू किया

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अब रिया ने आपनी आँखे बंद कर ली थी और उसने मेरा दूसरा हाथ पकड के अपने दुसरे स्तन पर रख दिया , और मेरे हथो को उपर से ही दबाने लगी.

मैंने भी अनजाने में उसके स्तानो का मर्दन करना शुरू किया. थोड़ी देर बाद
मैंने रुकना चाहा, तो रिया बोली "प्लीज महक , रुक मत यार ...... और जोरो से
दबा .... प्लीज़ " और उसने अपना टॉप थोडा खिसका कर मेरे हाथो को अपनी टॉप
के अन्दर खीचा, अन्दर समीज या ब्रा कुछ भी नहीं था, उसकी नंगी छतिया मेरे
हाथो में थी . मैं असमंजस में थोड़ी देर रुक गई


रिया फिर बोली " प्लीज़ यार महक ...... दबा इनको .... जोर से दबा दे इनको "
मैं फिर अपने काम में लग गई (दबाने के ) , दोस्तों अब मुजे भी अजीब सा मजा
आने लगा था. रिया तो अपनी आखें बंद करके पूरी मस्ती में झूम रही थी, मैंने
महसूस किया की रिया के निप्पल एकदम कड़े होने लगे, उसने आँखे खोली तो उसकी
आँखे गुलाबी लगने लगी , उसने एक झटके से मुझे अपनी और खीचा और मेरे होटो पे
अपने होट रख कर पागलो की तरह चूमने लगी.


मैं कसमसाई, ताकत लगाकर मैंने उसे दूर धकेला



मैं: ये क्या कर रही हो .....



रिया मुझे फिर से आमने पास खीचते हुए बोली "मेरी जान आजा मेरी प्यास बुझा दे , मेरे बदन में आग लगी है...... आजा मेरी जान"



मै: "ये क्या पागलो जैसी हरकत कर रही हो रिया ..... छोडो मुझे...." और मैंने उसे जबरदस्ती अपने से अलग किया .



रिया: प्लीज यार महक ..... प्लीज .... फिर से दबा दे ...... देख मैं कैसी
जल रही हूँ.... मेरा बदन कैसे ताप रहा है......" इतना कह के उसने मेरा हाथ
फिर से उसकी टॉप के अन्दर डाल दिया.


मैंने महसूस किया की उसका बदन भट्टी की तरह तप रहा था. उसकी आँखे लाल हो गई
थी. घबराकर मैं बोली " अरे तेरा बदन तो बहोत ज्यादा गरम लग रहा है....
बुखार आया क्या ?"



रिया : " हा मेरी जान .... ये जवानी का बुखार चढ़ा है मेरे पे .... जल्दी
से इसे ठंडा कर दे...." और फिर से वो मेरे हाथो से उसकी छतिया दबाने लगी .


मैं: "रिया रुक मैं मामी से मांग के कुछ मेडिसिन लाती हूँ" मैंने फिर से अपने आप को छुडाने का असफल प्रयास किया.


रिया मेरे हाथ जबरदस्ती से भिचते हूए बोली " हाय रे मेरी भोली डॉक्टर ..... मेरी मेडिसिन तो तेरे ही पास है"



मैं: " मैं समझी नहीं रिया..... ये तुम क्या बोल रही हो ......."



रिया: " मैं सब समझाती हूँ मेरी भोली महक .... तू बस इनको दबाती जा ......"


मैंने हथियार डालते हुए उसके स्तनों को दबाना शुरू किया ......

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मेरे लिए भी ये नया अनुभव था . मुझे कुछ कुछ अच्छा भी लगने लगा था
.....रिया ने फिर से मुझे आपने पास खीचा और मेरे होटो पे चुम्बन जड़ दिया .



रिया: " क्या तुमने अभी तक ऐसा नहीं किया ?"



मैं :"ऐसा यानी ..... मै समझी नहीं "



रिया: " मेरी भोली बन्नो ..... क्या आज तक तुमने किसी को चुम्मा नहीं दिया..... "



मैं: "छि .... गन्दी कही की ......"


रिया ने मुझे थोड़ी देर के लिए अलग किया और वह दरवाजे की तरफ भागी. उसने
दरवाजे की कुण्डी अच्छी तरह से बंद कर दी और फिर भाग के मेरे पास आते हुए
मुझे जोर से अपनी बाहों में भीच लिया .मैं उसे देखती ही रही ..... मेरी समझ
में कुछ भी नहीं आ रहा था . मैं बोली " ये क्या कर रही हो रिया.... दरवाजा
क्यों बंद किया..... क्या हूवा है तुझे "


रिया ने बड़े प्यार से मेर तरफ देखा और बोली "आज मैं मेरी भोली बन्नो को .... जवानी का अद्भुत खेल समझाने वाली हूँ ."



मैं : "जवानी का अद्भुत खेल? ये क्या है.."


उसने फिर एक बार अपने होटो से मेरे होट बंद किये..... और मेरी उभरती हुयी छातियो को अपने हाथो से भीचना शुरू किया.


जैसे ही रिया के हाथ मेरी छातियो से लगे .... मैंने एक अजीब सा रोमांच
महसूस किया ....एक नशा सा होने लगा था .... रिया ने मेरे निचले होट पर अपनी
जुबान फिराना शुरू किया .... उसके हाथ अब मेरी टॉप के अन्दर जाने की कोशिश
कर रहे थे ..... मुझे थोडा अजीब लगा पर ना जाने क्यों मैंने उसे रोकने का
प्रयास भी नहीं किया.


जल्द ही उसके हाथ मेरी टॉप के अन्दर थे ....... लेकिन उन हाथो की मंझिल कुछ
और थी....... उसने फिर थोड़ी मेहनत कर के अपनी मंझिल को पा ही लिया....


उसने मेरी समिज के अन्दर हाथ डालते हुए मेरे नग्न स्तनों को छु लिया....

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उफ़...... मेरी तो साँस जैसे थम गई...एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा की ..... मैं हवा में हूँ.... मैं उड़ रही हूँ.

रिया ने मझे जमीं पर उतरने का मौका ही नहीं दिया , और वो मेरे स्तनों को
जोर से दबाने लगी... दोस्तों मेरी जिन्दगी का पहेला स्तन मर्दन हो रहा था.


एक अजीब सा ...मीठा सा दर्द महसूस कर रही थी मैं..... मैंने आज तक ऐसा कभी अनुभव ही नहीं किया था .


रिया ने तो जैसे मुझे पागल करने की ठान ली थी , उसने मेरे स्तानाग्रो को चुटकी में भर कर उमेठा .....


स्स स्स स्स स्स स्स…….. हाय मेरी तो जान ही निकल गई ...... मैं चीखना
चाहती थी....... मगर चीख नहीं सकती थी .... क्योंकि मेरे होट तो रिया ने
अपने होटो से बंद किये थे.


पर हुआ ये के मेरा मुह थोडा सा खुल गया .......


रिया ने इसी मौके का फायदा लेते हूए अपनी जीभ को मेरे होटो से अन्दर की और सरका दिया ....


अब उसकी जीभ मैं अपने जीभ से टकराती महसूस कर रही थी.......


मुझे एक अजीब सा मजा आ रहा था ...... मैंने अपने जीभ से रिया की जीभ को धकेलना चाहा.......


मेरी इस कोशिश में मेरी जीभ रिया के मुह में चली गई ........


अब रिया मेरी जीभ को अपने मुह में लेकर चूस रही थी .....


मेरे निप्पल अब पूरी तरह से कठोर हो गए थे . रिया का दबाना, उमेठना और मेरे
होटो को चूसना जारी था और मुझे पूरी तरह से पागल कर रहा था.


न जाने कितनी देर तक हम वैसे ही रहे ...... अचानक रिया ने चुम्बन तोडा और अपने हाथ खीच कर अलग खड़ी हो गई .


जैसे उसने मुझे आसमान से उठाकर जमीं पर पटक दिया

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मैं रिया की तरफ असंजस भरी नजरो से देखने लगी. रिया मंद मंद मुस्कुरा रही
थी . मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था . रिया धीमे कदमो से चलते हुए मेरे
पास आई , मेरी पीठ सहलाते हूए मुजे पलंग की ओर ले गयी. उसने मेरे कंधे
पकड़कर मुझे निचे बिठाया. मैं एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्म से लाल हो
गई. रिया ने धीरे से पुछा



"महक मेरी जान ..... कैसा लगा?"



मैं तो शर्म से मरी जा रही थी , मैंने अपना चेहरा रिया की छातियो में छुपाना चाहा.



उसने फिर से मेरा चेहरा हाथो में लेकर एक चुम्बन जड़ दिया और फिर से पुछा



"मेरी भोली रानी .... कैसा लगा यह खेल?"



मैंने मुस्कुराकर निचे देखा.




रिया : " देखो महक , अगर तुम जवानी का यह अद्भुत खेल सीखना चाहती हो तो शर्मना छोडो और बताओ की तुम्हे ये सब कैसा लगा?"




मैं: "क्या कैसा लगा?"




रिया : "ओह , तो तूमको अच्छा नहीं लगा ...... ठीक है मैं चलती हूँ अपने घर ...."



मैं घबरा गयी .... मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे जबरदस्ती निचे बैठाते बोला "रिया मैंने ऐसा तो नहीं बोला यार"



उसने फिर से मेरा चेहरा पकड़कर एक जोरदार चुम्बन जड़ दिया और बोली



"तो तुम्हे जवानी का अद्भुत खेल खेलना है ?"



जवाब मे इस बार मैंने खुद को समर्पित करते हूए रिया के होटो पर अपने होट रख दिए.



रिया ने ख़ुशी के मारे मुझे अपने सिने से लगाया और बोली



" चलो मेरी जान अब इस खेल की शुरुवात करते है "



रिया ने बतया "देखो महक इस खेल के कुछ नियम है उनका पालन कठोरता से करना




१ मेरी सभी बाते बिना हिचक माननी होगी




२ कोई भी शंका अभी नहीं पूछनी (बाद मे कोई भी शंका बाकि नहीं रहेगी)




मैंने कहा "मुझे तुम्हारी हर शर्त काबुल है रिया .... लेकिन जल्दी शुरू करो "



रिया ने हसते हुए मेरे निप्पल को उमेठा ....... स्स्स्सस्स्स्स ...... हाय मेरी तो जान ही निकल गयी .



रिया ने मेरी टॉप को निचे से पकड़ा और उसे खीचकर मेरे सर से निकाल दिया. मैं सिर्फ समीज पहनकर बैठी थी.



दोस्तों इस के पहले मैं किसी के सामने सिर्फ समीज में नहीं गयी. मुझे शर्म आ
रही थी, मैंने हाथो से अपनी छातियो को ढकना चाहा पर रिया ने मेरे हाथो को
पकड़ कर मन कर दिया.



रिया बड़े प्यार से मेरे रूप को देख रही थी.



मैंने शर्मा के नजरे नीची कर ली .



रिया ने फिर से मेरी ठोड़ी पकड़कर मेरा चेहरा ऊपर किया और बोली



"मेरी जान शर्मना छोडो और मेरी आंखो मे आँखे डाल कर देखो "



मैंने उसकी आग्या का पालन करते हूए उसी की आँखों में देखा रिया मेरी तरफ तारीफ भरी नजरे से देख रही थी .



उसने मेरी समीज को निचे से पकड़ा , मैं उसका इरादा भाप गयी, और उसके हाथ पकड़
लिये. उसने भी जोर लगा कर समीज को ऊपर की तरफ खीचना चालू किया



समीज को ऊपर खीचते वो बोली



" मेरी जान तुम मेरी सारी शर्ते काबुल कर चुकी हो .... अब ये शर्माने का नाटक छोड़ दो "



मैंने हार कर अपने हाथ ढीले छोड़ दिए. रिया ने एक झटके में मेरी समीज को मेरे सर से निकल दिया.



अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी.



मैंने देखा मेर संतरे जैसे स्तन कठोर हो गए थे मेरे गुलाबी निप्पल पूरी तरह फुल चुके थे

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मैंने इसके पहले कभी अपने आपको भी इतना गौर से नहीं देखा था.


इधर रिया अपनी आँखे बड़ी-बड़ी करके मेरी सौन्दर्य का पान कर रही थी.



मेरी नजरे उससे मिली तो वह प्यार से मुस्कुरा दी .



फिर रिया ने एक पल में अपना भी टॉप निकल फेका.



उसने टॉप के निचे कुछ भी नहीं पहना था .



टॉप के निकलते ही उसके दो बड़े संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने उछल पड़े.



मैं मंत्रमुग्ध सी उन दो संतरों को देखने लगी, मन ही मन मैं अपने और उसके स्तन की तुलना करने लगी .



रिया की रंगत सावली है जबकि मैं गोरी चट्टी ,



दोस्तों मेरा रंग दूध में हल्का केसर मिक्स करन के बाद होता है वैसा है .



रिया के निप्पल जामुनी थे तो मेरे गुलाबी .



लेकिन उसके स्तन मेरे स्तनो से आकार में डेढ़ गुना थे.



मुझे इस तरह देखता पा कर रिया हस दी और बोली " मेरी जान माल पसंद आया की नहीं "



मैं बस शरमाकर मुस्कुराई.



रिया ने मेरा हाथ पकड़कर आपने स्तनों पर रखा और बोली



"महक रानी ये सब तुम्हारे लिये है इसे चूमो "



मैं तो जैसे हिप्नोटाइस हो चुकी थी मेरा सर अनायास ही उसकी छाती पर झुका .... और मेरे लरजते हुए होटो ने उसके निप्पलस को छुआ.



रिया ने एक लम्बी सिसकारी भरी,



" स्स्स्सस्स्स्सSSSSS "



और उसने मेरे सर को स्तानो के ऊपर दबाया .



फिर तो मैं जैसे पागल हो गई, मैं उसके निप्पल को बारी बारी अपने मुह में लेकर जोरो से चूसने लगी.



जैसे मैं उन दो संतरों को पूरी तरह से ख जाना चाहती थी .



बिच बिच में मेरी दात उन कोमल स्तनों को लग जाते थे और रिया जोरो से सिसक उठती थी .



मैं एक स्तन को चूसती तो दुसरे स्तन को बेदर्दी से दबाती भी रहती , बिच में
ही मैंने अपनी नजरे उठा कर रिया को देखा तो वो आँखे बंद करके सिसक रही थी



तकरीबन १५ मिनिट तक चूसने के बाद उसने मजे रोका.



मेरा चेहरा ऐसा हुआ था के जैसे कोई बच्चे से उसका पसंदीदा खिलौना छीन लिया हो .

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मेरे रुकते ही रियाने मुझे धक्का दे कर बेड पर गिरा दिया और बाज की तरह मुझ पर झपट पड़ी .


उसका पहेला हमला मेरे होटो पर था इस बार उसने मेरे निचले होट को अपने होटो
के बिच ले कर चुसना शुरू किया मैंने अनायास ही अपना मुह खोलते हूए उसकी जीभ
को आमंत्रित किया



उसने भी मेरी बात रखते हूए अपनी जीभ को मेरे मुह में सरका दिया



अबकी बार झटका खाने की बारी उसकी थी ,



मैंने उसकी जीभ को चूसने लगी.



इस बिच हमारे हाथ एक दुसरे के स्तनों का मर्दन कर ही रही थे.



करीब ५ मिनिट तक हमारी जिभे लडती रही.



फिर इस चुम्बन को तोड़ते हूए रिया मेरे स्तनों की और बढ़ चली .



पहले उसने मेरी ठोड़ी को चूमा फिर उसने मेरी गर्दन पर चुम्मो की झड़ी लगा
दी, जैसे ही उसकी नजर मेरे निप्पलस पर पड़ी उसने अपनी जीभ बाहर निकली और
मेरे स्तनो पर एक लम्बा चटकारा लगाया.



रोमांच के कारण तो मेरी जान ही निकलती लगी, रिया ने मेरे स्तनों को ऐसे मुह में भरा जैसे वो उनको खा जाना चाहती हो .



बिच बिच में वो मेरी स्तानो को बेदर्दी से काट रही थी .... उसके हर काटने के बाद एक अजीब सा मीठा दर्द उठता था.



अचानक ही रिया थोड़ी नीची सरक गयी और उसने मेरी नाभि को चूमना, चूसना चालू किया.



"स्स स्स स्स स्स रिया मेरी जान और करो स्स स्स स्स ...."



वह बिच में ही मेरे स्तनों पर हमला करती और बच मे ही मेरी नाभि पर ...... करीबन २० मिनिट बाद उसने मेरा एक लम्बा चुम्बन लिया और पूछा



"क्यों मेरी जान मजा आया की नहीं "



मैं भी थोड़ी खुल गयी थी .....मैंने बोला " हा मेरी रिया रानी बहोत मज़ा आया "



यह मेरी जिंदगी का पहिला sex अनुभव था .



सेक्स की रंगीन दुनिया में आज मैंने पहेला कदम रखा था .

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