06-06-2018, 02:56 AM
इधर शुभम और निर्मला गांव पहुंच चुके थे और दूसरी तरफ शहर में अशोक को जिसका इंतजार था वह भी पहुंच चुकी थी उसकी छोटी बहन मधु,,,। अशोक को तो खुला दौर मिल गया था क्योंकि कुछ दिन तक घर पर उसके और उसकी छोटी बहन मधु के सिवा और कोई भी नहीं था इसलिए अशोक पूरी तरह से अपनी छोटी बहन के साथ गुलछर्रे उड़ा लेना चाहता था बिना किसी रोक-टोक के,,, और घर पर आते ही अशोक अपनी छोटी बहन मधु को पीते अपने बेडरूम में लेकर गया और जाते ही अपने साथ-साथ उसके भी कपड़े उतारकर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,, मधु को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन क्या करें वह मजबूर हो चुकी थी क्योंकि उसके बड़े भाई अशोक के सिवा उसका कोई सहारा नहीं था और वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बड़ा भाई उसकी मदद बस उसके बदन के एवज में ही कर सकता है,,,, इसलिए उसके पास उसके बड़े भाई का साथ देने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। वह भी बिस्तर पर उसका साथ देने लगी बहुत दिनों से अशोक भी प्यासा था क्योंकि उसने अपनी सेक्रेटरी को छोड़ दिया था। इसलिए ऊसके लंड में भी बहुत खुजली हो रही थी। मधु जैसी खूबसूरत जवानी को पाकर उससे रहा नहीं गया और वह अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया,,, मधु भी जवान थी वह जानती थी कि उसके बड़े भाई के लंड में इतना दम नहीं है उसे तो मोटा अोर बड़ा लंड चाहिए था लेकिन फिर भी कर भी क्या सकती थी उसकी बुर मे भी बहुत दिनों से कुछ गया नही था।,,, इसलिए थोड़ी बहुत प्यास तो उसके मन में भी थी। इसलिए वह भी अपने भाई का साथ देते हुए उसके लंड को चूसना शुरू कर दि।
थोड़ी देर तक अशोक अपने लंड को अपनी छोटी बहन के मुंह में डालकर उससे चुसवाता रहा,,,, इसके बाद सीधे ही वह अपनी बहन को उठा कर बिस्तर पर ले गया,, और फिर अपने हाथों से उसकी टांगो को फैला कर उसकी नमकीन बुर का स्वाद अपनी जीभ से चाट कर लेने लगा,,, अपने बड़े भाई की इस हरकत पर मधु भी एकदम प्यासी हो गई उसकी बुर से पानी निकलने लगा,, और अगले ही पल जीभ की जगह अशोक अपना लंड बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया।
दूसरी तरफ शुभम खिड़की से बाहर का नजारा देखकर संतुष्ट हो चुका था और इस बात का पता लगभग ऊसे चल चुका था कि उसकी बड़ी मामी लगभग लंड की प्यासी है,, वह मन ही मन यह सोचने लगा कि अगर जरा सी कोशिश की जाए तो उसे बड़ी मामी के साथ साथ उसकी छोटी मामी और बड़ी मामी की लड़की तनु तीनों की बुर चोदने को मिल जाएगी,,,, वह मन ही मन में यह ख्याल बोलने लगा कि अगर ऐसा हुआ तो उसकी दसों की 10 उंगलियां घी में होंगी।। एक नया तरीके का अनुभव उसे महसूस करने को मिलेगा क्योंकि उसने अभी तक अपनी मां को ही चोदते आ रहा था। किसी गैर औरत को अभी तक चोदा नहीं था,,, हां इतना जरूर है कि अगर अब तक वह शहर में होता तो वह अपनी शीतल मैम की चुदाई जरूर कर चुका होता। लेकिन वह सारा ध्यान इस समय गांव की तीनो जवानीयो पर केंद्रीत किए हुए था वह तीनों की बुर का मजा लेना चाहता था और देखना चाहता था कि इन तीनों की बुर का स्वाद किस तरह का होता है।,,,
धीरे-धीरे उसे भी गांव में मज़ा आने लगा था गांव का खुलापन खुली हवा और ज्यादातर गांव की औरतो का आपस में गंदा मजाक करना बेहद पसंद था। शुभम की नजर दिन-रात अब तीनों के फिराक में रहने लगी,, हालांकि वह अपनी मां से भी काफी इंप्रेस था क्योंकि यहां आने के बाद उसके रुप यौवनं में कुछ ज्यादा ही निखार आ गया था। लेकिन 2 दिन बीत चुके थे,, अभी तक वह अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाया था क्योंकि देर रात तक कोई ना कोई औरत निर्मला को अपने पास बिठाकर गप्पे लड़ाती रहती और इतने वर्षों मे आने के बाद निर्मला उन्हें इनकार भी नहीं कर पाती थी और ऐसे में शुभम सो जाता था और निर्मला भी बिस्तर पर जाते ही ढेर हो जाते थी। हालांकि उसकी बुर में भी चीटियां रेंग रही थी क्योंकि उसकी आदत अब रोजाना लंड लेने को करने लगी थी।,,,
ऐसे ही शुभम एक दिन नहाकर अपने कमरे में टॉवेल लपेट कर अपनी अंडरवियर को धो रहा था। इधर-उधर ढूंढने के बाद भी उसे अंडरवियर नहीं मिल रही थी वह काफी परेशान हो रहा था और इस हाल में बाहर जा भी नहीं सकता था।,,, बहुत गुस्से में इधर उधर बिस्तर उधेड़बुन रहा था लेकिन कहीं भी उसे उसकी अंडर बीयर नहीं मिल पा रही थी।,,, इसी अफरा-तफरी में उसकी कमर के टावर टूट कर नीचे गिर गई और वह पूरी तरह से नंगा हो गया उसका मजबूत तगड़ा लंड खड़ा नहीं था लेकिन फिर भी,,, इस तरह से जानू के बीच झूल रहा था कि इस अवस्था में कोई भी औरत देख ले तो उसकी बुर से पानी अपने आप फेंक दें,,, उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि वह इस समय कमरे में पूरी तरह से नंगा होकर इधर-उधर घूम रहा है वह तो बस परेशान था अपनी अंडरवियर के लिए,,, वह कमरे के चारों तरफ इधर-उधर नंगा ही घूम कर अपनी चड्डी ढुंढ रहा था। लेकिन इस बात का अनुभव उसे भी हो रहा था कि,,, उसकी टांगों के बीच का लंबा लंड झूल रहा है लेकिन इस बात से वह बिल्कुल भी बेफिक्र हो चुका था,,,। तभी वह अपनी चड्डी को इधर-उधर ढूंढता हुआ बिस्तर के नीचे नजर डाला तो वहां पर उसे उसकी मां की पैंटी नजर आई और वह उसे हाथों में लेकर देखने लगा,,, यू एकाएक उसके हाथों में उसकी मां की पैंटी आ जाने की वजह से उसके तनबदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई।। वह एक तक अपनी मां की पैंटी को हाथों में लेकर उसे खींच-खींच कर देखने लगा और सोचने लगा कि उसकी मां की भारी-भरकम गांड इतनी छोटी सी पेंटी में कैसे समा जाती है। तभी उसे वह पल याद आने लगा जब उसकी मामी लोग उसकी मां की पैंटी को देख कर उसे कच्छी कह रही थी। कच्छी शब्द उसके जेहन में आते ही उत्तेजना के मारे का लंड खड़ा होने लगा,,,। उसे कच्छी शब्द पेंटी शब्द से ज्यादा मादक लग रहा था। इस शब्द में उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था तभी तो वह अपनी मां की कच्छी को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव करते हुए अपने लंड को खड़ा कर लिया था। उससे रहा नहीं गया और वह अपनी मां की चड्डी को अपनी नाक से लगाकर सुँघने लगा,, धुली हुई पेंटिं से भी अजीब सी मादक खुशबू उसके नाक में प्रवेश करके उसके तन-बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़का रही थी।,,, कुछ देर तक ऐसे ही सुंघकर मस्त होता हुआ वह वापस उसे बिस्तर के नीचे रख दिया और फिर से एक बार अपनी चड्डी को ढूंढने लगा,,,
वह बेखबर होकर अपनी चड्डी को ढूंढ ही रहा था कि तभी दरवाजा भाड़ाक की आवाज के साथ खुला,,, और वह तुरंत दरवाजे की तरफ मुड़ कर खड़ा होकर देखने लगा कि आखिर हुआ क्या,,, उसे इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि, वह कमरे में पूरी तरह से नंगा हो चुका है,,, दरवाजा खुलने से वह एक दम से चौंक उठा था,,, लेकिन उससे भी ज्यादा शौक होती थी उसकी बड़ी मामी जो कि दरवाजा खोली थी वह तो शुभम को इस तरह से नंगा देखकर एकदम हैरान रह गई और ज्यादा हैरानी उसे शुभम के लंबे लंड को देखकर हो रही थी। उसकी नजरें सुभम के लंड पर ही टिकी हुई थी उसका मुंह खुला का खुला रह गया था आंखें फटी की फटी रह गई थी जिंदगी में उसने आज तक इस तरह का मजबुत तगड़ा लंड नहीं देखी थी। उसका तो पूरा वजूद ही हिल गया था शुभम भी एकाएक दरवाजे पर अपनी बड़ी मामी को खड़ी देखकर हैरान हो गया लेकिन,,, उसे इस बात से और ज्यादा झटका लगा कि इस समय वह कमरे में पूरी तरह से नंबर खड़ा था और तो और उसका लंड भी पूरी तरह से टाइट होकर सीधा खड़ा था,,, जिसको उसकी मांमी आंखें फाड़े देख रही थी,,,, शुभम बड़ी अजीब सी स्थिति में फंस चुका था,,। उसके पास इतना भी समय नहीं था कि वह पास में पड़ी टावल को उठाकर अपनी कमर से लपेट सके,,,, हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मामी दरवाजे पर खड़ी होकर के बस उसके लंड को ही देखे जा रही थी।,,,
शुभम पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था वह ज्यादा देर तक एैसे खड़ा नहीं रह सका। वग झट से आगे बढ़कर बिस्तर पर पड़ी टावल उठा कर अपनी कमर से लपेट लिया तब जाकर के उसकी मामी का ध्यान भंग हुआ,,,।
और उसे भी इस बात से शर्मिंदगी हुई थी वह भी बेशर्मों की तरह शुभम के लौड़े को देखे जा रही थी। वग शर्मा के झट से वहां से चली गई,,,, शुभम जल्दी जल्दी कपड़े पहनने लगा,।
दूसरी तरफ उसकी मामी सीधे अपने कमरे में आ कर बिस्तर पर बैठ कर हांफने लगी उसे तो अब भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जो नजारा वह अभी-अभी शुभम के कमरे में देख कर आई है वह सच है। वह मन ही मन सोचने लगी कि, क्या हुआ जो देखी थी वह सच है क्या शुभम का लंड वाकई में इतना बड़ा और मोटा है। वह तोें किसी गधे का लंड दिख रहा था।
। वह बिस्तर पर बैठे-बैठे उत्तेजना के मारे,, शुभम के
लंड की तुलना अपने पति से करने लगी तो उसे इस बात का एहसास हो गया कि शुभम की लंबे मोटे लंड के आगे उसके पति का लंड तो काफी छोटा था।
लंड की तुलनात्मक असर को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी,, एक अजीब सा एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था।
थोड़ी देर तक अशोक अपने लंड को अपनी छोटी बहन के मुंह में डालकर उससे चुसवाता रहा,,,, इसके बाद सीधे ही वह अपनी बहन को उठा कर बिस्तर पर ले गया,, और फिर अपने हाथों से उसकी टांगो को फैला कर उसकी नमकीन बुर का स्वाद अपनी जीभ से चाट कर लेने लगा,,, अपने बड़े भाई की इस हरकत पर मधु भी एकदम प्यासी हो गई उसकी बुर से पानी निकलने लगा,, और अगले ही पल जीभ की जगह अशोक अपना लंड बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया।
दूसरी तरफ शुभम खिड़की से बाहर का नजारा देखकर संतुष्ट हो चुका था और इस बात का पता लगभग ऊसे चल चुका था कि उसकी बड़ी मामी लगभग लंड की प्यासी है,, वह मन ही मन यह सोचने लगा कि अगर जरा सी कोशिश की जाए तो उसे बड़ी मामी के साथ साथ उसकी छोटी मामी और बड़ी मामी की लड़की तनु तीनों की बुर चोदने को मिल जाएगी,,,, वह मन ही मन में यह ख्याल बोलने लगा कि अगर ऐसा हुआ तो उसकी दसों की 10 उंगलियां घी में होंगी।। एक नया तरीके का अनुभव उसे महसूस करने को मिलेगा क्योंकि उसने अभी तक अपनी मां को ही चोदते आ रहा था। किसी गैर औरत को अभी तक चोदा नहीं था,,, हां इतना जरूर है कि अगर अब तक वह शहर में होता तो वह अपनी शीतल मैम की चुदाई जरूर कर चुका होता। लेकिन वह सारा ध्यान इस समय गांव की तीनो जवानीयो पर केंद्रीत किए हुए था वह तीनों की बुर का मजा लेना चाहता था और देखना चाहता था कि इन तीनों की बुर का स्वाद किस तरह का होता है।,,,
धीरे-धीरे उसे भी गांव में मज़ा आने लगा था गांव का खुलापन खुली हवा और ज्यादातर गांव की औरतो का आपस में गंदा मजाक करना बेहद पसंद था। शुभम की नजर दिन-रात अब तीनों के फिराक में रहने लगी,, हालांकि वह अपनी मां से भी काफी इंप्रेस था क्योंकि यहां आने के बाद उसके रुप यौवनं में कुछ ज्यादा ही निखार आ गया था। लेकिन 2 दिन बीत चुके थे,, अभी तक वह अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाया था क्योंकि देर रात तक कोई ना कोई औरत निर्मला को अपने पास बिठाकर गप्पे लड़ाती रहती और इतने वर्षों मे आने के बाद निर्मला उन्हें इनकार भी नहीं कर पाती थी और ऐसे में शुभम सो जाता था और निर्मला भी बिस्तर पर जाते ही ढेर हो जाते थी। हालांकि उसकी बुर में भी चीटियां रेंग रही थी क्योंकि उसकी आदत अब रोजाना लंड लेने को करने लगी थी।,,,
ऐसे ही शुभम एक दिन नहाकर अपने कमरे में टॉवेल लपेट कर अपनी अंडरवियर को धो रहा था। इधर-उधर ढूंढने के बाद भी उसे अंडरवियर नहीं मिल रही थी वह काफी परेशान हो रहा था और इस हाल में बाहर जा भी नहीं सकता था।,,, बहुत गुस्से में इधर उधर बिस्तर उधेड़बुन रहा था लेकिन कहीं भी उसे उसकी अंडर बीयर नहीं मिल पा रही थी।,,, इसी अफरा-तफरी में उसकी कमर के टावर टूट कर नीचे गिर गई और वह पूरी तरह से नंगा हो गया उसका मजबूत तगड़ा लंड खड़ा नहीं था लेकिन फिर भी,,, इस तरह से जानू के बीच झूल रहा था कि इस अवस्था में कोई भी औरत देख ले तो उसकी बुर से पानी अपने आप फेंक दें,,, उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि वह इस समय कमरे में पूरी तरह से नंगा होकर इधर-उधर घूम रहा है वह तो बस परेशान था अपनी अंडरवियर के लिए,,, वह कमरे के चारों तरफ इधर-उधर नंगा ही घूम कर अपनी चड्डी ढुंढ रहा था। लेकिन इस बात का अनुभव उसे भी हो रहा था कि,,, उसकी टांगों के बीच का लंबा लंड झूल रहा है लेकिन इस बात से वह बिल्कुल भी बेफिक्र हो चुका था,,,। तभी वह अपनी चड्डी को इधर-उधर ढूंढता हुआ बिस्तर के नीचे नजर डाला तो वहां पर उसे उसकी मां की पैंटी नजर आई और वह उसे हाथों में लेकर देखने लगा,,, यू एकाएक उसके हाथों में उसकी मां की पैंटी आ जाने की वजह से उसके तनबदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई।। वह एक तक अपनी मां की पैंटी को हाथों में लेकर उसे खींच-खींच कर देखने लगा और सोचने लगा कि उसकी मां की भारी-भरकम गांड इतनी छोटी सी पेंटी में कैसे समा जाती है। तभी उसे वह पल याद आने लगा जब उसकी मामी लोग उसकी मां की पैंटी को देख कर उसे कच्छी कह रही थी। कच्छी शब्द उसके जेहन में आते ही उत्तेजना के मारे का लंड खड़ा होने लगा,,,। उसे कच्छी शब्द पेंटी शब्द से ज्यादा मादक लग रहा था। इस शब्द में उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था तभी तो वह अपनी मां की कच्छी को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव करते हुए अपने लंड को खड़ा कर लिया था। उससे रहा नहीं गया और वह अपनी मां की चड्डी को अपनी नाक से लगाकर सुँघने लगा,, धुली हुई पेंटिं से भी अजीब सी मादक खुशबू उसके नाक में प्रवेश करके उसके तन-बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़का रही थी।,,, कुछ देर तक ऐसे ही सुंघकर मस्त होता हुआ वह वापस उसे बिस्तर के नीचे रख दिया और फिर से एक बार अपनी चड्डी को ढूंढने लगा,,,
वह बेखबर होकर अपनी चड्डी को ढूंढ ही रहा था कि तभी दरवाजा भाड़ाक की आवाज के साथ खुला,,, और वह तुरंत दरवाजे की तरफ मुड़ कर खड़ा होकर देखने लगा कि आखिर हुआ क्या,,, उसे इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि, वह कमरे में पूरी तरह से नंगा हो चुका है,,, दरवाजा खुलने से वह एक दम से चौंक उठा था,,, लेकिन उससे भी ज्यादा शौक होती थी उसकी बड़ी मामी जो कि दरवाजा खोली थी वह तो शुभम को इस तरह से नंगा देखकर एकदम हैरान रह गई और ज्यादा हैरानी उसे शुभम के लंबे लंड को देखकर हो रही थी। उसकी नजरें सुभम के लंड पर ही टिकी हुई थी उसका मुंह खुला का खुला रह गया था आंखें फटी की फटी रह गई थी जिंदगी में उसने आज तक इस तरह का मजबुत तगड़ा लंड नहीं देखी थी। उसका तो पूरा वजूद ही हिल गया था शुभम भी एकाएक दरवाजे पर अपनी बड़ी मामी को खड़ी देखकर हैरान हो गया लेकिन,,, उसे इस बात से और ज्यादा झटका लगा कि इस समय वह कमरे में पूरी तरह से नंबर खड़ा था और तो और उसका लंड भी पूरी तरह से टाइट होकर सीधा खड़ा था,,, जिसको उसकी मांमी आंखें फाड़े देख रही थी,,,, शुभम बड़ी अजीब सी स्थिति में फंस चुका था,,। उसके पास इतना भी समय नहीं था कि वह पास में पड़ी टावल को उठाकर अपनी कमर से लपेट सके,,,, हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मामी दरवाजे पर खड़ी होकर के बस उसके लंड को ही देखे जा रही थी।,,,
शुभम पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था वह ज्यादा देर तक एैसे खड़ा नहीं रह सका। वग झट से आगे बढ़कर बिस्तर पर पड़ी टावल उठा कर अपनी कमर से लपेट लिया तब जाकर के उसकी मामी का ध्यान भंग हुआ,,,।
और उसे भी इस बात से शर्मिंदगी हुई थी वह भी बेशर्मों की तरह शुभम के लौड़े को देखे जा रही थी। वग शर्मा के झट से वहां से चली गई,,,, शुभम जल्दी जल्दी कपड़े पहनने लगा,।
दूसरी तरफ उसकी मामी सीधे अपने कमरे में आ कर बिस्तर पर बैठ कर हांफने लगी उसे तो अब भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जो नजारा वह अभी-अभी शुभम के कमरे में देख कर आई है वह सच है। वह मन ही मन सोचने लगी कि, क्या हुआ जो देखी थी वह सच है क्या शुभम का लंड वाकई में इतना बड़ा और मोटा है। वह तोें किसी गधे का लंड दिख रहा था।
। वह बिस्तर पर बैठे-बैठे उत्तेजना के मारे,, शुभम के
लंड की तुलना अपने पति से करने लगी तो उसे इस बात का एहसास हो गया कि शुभम की लंबे मोटे लंड के आगे उसके पति का लंड तो काफी छोटा था।
लंड की तुलनात्मक असर को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी,, एक अजीब सा एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था।