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Desi मजबूर (एक औरत की दास्तान)

(11-01-2018, 06:02 AM)Rohitkapoor : सानिया दरवाजा खोलने चली गयी। रुखसाना बेडरूम में बैठी सब्जी काट रही थी और आँखें कमरे के दरवाजे के बाहर लगी हुई थी। तभी उसे बाहर से सुनील की हल्की सी आवाज़ सुनायी दी। वो शायद सानिया को कुछ कह रहा था। रुखसाना को पता नहीं क्यों सानिया का इतनी देर तक सुनील के साथ बातें करना खलने लगा। वो उठ कर बाहर जाने ही वाली थी कि सुनील बेडरूम के सामने से गुजरा और ऊपर चला गया। उसके पीछे सानिया भी आ गयी और सीधे रुखसाना के बेडरूम में चली आयी।

इससे पहले कि रुख्सना सानिया से कुछ पूछ पाती वो खुद ही बोल पड़ी, “अम्मी आज रात अब्बू घर नहीं आयेंगे... वो सुनील बोल रहा था कि आज उनकी नाइट ड्यूटी है...!” सानिया सब्जी काटने में रुखसाना की मदद करने लगी। रुखसाना सोच में पड़ गयी कि आखिर उसे हो क्या गया है... सुनील तो शायद इसलिये सानिया से बात कर रहा था कि आज फ़ारूक घर पर नहीं आयेगा... यही बताना होगा उसे... पर उसे क्या हुआ था को वो इस कदर बेचैन हो उठी... अगर वैसे भी सानिया और सुनील आपस में कुछ बात कर भी लेते है तो इसमें हर्ज ही क्या है... वो दोनों तो हम उम्र हैं… कुंवारे हैं और वो एक शादीशुदा औरत है उम्र में भी उन दोनों से चौदह-पंद्रह साल बड़ी।
 
रुखसाना को सानिया और सुनील का बात करना इस लिये भी अच्छा नहीं लगा था कि जब से सुनील उनके यहाँ रहने आया था तब से सानिया के तेवर बदले-बदले लग रहे थे... कहाँ तो हर रोज़ सानिया को ढंग से कपड़े पहनने और सजने संवरने के लिये जोर देना पड़ता था और कहाँ वो इन दिनों नहा-धो कर बिना कहे शाम को कॉलेज से लौट कर तैयार होती और आइने के सामने बैठ कर अच्छे से मेक-अप तक करने लगी थी। इन दो हफ़्तों में उसका पहनावा भी बदल गया था। यही सब महसूस करके रुखसाना को सानिया के ऊपर शक सा होने लगा।
 
फिर रुखसाना ने सोचा कि अगर सानिया सुनील को पसंद करती भी है तो उसमें सानिया की क्या गल्ती है... सुनील था ही इतना हैंडसम और चार्मिंग लड़का कि जो भी लड़की उसे देखे उस पर फ़िदा हो जाये। रुखसाना खुद भी तो इस उम्र में सुनील पे फ़िदा सी हो गयी थी और अपने कपड़ों और मेक-अप पे पहले से ज्यादा तवज्जो देने लगी थी। रुखसाना उठी और सानिया को सब्जी काट कर किचन में रखने के लिये कहा। फिर आईने के सामने एक दफ़ा  अपने खुले बाल संवारे और थोड़ा मेक-अप दुरुस्त किया। रुखसाना घर के अंदर भी ज्यादातर ऊँची हील वाली चप्पल पहने रहती थी लेकिन अब मेक-अप दुरुस्त करके उसने अलमारी में से और भी ज्यादा ऊँची पेंसिल हील वाली सैंडल निकाल कर पहन ली क्योंकि इन दो हफ़्तों में सुनील की नज़रों से रुखसाना को उसकी पसंद का अंदाज़ा हो गया था। सुनील की नज़र अक्सर हील वाली चप्पलों में रुखसाना के पैरों पे अटक जाया करती थी। सैंडलों के बकल बंद करके वो एक गिलास में ठंडा पानी लेकर ऊपर चली गयी। सोचा कि सुनील को प्यास लगी होगी तो गरमी में उसे फ़्रिज का ठंडा पानी दे आये लेकिन इसमें उसका खुद का मकसद भी छुपा था।  जैसे ही रुखसाना सुनील के कमरे के दरवाजे पर पहुँची तो सुनील अचानक से बाहर आ गया। उसके जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया था... जो उसने कमर पर लपेट रखा था। शायद वो नहाने के लिये बाथरूम में जा रहा था।

Rochak kahani.

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रुखसाना ने उसकी तरफ़ पानी का गिलास बढ़ाया तो सुनील ने शुक्रिया कह कर पानी का गिलास लेते हुए पानी पीना शुरू कर दिया। रुखसाना की नज़र फिर से सुनील की चौड़ी छाती पर अटक गयी। पसीने की कुछ बूँदें उसकी छाती से उसके पेट की तरफ़ बह रही थीं जिसे देख कर रुखसाना के होंठ थरथराने लगे। सुनील ने पानी खतम किया और रुखसाना की तरफ़ गिलास बढ़ाते हुए बोला, “थैंक यू भाभी जी... लेकिन आप ने क्यों तकलीफ़ उठायी... मैं खुद ही नीचे आ कर पानी ले लेता!” रुखसाना ने नोटिस क्या कि सुनील उसके काँप रहे होंठों को बड़ी ही हसरत भरी निगाहों से देख रहा था। सुनील उसे निहारते हुए बोला, “भाभी जी कहीं बाहर जा रही हैं क्या...?”

रुखसाना चौंकते हुए बोली, “नहीं तो क्यों!” 
 
“नहीं बस वो आपको इतने अच्छे से तैयार हुआ देख कर मुझे ऐसा लगा... एक बात कहूँ भाभी जी... आप खूबसूरत तो हैं ही और आपके कपड़ों की चॉईस... मतलब आपका ड्रेसिंग सेंस भी बहुत अच्छा है... जैसे कि अब ये सैंडल आपकी खूबसूरती कईं गुना बढ़ा रहे हैं। सुनील से इस तरह अपनी तारीफ़ सुनकर रुखसाना के गाल शर्म से लाल हो गये। फ़रूक से तो कभी उसने अपनी तारीफ़ में दो अल्फ़ाज़ भी नहीं सुने थे। सिर झुका कर शरमाते हुए वो धीरे से बोली, :बस ऐसे ही सजने-संवरने का थोड़ा शौक है मुझे!” फिर वो गिलास लेकर जोर-जोर से धड़कते दिल के साथ नीचे आ गयी।
 
जब रुखसाना नीचे पहुँची तो सानिया खाना तैयार कर रही थी। सानिया को पहले कभी इतनी लगन और प्यार से खाना बनाते रुखसाना कभी नहीं देखा था। थोड़ी देर में ही खाना तैयार हो गया। रुखसाना ने सुनील के लिये खाना थाली में डाला और उसने सोचा क्यों ना आज सुनील को खाने के लिये नीचे ही बुला लूँ। उसने सानिया से कहा कि वो खाना टेबल पर लगा दे जब तक वो खुद ऊपर से सुनील को बुला कर लाती है। रुखसाना की बात सुन कर सानिया एक दम चहक से उठी।
 
सानिया: “अम्मी सुनील आज खाना नीचे खायेगा?”
 
रुखसाना: “हाँ! मैं बुला कर लाती हूँ..!”
 
रुखसाना ऊपर की तरफ़ गयी। ऊपर सन्नाटा पसरा हुआ था। बस ऊँची पेंसिल हील वाले सैंडलों में रुखसाना के कदमों की आवाज़ और सुनील के रूम से उसके गुनगुनाने की आवाज़ सुनायी दी रही थी। रुखसाना धीरे-धीरे कदमों के साथ सुनील के कमरे की तरफ़ बढ़ी और जैसे ही वो सुनील के कमरे के दरवाजे पर पहुँची तो अंदर का नज़ारा देख कर उसकी तो साँसें ही अटक गयीं। सुनील बेड के सामने एक दम नंगा खड़ा हुआ था। उसका जिस्म बॉडी लोशन की वजह से एक दम चमक रहा था और वो अपने लंड को बॉडी लोशन लगा कर मुठ मारने वाले अंदाज़ में हिला रहा था। सुनील का आठ इंच लंबा और मोटा अनकटा लंड देख कर रुखसाना की साँसें अटक गयी। उसके लंड का सुपाड़ा अपनी चमड़ी में से निकल कर किसी साँप की तरह फुंफकार रहा था।

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क्या सुपाड़ा था उसके लंड का... एक दम लाल टमाटर के तरह इतना मोटा सुपाड़ा... उफ़्फ़  हाय रुखसाना की चूत तो जैसे उसी पल मूत देती। रुखसाना बुत्त सी बनी सुनील के अनकटे लंड को हवा में झटके खाते हुए देखने लगी... इस बात से अंजान कि वो एक पराये जवान लड़के के सामने उसके कमरे में खड़ी है... वो लड़का जो इस वक़्त एक दम नंगा खड़ा है। तभी सुनील एक दम उसकी तरफ़ पलटा और उसके हाथ से लोशन के बोतल नीचे गिर गयी। एक पल के लिये वो भी सकते में आ गया। फिर जैसे ही उसे होश आया तो उसने बेड पर पड़ा तौलिया उठा कर जल्दी से कमर पर लपेट लिया और बोला,  “सॉरी वो मैं... मैं डोर बंद करना भूल गया था...!” अभी तक रुखसाना यूँ बुत्त बन कर खड़ी थी। सुनील की आवाज़ सुन कर वो इस दुनिया में वापस लौटी। “हाय अल्लाह!” उसके मुँह से निकला और वो तेजी से बाहर की तरफ़ भागी और वापस नीचे आ गयी।

रुखसाना नीचे आकर कुर्सी पर बैठ गयी और तेजी से साँसें लेने लगी। जो कुछ उसने थोड़ी देर पहले देखा था... उसे यकीन नहीं हो रहा था। जिस तरह से वो अपने लंड को हिला रहा था... उसे देख कर तो रुखसाना के रोंगटे ही खड़े हो गये थे... उसकी चुत में हलचल मच गयी थी और गीलापन भर गया था। तभी सानिया अंदर आयी और उसके साथ वाली कुर्सी पर बैठते हुए बोली, “अम्मी सुनील नहीं आया क्या?”
 
रुखसाना: “नहीं! वो कह रहा है कि वो ऊपर ही खाना खायेगा!”
 
सानिया: “ठीक है अम्मी... मैं खाना डाल देती हूँ... आप खाना दे आओ...!”
 
रुखसाना: “सानिया तुम खुद ही देकर आ जाओ... मेरी तबियत ठीक नहीं है...!” सुनील के सामने जाने की रुखसाना की हिम्मत नहीं हुई। उसे यकीन था कि अब तक सुनील ने भी कपड़े पहन लिये होंगे... इसलिये उसने सानिया से खाना ले जाने को कह दिया।
 
सानिया बिना कुछ कहे खाना थाली में डाल कर ऊपर चली गयी और सुनील को खाना देकर वापस आ गयी और रुखसाना से बोली, “अम्मी सुनील पूछ रहा था कि आप खाना देने ऊपर नहीं आयीं... आप ठीक तो है ना...?” रुखसाना ने एक बार सानिया की तरफ़ देखा और फिर बोली, “बस थोड़ी थकान सी लग रही है... मैं सोने जा रही हूँ तू भी खाना खा कर किचन का काम निपटा कर सो जाना!” सानिया को हिदायत दे कर रुखसाना अपने बेडरूम में जा कर दरवाजा बंद करके बेड पर लेट गयी। उसके दिल-ओ-दिमाग पे सुनील का लौड़ा छाया हुआ था और वो इस कदर मदहोश सी थी कि उसने कपड़े बदलना तो दूर बल्कि सैंडल तक नहीं उतारे थे। ऐसे ही सुनील के लंड का तसव्वुर करते हुए बेड पर लेट कर अपनी टाँगों के बीच तकिया दबा लिया हल्के-हल्के उस पर अपनी चूत रगड़ने लगी। फिर अपना हाथ सलवार में डाल कर चूत सहलाते हुए उंगलियों से अपनी चूत चोदने लगी। आमतौर पे फिर जब वो हफ़्ते में एक-दो दफ़ा खुद-लज़्ज़ती करती थी तो इतने में उसे तस्क़ीन हासिल हो जाती थी लेकिन आज तो उसकी चूत को करार मिल ही नहीं रहा था।

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थोड़ी देर बाद वो उठी और बेडरूम का दरवाजा खोल कर धीरे बाहर निकली। अब तक सानिया अपने कमरे में जा कर सो चुकी थी। घर में अंधेरा था... बस एक नाइट-लैम्प की हल्की सी रोशनी थी। रुखसाना किचन में गयी और एक छोटा सा खीरा ले कर वापस बेडरूम में आ गयी। दरवाजा बंद करके उसने आनन फ़ानन अपनी सलवार और पैंटी उतार दी और फिर वो बेड पर घुटने मोड़ कर लेटते हुए खीरा अपनी चूत में डाल कर अंदर बाहर करने लगी। उसकी बंद आँखों में अभी भी सूनील के नंगे जिस्म और उसके तने हुए अनकटे लौड़े का नज़ारा था। करीब आठ-दस मिनट चूत को खीरे से खोदने के बाद उसका जिस्म झटके खाने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। उसके बाद रुखसाना आसूदा होकर सो गयी।
 
अगले दिन सुबह सुबह जब रुखसाना की आँख खुली तो खुद को बिस्तर पे सिर्फ़ कमीज़ पहने हुए नंगी हालत में पाया। सुनील के लिये जो पेंसिल हील के सैंडल पिछली शाम को पहने थे वो अब भी पैरों में मौजूद थे। बिस्तर पे पास ही वो खीरा भी पड़ा हुआ था जिसे देख कर रुखसाना का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसकी सलवार और पैंटी भी फर्श पर पड़े हुई थी। उसने कमरे और बिस्तर की हालत ठीक की और फिर नहाने के लिये बाथरूम में घुस गयी। इतने में फ़ारूक वापिस आ गया और सानिया और रुखसाना से बोला कि सानिया की मामी की तबियत खराब है और इसलिये वो सानिया को कुछ दिनो के लिये अपने पास बुलाना चाहती है। फ़ारूक ने सानिया को तैयार होने के लिये कहा। रुखसाना ने जल्दी से नाश्ता तैयार किया और नाश्ते की ट्रे लगाकर सानिया से कहा कि वो ऊपर सुनील को नाश्ता दे आये। आज सानिया और भी ज्यादा कहर ढा रही थी।
 
रुखसाना ने गौर किया कि सानिया ने मरून रंग का सलवार कमीज़ पहना हुआ था। उसका गोरा रंग उस मरून जोड़े में और खिल रहा था और पैरों में सफ़ेद सैंडल बेहद सूट कर रहे थे। रुखसाना ने सोचा कि आज तो जरूर सुनील सानिया की खूबसूरती को देख कर घायल हो गया होगा। सानिया नाश्ता देकर वापस आयी तो उसके चेहरे पर बहुत ही प्यारी सी मुस्कान थी। फिर थोड़ी देर बाद सुनील भी नीचे आ गया। रुखसाना किचन में ही काम कर रही थी कि फ़ारूक किचन मैं आकर बोला, “रुखसाना! मैं शाम तक वापस आ जाऊँगा... और हाँ आज अज़रा भाभीजान आने वाली हैं... उनकी अच्छे से मेहमान नवाज़ी करना!”
 
ये कह कर सानिया और फ़ारूक चले गये। रूखसाना ने मन ही मन में सोचा कि “अच्छा तो इसलिये फ़ारूक सानिया को उसकी मामी के घर छोड़ने जा रहा था ताकि वो अपनी भाभी अज़रा के साथ खुल कर रंगरलियाँ मना सके।” सानिया समझदार हो चुकी थी और घर में उसकी मौजूदगी की वजह से फ़ारूक और अज़रा को एहतियात बरतनी पड़ती थी। रुखसाना की तो उन्हें कोई परवाह थी नहीं।
 
फ़ारूक के बड़े भाई उन लोगों के मुकाबले ज्यादा पैसे वाले थे। वो एक प्राइवेट कंपनी में ऊँचे ओहदे पर थे। उनका बड़ा लड़का इंजिनियरिंग कर रहा था और दो बच्चे बोर्डिंग स्कूल में थे। उन्हें भी अक्सर दूसरे शहरों में दौरों पे जाना पड़ता था इसलिये अज़रा भाभी हर महीने दो-चार दिन के लिये फ़ारूक के साथ ऐयाशी करने आ ही जाती थी। कभी-कभार फ़ारूक को भी अपने पास बुला लेती थी। अज़रा वैसे तो फ़ारूक के बड़े भाई की बीवी थी पर उम्र में फ़ारूक से छोटी थी। अज़रा की उम्र करीब बयालीस साल थी लेकिन पैंतीस-छत्तीस से ज्यादा की नहीं लगती थी। रुखसाना की तरह खुदा ने उसे भी बेपनाह हुस्न से नवाज़ा था और अज़रा को तो रुपये-पैसों की भी कमी नहीं थी। फ़रूक को तो उसने अपने हुस्न का गुलाम बना रखा था जबकि रुखसाना हुस्न और खूबसूरती में अज़रा से बढ़कर ही थी।

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Mazedar kahani aage badhaye.

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