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Desi चढ़ती जवानी की अंगड़ाई

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Desi चढ़ती जवानी की अंगड़ाई
Shivani Sharma Offline
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#1
21-02-2018, 02:26 PM
नमस्कार दोस्तों आप सभी पाठक गण का ढेर सारा प्यार मुझे बार-बार नहीं कहानियां लिखने को प्रेरित करता है। ऐसे ही में एक कहानी को फिर से लिखने जा रही हूं जो आप लोगों को उम्मीद है कि बेहद पसंद आएगी,,,,,
यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है,,,,,, इसके सभी पात्र भी पूरी तरह से काल्पनिक है,,,,,,

यह कहानी एक लड़की के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है जिसका नाम पूनम है।
1,,,, रामदेवी,,,,, पूनम की मम्मी है,, जौकी दिखने में ठीक-ठाक ही है,,,, भरा हुआ बदन बस थोड़ा सा मोटी है बाकी इस उम्र में भी मर्दों के पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम है। मर्दों को आकर्षित करने लायक बड़ी बड़ी गोल चूचियां हां बस थोड़ा सा लटक सी गई है,,,,, बड़ी बड़ी गांड जो कि हमेशा थिरकते रहती है।

2,,,,, संध्या,,,,, पूनम की छोटी चाची,,,,, बेहद खूबसूरत एकदम गोरा रंग लाल लाल हॉठ,,, तनी हुई चुचीयां और उभरी हुई भरावदार गांड जिसे देखते ही सब का लंड खड़ा हो जाता था। 

3,,,,, रितु चाची यह पूनम की सबसे छोटी चाची थी। एकदम मॉर्डन टाइप की उसके बदन पर चर्बी का कहीं भी नामोनिशान नहीं था,,,, कपड़े भी एकदम स्टाइलिस पहनती थी।

4,,,,,, सुजाता,,,,,, यह पूनम की बुआ थी जो की उम्र में पूनम से बस 5 साल ही बड़ी थी,,,, अभी तक शादी नहीं हुई थी लेकिन शादी की बात चल रही थी,,,,, सुजाता चुदास से भरी हुई थी लेकिन अभी तक उसने अपनी बुर में लंड डलवा कर उसका,,, अपनी जवानी का उद्घाटन नहीं करवाई थी।
इस कहानी के कुछ मुख्य किरदारो का उल्लेख यहां हो चुका है लेकिन अभी भी बहुत से किरदार आने बाकी है इसलिए उन कीरदारों से कहानी के अंतर्गत ही मुखातिब हो पाएगे,,,,,

अब कहानी का अपडेट जल्द ही देने की पूरी कोशिश करुंगी पर मुझे उम्मीद है कि आप लोग अपने कमेंट से मेरी इस कहानी को जबरदस्त रिस्पांस देंगे

धन्यवाद।
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Shivani Sharma Offline
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#2
21-02-2018, 02:35 PM
यह कहानी हे एक छोटे से गांव की गांव ज्यादा भी छोटा नहीं था सुख सुविधाओं के सारे सामान उस गांव में मौजूद थे।

पंछियों ने कलर मचाना शुरु कर दिया था,,,, पंछियों की सु मधुर आवाज से गांव की सुबह का नजारा और भी ज्यादा बेहतर हो गया था। पक्षियों की आवाज और मुर्गे की बांग की आवाज सुनते ही गांव के लोग धीरे-धीरे कर के बिस्तर छोड़ना शुरू हो जाते थे,,,,, सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ते ही लगभग पूरा गांव आलस मरोड़ कर अपने अपने कामकाज में लग जाया करता था,,,, और यही उनकी दिनचर्या भी होती थी ऐसे ही रोज की ही तरह रमा देवी अपने कमरे से बाहर आते हुए,,,,, अपनी बेटी को जोर जोर से आवाज लगाकर बुलाने लगी,,,,,

पूनम,,,,,,,,ओ पूनम,,,,,,,, अरे धूप निकलने को आई है और यह लड़की है कि अभी तक सो रही है,,,,,, ना जाने इसे कब अक्ल आएगी इतनी बड़ी हो गई है लेकिन किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का एहसास नहीं है,,,,।

( रमा देवी को इस तरह से रोज की ही तरह चिल्लाते देख कर संध्या जोकि पूनम की चाची थी वह झाड़ू लगाते लगाते,, बोली,, घर बहुत बड़ा था घर में सब के अलग-अलग कमरे बने हुए थे मेहमान के लिए भी अलग कमरा बना हुआ था और घर का आंगन भी काफी बड़ा था जिसमें रोज साफ सफाई करके झाड़ू लगाना पड़ता था और ज्यादा तर यह काम संध्या ही करतीे थी। आंगन के चारों तरफ दीवार खड़ी करके एक घेरा सा बनाया हुआ था। आंगन के सामने ही बड़ा सा तबेला बना हुआ था जिसमें गाय भैंस बंधी हुई थी। संध्या झाड़ू लगाते लगाते बोली) 

क्या दीदी आप भी सुबह-सुबह नन्हीं सी जान पर इतना बरस रही है।

नन्ही सी जान नहीं वह तों शैतान की नानी है। स्कूल जाना है सूरज निकल गया लेकिन यह लड़की अभी तक उठी नहीं है।

( रमा गुस्सा दिखाते हुए बोली और रमा की बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोली,,,,)


दीदी बेवजह आप परेशान हो रही हैं पूनम तो न जाने कब से उठ चुकी है और इस समय लगभग नहा रही होगी,,,,,,

( संध्या की बात सुनकर रमा देवी को थोड़ा सुकून मिला और वह चिंता के भाव दर्शाते हुए संध्या से बोली,,,)

संध्या तू भी उसको कुछ सिखाओ वरना अभी भी वह बच्चों जैसा ही बर्ताव करती है मेरी तो एक नहीं सुनती तुम्हारी ही बात मानती है इसलिए थोड़ा-बहुत उसे डांटा फटकारा करो,,,

दीदी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए पूनम मेरी बेटी जैसी है और मुझे अच्छे से पता है कि उसे कैसे संभालना है आप जाइए वहं अपने समय पर ही तैयार हो जाएगी,,,,,

( रामादेवी संध्या की बात सुनकर आश्वस्त हो कर चली गई,,,, संध्या पूनम की बड़ी चाची थी जो की चाची का एक दोस्त की तरह ज्यादा रहती थी बेहद खूबसूरत गोल मटोल चेहरा बड़ी बड़ी आंखें गुलाबी होठ,, सुबह सुबह उठने की वजह से बाल थोड़े अस्त व्यस्त थे जो कि बालों की लटे चेहरे पर आती थी जिसकी वजह से संध्या की खूबसूरती में चार चांद लग जाते थे। बड़ी बड़ी चूचियां जोकी ब्लाउज में शमा नहीं पाती थी और बैठ कर झाड़ू लगाने की वजह से चूची का आधे से भी ज्यादा भाग साफ तौर पर नजर आता था। ब्लाउज के दो बटन खुले हुए थे जाहिर था कि रात में संध्या के पति ने संध्या के ब्लाउज खोलकर उसकी बड़ी बड़ी चूचियो को मुंह में भर कर पिया होगा,,, और जी भर कर दोनों खरबूजे से खेल कर निश्चित तौर पर उसकी जमकर चुदाई भी की होगी,, क्योंकि संध्या चलते समय थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी ऐसा तभी होता था जब रात भर संध्या अपने पति से चुदवाती थी। वैसे भी घर का सारा काम काज करते हुए संध्या थक जाती थी लेकिन रात को अपने पति के साथ चुदवा कर अपनी सारी थकान मिटा लेतीे थी। सुबह काम करने की जल्दबाजी में शायद वह ठीक से अपने ब्लाउज के बटन बंद करना ही भूल गई थी इसलिए उपर के दो बटन खुले रह गए थे,,, जिसमें से संध्या के दोनों कबूतर फड़फड़ाते हुए नजर आ रहे थे। संध्या अधिकांश तौर पर बैठे-बैठे ही झाडू लगाया करती थी जब जल्दी झाड़ू लगाते हुए आगे पाव करके आगे की तरफ बढ़ती थी तो उसका पिछवाड़ा,,,, कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल कर उभर जाता था,,, और देखने वालों की तो सांस ही अटक जाती थी। कुल मिलाकर संध्या के बदन में जवानी कूट कूट कर भरी हुई थी।

रमा देवी का पूनम के प्रति चिंतित रहना लाजमी था क्योंकि वह अक्सर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह ही नजर आती थी उसके स्कूल का समय हो रहा था लेकिन इस समय वह बाथरुम में थी। बाथरूम में घुसते ही वह दरवाजे की कड़ी लगाकर दरवाजे को बंद कर ली,,,।

पूनम नहाने के लिए बाथरुम में प्रवेश कर के अंदर से बाथरूम की कड़ी लगा दी,,,, वह मन ही मन में कोई प्यारा सा गीत गुनगुनाते हुए अपने गले पर से दुपट्टा उतार कर पास में ही डोरी पर लटका दी,,,, वाह दुपट्टा दूरी पर लटकाने के बाद अपनी ड्रेस को नीचे से ऊपर की तरफ ले जाते हुए इतनी गोरी गोरी बाहों में से होते हुए ड्रेस को भी निकाल दि। उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उस स्कूल जाने के लिए उसे देरी हो रही है इसलिए जल्दी-जल्दी अपनी ब्रा के हुक को भी अपने हाथ को पीछे की तरफ ना कर खोल दी और अगले ही पल ब्रा को भी अपने बदन से अलग कर दी,,,,, ब्रा के अलग होते ही उसके छोटे छोटे नारंगी अपने पूरबहार मौसम को दिखाने लगे थे,,, ऊसकीे छोटी-छोटी और गोल नारंगीयो को देखकर साफ मालूम पड़ रहा था कि पूनम के बदन में अब जवानी चिकोटी काटने लगी थी । कब उसने सलवार की डोरी को खोल कर सलवार को उतार फेंकी पता ही नहीं चला,,, उसके बदन पर मात्र अब पेंटिं रह गई थी,,, जिसे अगले ही पल उंगलियों का सहारा लेकर धीरे-धीरे सरकाते हुए अपनी लंबी गोरी टांग से बाहर निकाल फेंकी,,,,। इस समय बाथरूम में वह संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र हो गई थी,,,, वैसे तो वह जब भी कुएं या हेड पंप पर नहाती थी तो पूरी तरह से अपने कपड़े नहीं निकालती थी लेकिन जब भी वह बाथरूम में नहाती थी तब एकदम नंगी होकर ही नहाती थी। इस तरह से उसे नहाने में बेहद मजा भी आता था क्योंकि बाथरूम के अंदर पूरी तरह से नंगी होकर नहाने में वह अपने बदन के कोने कोने पर साबुन लगा कर नहा पाती थी। इसलिए उसे नहाने में संपूर्ण संतुष्टि का एहसास होता था।
पूनम अपने सारे कपड़े उतार कर नहाना शुरू कर दी ठंडा पानी उसके बदन पर पड़ते हीैं उसका बदन पूरी तरह से गनगना जा रहा था। लेकिन ठंडे पानी में नहाने का सुकून; वह अपने बदन में पूरी तरह से अनुभव करती थी। ठंडा पानी उसके सिर पर पड़कर नीचे की तरफ किसी मोतियों की तरह फिसलते हुए जा रहा था,,,, उसकी गोल गोल चूचियों से होकर के ऊसके चिकने सपाट पेट से होकर के नाभी से गुजर कर पूनम की चिकनी जांघों के बीच से उस पतली सी दरार से होकर नीचे की तरफ गिर रही थी। यह नजारा सामान्य नहीं था बल्कि बड़ा ही उन्मादक और कामोतेजक था। पूनम के लिए तो इस तरह से नहाना बेहद सामान्य सी बात थी लेकिन पूनम को इस तरह से नहाते हुए किसी का देख लेना ही उसकी जिंदगी का बड़ा ही अमूल्य और उत्तेजक क्षण होगा। वैसे भी अक्सर लड़के जो आदमी लड़कियों और औरतों के अंगों को देखने का बहाना ही ढूंढते रहते हैं और ऐसे में अगर उनके सामने उनकी नजरों के सामने पूनम जैसी खूबसूरत लड़की संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था में,,, जोकि एकदम गोरी खूबसूरत चिकने बदन वाली,,, और मर्दों की कामोत्तेजना का सबसे उत्तेजक प्रसार बिंदु उसकी दोनों गोलाइयां अपना संपूर्ण रूप लिए नजर आ रही हो, और नितंब जो कि ऐसा लगे कि कुदरत ने खुद किसी कैनवास पर अपनी जादुई पींछी से अंगों को ऊभारकर कर उस में रंग भरे हो,, जिसके बदन का हर कटाव एक अलग ही परिभाषा लिखता हो ऐसी लड़की को देखकर किसी भी मर्द का मन डोल जाए और देखने भर मात्र से ही कब उसका मर्दाना अंग ऊथनात्मक स्थिति में आकर कब पानी छोड़ दे शायद उसको भी पता ना चले,,,, पूनम अद्भुत खूबसूरती का खजाना थी।

देखते ही देखते उसने स्नान कर ली,,,, और नहाने के बाद जैसे ही उसने टॉवल लेने के लिए हाथ बढ़ाई तो उसे ज्ञात हुआ कि उसने तो बाथरूम में टॉवर लाना ही भूल गई थी।
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Shivani Sharma Offline
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#3
21-02-2018, 02:39 PM
अपनी इस गलती पर उसे फिर से गुस्सा आया क्योंकि ऐसी गलती अक्सर वह बार बार करती थी। पहले की ही तरह उसनें धीरे से बाथरूम का दरवाजा सिर्फ इतना भर खोली कि उसका चेहरा दिखाई दे,,,,, और फिर आदत के अनुसार अपनी छोटी वाली चाची को आवाज लगाने लगी जो की रसोई घर में चाय बना रही थी पूनम की आवाज सुनते ही वह समझ गई कि आज फिर से वह बाथरुम में टावल ले जाना भूल गई है। अक्सर वह पूनम को टावल दे दिया करती थी लेकिन आज उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और वह मुस्कुरा कर रसोई घर से बाहर आई। वह आकर बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी हो गई जिसमें से पूनम सिर्फ अपना चेहरा भर दिखा रही थी अपनी चाची को देखते ही वह बोली।

प्लीज प्लीज प्लीज,,,,, चाची मुझे टॉवेल दे दो मुझे स्कूल जाने में बहुत देर हो रही है। 

नहीं आज तो मैं तुम्हें बिल्कुल भी टॉवल नहीं दूंगी तुम्हारी यह रोज की आदत हो गई है। ( इतना कहने के साथ ही वह बाकी लोगों को भी आवाज देकर बुलाने लगी।)

संध्या दीदी जल्दी आओ सुजाता देखो तो सही अगर तुम्हें आज असली फिल्म देखनी है तो जल्दी आ जाओ,,,,,, आज बहुत ही बेहतरीन फिल्म देखने को मिलेगी,,,,,,

( अपनी ऋतु चाची की बात सुनते ही पूनम के चेहरे पर बनावटी गुस्सा नजर आने लगा,,, और दूसरी तरफ रितु की आवाज सुनकर संध्या और सुजाता भी आ गई बाथरूम का दृश्य देखकर उन लोगों को समझते देर नहीं लगी कीयहां क्या चल रहा है। अपनी जेठानी और ननद को वहां आया देखकर रितु बोली।)

दीदी आज देखना तुम्हें असली फिल्म देखने को मिलेगी आज पूनम फिर से बाथरुम में टावल ले जाना भूल गई है। और आज पूनम खोल हम लोगों को अपने नंगे बदन का दर्शन कराएगी। ( अपने रीति चाची की बात सुनकर पूनम को गुस्सा आने लगा वह जानती थी कि आज यह लोग मजा लेना चाहते हैं और उसे स्कूल जाने के लिए देर भी हो रहा था,,, इसलिए वहां ऋतु चाची को छोड़कर अपनी संध्या चाची से बोली।)

प्लीज चाची आप दे दो ना मुझे बहुत देर हो रही है मजाक का समय नहीं है। 

( पूनम की बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोली।)

नहीं पूनम आज तो हम लोग तुम्हारी एक भी नहीं सुनने वाले और ना ही तुम्हारी कोई मदद करने वाले हैं।


क्या चाची आप भी,,,,,( पूनम बाथरूम के दरवाजे में से हल्का सा अपना चेहरा बाहर निकाल कर और बड़े ही मासूम बनकर पत्नी संध्या चाची से बोली,,,, लेकिन उसके इस मासूम पन का किसी पर भी कोई असर नहीं हुआ और उसकी संध्या चाची बोली।)

नहीं पूनम आज तुम्हारे किसी भी बात का हम पर कोई असर होने वाला नहीं है भलाई इसी में है कि आज तुम अपने नंगे पंन का दर्शन हमें करा ही दो हम भी तो देखें कि तुम जितनी बाहर से खूबसूरत लगती हो अंदर से कितनी खूबसूरत दीखती हो।,,,,, 

क्या चाची आप लोग भी,,,, क्या तुम्हें अच्छा लगेगा अगर तुम मुझे ऐसी हालत में देखोगी तो,,,,,

हां मेरी रानी बिटिया हमें अच्छा लगेगा अब बिल्कुल भी देर मत करो और बाहर आ जाओ हम लोग भी तरस गए हैं तुम्हें नंगी देखने के लिए तुम्हारे खूबसूरत भरावदार नितंब को देखने के लिए।

( पूनम को स्कूल जाने के लिए देर हो रहा था किसी भी वक्त उसकी सहेलियां घर पर आ सकती थी और जिस तरह की जीद आज उसकी दोनों चाची को नहीं लगा रखी थी उन्हीं के सू्र में उसकी सुजाता बुआ भी सुर लगा रही थी उन्हें भी आज उसे नंगी देखने का नशा चढ़ चुका था थक हारकर पूनम फिर से उन लोगों को समझाते हुए बोली।)

चाची क्यों ऐसी जिद कर रही हो क्या देखना चाहती हो मेरे पास भी वही है जो कि तुम लोगों के पास है फिर ऐसी जिद्द क्यों? ( पूनम बहुत ही भोलेपन में बोली)

हां मेरी पूनम रानी हम लोगों के पास जिस तरह के अंग है तुम्हारे पास भी वही सब है,,,, लेकिन अब तुम्हारे जैसी कड़क माल हम लोग नहीं रह गए हैं,,,,,( संध्या की इस बात पर उसकी रितु चाची हंसने लगी और साथ में उसकी सुजाता बुआ भी हंसने लगी,,,, पूनम समझ गई कि आज उसे लगता है कि इन लोगों के बीच उसे एकदम नंगी ही अपने कमरे में जाना होगा,,,,,, उसका कमरा बाथरूम के ठीक सामने ही तीन चार कदम की ही दूरी पर थे,,, लेकिन यह तीन चार कदम उसे मीलों से कम नहीं लग रहे थे। वह बिना कपड़ों के ही अपने कमरे में जाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर ली वह बाहर कदम बढ़ाने ही वाली थी और बाहर खड़ी उसकी चाची और बुआ उसे एकदम नंगी देखने का इंतजार ही कर रहे थे कि तभी उसे याद आया कि वह दुपट्टा ओढ़़ कर आई थी। यह ख्याल आते ही उसकी आंखों में चमक नजर आने लगी,,, और वह तुरंत पलटी और बाथरूम में जाकर दुपट्टे को अपनी चूचियों से होकर के लपेट ली जोकि दुपट्टा ज्यादा बढ़ा तो नहीं था लेकिन फिर भी उसके नितंबों को ढक ले रहा था। पूनम अपने दुपट्टे को इंसान से बांधकर बाथरुम के बाहर अपना कदम बाहर निकाली और उसे बाहर आता देखकर उसकी दोनों चाचियां और बुआ के चेहरे पर मुस्कान फेलने लगी,,, वह लोग केवल पूनम की नंगी टांग ही देखे थे और उन्हें लगने लगा था कि आज सचमुच पूनम को पूरी तरह से नंगी देखने का सुख प्राप्त कर लेंगी लेकिन तभी

पुनम अपने चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए बाथरुम से बाहर आने लगी,,, उसके बदन को दुपट्टे से ढका हुआ देखकर उन लोगों के चेहरे उतर गए और उन लोगों का उतरा हुआ चेहरा देखकर पूनम जोर-जोर से उन्हें चिढ़ाते हुए हंसने लगी,,,,, क्योंकि उन लोगों को पूनम का जो अंग देखना था वह तो पूरी तरह से दुपट्टे से ढंका हुआ था,,, और बस चिकनी जांघे और गोरी लंबी टांगें ही नंगी नजर आ रही थी,,,, इसलिए उन लोगों के चेहरे पर निराशा फैल गई,,,,, लेकिन जैसे ही पूनम उन लोगों से आगे निकली,,,, कि तभी तीनो की नजर उसकी पीठ की तरफ से होती हुई कमर के नीचे की तरफ गई तो उन लोगों की आंखें पूनम के पीछे का नजारा देखकर फटी की फटी रह गई और वह लोग जोर जोर से हंसने लगी,,, उन लोगों को हंसता देखकर पूनम को कुछ समझ में नहीं आया कि आखिर यह लोग हंस क्यों रही हैं। वह अपने कमरे के करीब पहुंच चुकी थी लेकिन उन लोगों को हंसता हुआ देखकर उसने नजर घुमाकर उन लोगों को देखी तो उन लोगों की नजर उसके पिछवाड़े पर टिकी हुई थी और वह लोग जोर जोर से हंस रही थी। जैसे ही पूनम की नजर नीचे की तरफ अपने नितंबों पर गई तो ऊसे अपनी गलती का एहसास होते ही वहां जल्दी से अपने कमरे में चली गई और जल्दी से दरवाजा बंद कर दी,, कमरे के अंदर पहुंचकर अपनी गलती पर उसे भी हंसना आ गया,,,, क्योंकि दुपट्टा का कपड़ा एकदम पतला था और उसका बदन पूरी तरह से पानी में भीगा हुआ था जिसकी वजह से जैसे ही वह दुपट्टे को अपने बदन पर लपेटी तो गीले बदन होने की वजह से वह दुपट्टे का पतला कपड़ा पूनम के नंगे बदन से एकदम चिपक सा गया,,,,, जो कि उसके भरावदार नितंबों को उभार कर प्रदर्शित करने लगा,,,,, जिसकी वजह से दुपट्टे से ढंकने के बावजूद भी उसके भरावदार नितंबों का उभार और कटाव एकदम साफ साफ गोरे रंग सहित नजर आ रहा था जिसको देखकर उसकी दोनों चाचिया और बुआ खिलखिलाकर हंस रही थी।
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Shivani Sharma Offline
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21-02-2018, 02:41 PM
pls comment on my story and like
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21-02-2018, 05:03 PM
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Shivani Sharma Offline
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21-02-2018, 06:34 PM
पूनम अपने कमरे में जा चुकी थी और अपनी ही बेवकूफी पर हंस रही थी। दरवाजे पर कुंडी लगाकर वह पूरी तरह से निश्चिंत हो गई अब वह कमरे में बिल्कुल अकेली थी।
उसे स्कूल जाने के लिए देर हो रही थी क्योंकि किसी भी वक्त उसकी सहेलियां घर पर आ सकती थी इसलिए वह तुरंत अपने बदन पर लिपटी हुई दुपट्टे को,,, जो कि उसका सारा भेद खुल चुका था उसे अपने बदन पर से हटा कर टेबल पर रख दी अब वह कमरे में बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसका गोरा बदन एकदम चमक रहा था लंबे लंबे घने बाल उसकी पीठ से चिपके हुए थे। उसमें से पानी की बूंदे किसी मोती के दाने की तरह फिसल कर नीचे गिर रही थी। पूनम के बाल थोड़ी ज्यादा ही लंबे थे इस वजह से आगे की तरफ भी उसकी दोनों चुचियों पर भी बल खा रहे थे। लेकिन चूचियों के गोलाई पर बालों की लट बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। चूचियों की छोटी-छोटी निप्पल अनार के दाने की तरह उभरी हुई अपनी खूबसूरती बिखेर रही थी। वह अपने बिस्तर के करीब गई और अपने बिस्तर को उलट पलट कर कुछ ढूंढने लगी,,,, उसके इस तरह से बिस्तर के नीचे ढूंढने से,,, वह थोड़ा झुक गई जिसकी वजह से इसकी तो भरी हुई गांड कुछ ज्यादा ही भरकर बाहर की तरफ दिखाई देने लगी चौकी बड़ी ही कामुकता से भरी हुई थी। इस वक्त वेदर को यह नजारा देख ले तो बिना कहे वह पूनम की कमर पकड़ कर उसकी गांड पर अपना लंड रगड़ने लगे। बिस्तर के नीचे से तभी उसने अपनी पैंटी निकाली और उसमें एक के बाद एक करके अपने दोनों पांव डालकर पहनने लगी,,,,,, धीरे-धीरे वह अपनी पैंटी को ऊपर की तरफ सरकाते हुए,,, जांघों तक ले आई और एक नजर उनसे अपनी जांघों के बीच की पतली दरार पर डाल कर मुस्कुरा दी,,,,, उसकी मुस्कुराहट में एक वजह थी क्योंकि उसकी पतली दरार के इर्द-गिर्द हल्के हल्के बाल आना शुरू हो गए थे। वह मुस्कुराते हुए पेंटिं को पहन ली और उस अनमोल खजाने समान पतली दरार को पेंटिं के अंदर छुपा ली। पेंटी को पहनने के बाद उसकी बुर वाली जगह हल्की-हल्की पैंटी के ऊपर से भी उपसी हुई नजर आ रही थी। पूनम उसे बिस्तर के नीचे से अपनी ब्रा भी निकाल कर पहनने लगी और कुछ ही देर में उसकी दोनों नारंगीया भी ब्रा के अंदर कैद हो गई। वह बार-बार दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखे जा रही थी क्योंकि उस स्कूल का समय हो रहा था और अभी तक वह पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाई थी किसी भी वक्त उसकी सहेलियां घर पर तो हो सकती थी और वह इसी जल्दबाजी में जल्दी-जल्दी अपने स्कूल का ड्रेस पहनने लगी। अभी वह स्कूल के कुर्ते को अपने सिर में डाल कर पहनना शुरू की थी कि तभी घर से बाहर उसकी सहेलियों की आवाज आने लगी जोंकि उसे ही पुकार रही थी। 

पूनम,,,,, ओ,,,,,,,,,पूनम आज फिर देर से स्कूल पहुंचना है क्या जल्दी कर,,,, तैयार हुई कि नहीं,,,,,,

अरे,,,,,,, आई बस दो मिनट खड़ी रहे,,,,,, ( पूनम स्कूल के ड्रेस को पहनते हुए बोली,,,,,, )

हे भगवान लगता है आज फिर देर हो गई है जल्दी करो वरना सच में टीचर की डांट खाना पड़ेगा,,,( पूनम मन ही मन में बड़बड़ाते हुए अपनी सलवार आलमारी से निकाल कर कहने लगी सलवार कहने के बाद जल्दी-जल्दी अपने बालों को संवार कर वह तैयार हो गई,,,,। वह जल्दी से टेबल पर से स्कूल बैग उठाई और जाते जाते एक बार आईने में अपने चेहरे को देखने लगी और आईने में अपने चेहरे को देख कर मुस्कुरा दी क्योंकि बला की खूबसूरत लग रही थी वह,,,,,

दरवाजा खोलकर जल्दी बाहर आई ओर सैंडल पहन कर जैसे ही जाने को हुई कि पीछे से उसकी संध्या चाची आवाज़ लगाई,,,,

अरे कहां चली रुक,,,,, जब देखो तब सुपरफास्ट की तरह कहीं भी निकल जाती है।

क्या हुआ चाची स्कूल जाने में मुझे देर हो रही है। 

अरे पगली स्कूल जाने से पहले कुछ नाश्ता तो कर ले क्या खाली पेट स्कूल जाएगी,,,,

नहीं चाहती मुझे देर हो रही है अगर नाश्ता करने बैठूंगी तो स्कूल में टीचर की डांट सुननी पड़ेगी,,,,

अच्छा रुक यह दुध तो पी ले,,,,, ( इतना कहकर वह खुद अपनी जगह से उठकर दूध का गिलास लेकर पूनम के पास आई और पूनम को दूध का गिलास थमाते हुए बोली।)

कुछ खाया पिया कर वरना ऐसे ही हड्डी कि तरह जाएगी,,, 

चाची मुझे मोटी नहीं होना है मैं ऐसे ही ठीक हूं। ( दूध का गिलास जानते हुए बोली और एक ही सांस. में पूरा दूध पी गई,,,, दूध पीकर वह अपनी चाची को गिलास थमाते हुए बोली।)
तुम बहुत अच्छी हो चाची तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो,,,,

अच्छा अब स्कूल जा तेरी सहेलियां इंतजार कर रही है। ( संध्या मुस्कुराते हुए बोली और पूनम संध्या को बाय बोल कर घर के बाहर आ गए जहां पर उसकी दोनों सहेलियां थोड़ा गुस्से में उसका इंतजार कर रही थी।)

यार तू हमेशा लेट हो जातीे हैं,,, करती क्या रहती है,,,,,,,,,,,,,,,, तू काम भी तो नहीं करती बस उठकर नहाने धोने में तुझे इतना समय बीत जाता है कि रोज तु हमसे इंतजार करवाती है और स्कूल में डांट सुनवाती है वह तो अलग,,,,,,

बस कर मेरी अम्मा इतना तो मेरी मां भी मुझे नहीं बोलती हे जितनां तू सुना दे रही है। ( इतना कहकर वह तीनों स्कूल की तरफ जाने लगे बेला और सुलेखा यह दोनों पूनम की सहेलियां थी जोकि उसके घर के बिल्कुल करीब ही रहती थी दोनों पूनम की हम उम्र होने के कारण,,, और एक ही क्लास में पढ़ने की वजह से पक्की सहेलियां बन चुकी थी। अक्षर वालों ने इसी तरह पर पूनम के घर पर आकर उसका इंतजार कर के तीनों साथ में ही स्कूल जाते थे। 

यार कल के मैथ्स में तो मुझे कुछ भी समझ में ही नहीं आया ना जाने मुझे मैथ्स में क्यों इस तरह की परेशानी हो जाती है (चलते चलते बेला पूनम से बोली,,,,)

अरे तू चिंता मत कर मुझे सब कुछ आता है मैं तुझे समझा दूंगी तुझे तो आता है ना सुलेखा,,,,( ऊंची नीची पगडंडियों पर जल्दी जल्दी पैर बढ़ाते हुए पूनम बोली।)

नहीं यार मुझे भी कुछ समझ में नहीं आया था। ( सुलेखा चिंतित स्वर में बोली।)

चल कोई बात नहीं मैं तुम दोनों को समझा दूंगी और वैसे भी तुम दोनों पढ़ाई लिखाई में ज्यादा ध्यान देते हो नहीं इसलिए तुम लोगों को इस तरह की तकलीफे झेलनीं पड़ती है।

( तीनों आपस में बातें करते हुए ऊंची नीची पगडंडियों से होते हुए चली जा रही थी उस स्कूल के तरफ की सड़क कुछ खास ठीक नहीं थी रास्ता बहुत ही सच्चा था लेकिन रास्ते के अगल-बगल पेड़ पौधों की वजह से सड़क बहुत ही नयनरम्य लगती थी। और ऊंची नीची पगडंडियों पर पूनम जैसे जैसे अपने कदम रखतीे थी,,,, वैसे वैसे उसकी भरावदार नितंब ऊंची नीची सड़क की वजह से मटक जा रही थी। पूनम के पीछे आने वाले हर व्यक्ति की नजर वह चाहे बूढ़ा हो या जवान उन लोगों की नजर हमेशा पूनम की मटकती हुई गांड पर ही टिकी रहती थी।,,,, पूनम की दोनों सहेलियों को भी पूनम बहुत अच्छी लगती थी इसलिए तो वह हमेशा उसके साथ ही रहतेी थी। अक्सर यह सड़क लगभग सुनसान ही रहती थी हमेशा इक्का-दुक्का ही लोग आते-जाते नजर आते थे,,,, क्योंकि गांव भी ज्यादा बड़ा नहीं था। 
ठंडी ठंडी हवा वातावरण को और भी ज्यादा खुशनुमा कर रही थी। शीतल पावन के साथ-साथ पूनम के रेशमी बाल भी हवा में लहरा रहे थे बार बार बालों की लटे गोरे गाल को चूमते हुए पूनम के साथ अठखेलिया कर रही थी। पूनम बार-बार अपनी उंगलियों का सहारा लेकर बालों के रेशमी लोगों को अपने कान के पीछे कर दे रही थी। पूनम की ये हरकत भी अपने आप में बड़ी हूं खूबसुरत थी। पूनम की इसी अदा पर तो सारा स्कुल फीदा था। 
पूनम अपनी सहेलियों के साथ लंबे-लंबे कदम भरते हुए चली जा रही थी,,,, सड़क के आगे ही एक मोड़ आता था जहां पर एक लड़का खड़ा होकर किसी का इंतजार कर रहा था। पूनम उसकी तरफ गौर किए बिना ही आगे निकल गई लेकिन वह लड़का पूनम को देखता है और वही खड़ा रहा और फिर जब वह देखा कि पूनम और उसकी सहेली आगे निकल गई है तो वह भी पीछे पीछे चल दिया,,,,,
पूनम अक्सर उस लड़के को वहीं खड़ा पाती थी लेकिन कभी भी उसके बारे में अपनी सहेलियों से कुछ पूछ नहीं पाए उसका इस तरह से वहां खड़ा रहना बड़ा अजीब लगता था।
लेकिन आज उससे रहा नहीं गया तो वह अपनी सहेली से बोली। 

यार बेला इस लड़के को अक्सर मैं यही खड़े हुए देखती हूं ऐसा लगता है जैसे किसी का इंतजार कर रहा हो,,,,,

हां यार मैं भी तो उसको यही रोज देखती हूं,,,,( सुलेखा भी पूनम के सुर में सुर मिलाते हुए बोली।)

यार यूनिफार्म तो अपने ही उस स्कूल की है लेकिन इस लड़के को कभी मैंने अपने स्कूल में देखी नहीं। ( पूनम कुछ ख्याल करते हुए बोली लेकिन इन सब की बातें सुनकर बेला मुस्कुरा रही थी और उस लड़के का राज खोलते हुए बोली,,,)

तू पूनम सच में इस लड़के को नहीं जानती,,,,,? 

नहीं तो,,,,, मैं भला इसे जानकर क्या करूंगी। 

यार पूनम क्या तुम सच में इस लड़के को नहीं जानती?( बेला आश्चर्य जताते हुए बोली।)

बिना तू पागल हो गई है क्या ऐसे क्यों पूछ रही है मैं गंगा इस लड़के को जानकर क्या करुंगी कि कौन है कहां से आता है क्या करता है?( पूनम थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

यार पूनम यह मनोज है मनोज इसके पीछे स्कूल की सारी लड़कियां दीवानी रहती है,। ( बेला चहकते हुए बोली।) तुझे पता है इस से दोस्ती करने के लिए लड़कियां आगे से चलकर उसके पास जातीे हैं। 

अच्छा ऐसी क्या खास बात है,,ऊसमे,,,, 

अरे यार देखी नहीं कितना हैंडसम है वो। 

चल जाने दे अपने से क्या लेना-देना,,,, वहां खड़ा रहता है तो खड़े रहनै दो,,,, लेकिन एक बात समझ में नहीं आ रही है कि वह वहां खड़ा रह कर किसका इंतजार करता रहता है,,,,
(पूनम की बात सुनकर बेला जोर से हंसते हुए बोली।) 

मैं बताऊं कि वहां क्यों खड़ा रहता है किसका इंतजार करता रहता है?

हां बता,,,,

लेकिन पहले वादा करो कि तुम मुझसे नाराज नहीं होगी और ना मुझ पर गुस्सा करोगी तभी मैं बताऊंगी।

चल अच्छा बता मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगी,,,( कुछ सोच कर थोड़ी देर बाद बोली।) 

वह लड़का उस मोड़ पर खड़ा होकर तेरा ही इंतजार करता रहता है। 
( बेला की है बात सुनकर पूनम का दिल धक से कर गया,,,,)
जानती है तू पूनम वह तुझे बहुत पसंद करता है। तेरा दीवाना
हो गया है वो,,,,,

( बेला की यह बात सुनकर पूनम की हालत खराब होने लगी उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि बेला क्या कह रही है लेकिन इस बात से उसे बहुत गुस्सा आया,,,,, वह गुस्सा करते हुए बेला से बोली,,,,,)

बेला तुझे कुछ पता भी है कि तू क्या कह रही है तू अच्छी तरह से जानती है कि इन सब बातों से मेरा कोई वास्ता नहीं है।

अरे मैं जानती हूं कि तेरा वास्ता नहीं है लेकिन लड़कों का क्या,,,,, उन्हें कैसे रोक सकती है तू,,,,,, वह तो तुझे मन ही मन चाहने लगा है। पागल हो गया है तेरी खूबसूरती को देखकर तभी तो पागलों की तरह उस मोड़ पर खड़ा होकर तेरा इंतजार करता रहता है।


तुझे यह सब कैसे मालूम,,,,,,, तुझे यह कैसे मालूम की वह मेरा ही इंतजार करता रहता है,,,, हो सकता है कि तुझे गलतफहमी हो रही हो। ( पूनम शंका जताते हुए बोली।)

पूनम तू सच में बुद्धू है । तू देखती नहीं है कि वह कैसे तुझे ही घूरता रहता है,,,, तेरा इंतजार करता रहता है,,, जैसे ही तू सड़क पर नजर आती है उसके चेहरे की खुशी बढ़ जाती है।
और जैसे ही तू आगे बढ़ती है कि वह भी पीछे पीछे चला आता है और तुझे यकीन नहीं आता तो देख लो पीछे मुड़कर वह आता ही होगा,,,,,
( बेला की इस बात पर वह अपनी नजरें पीछे घुमा कर देखी तो सच में वह पीछे-पीछे उसी को ही घूरता हुआ चला रहा था। पूनम को अब गुस्सा आने लगा था लेकिन वह अपने गुस्से को छिपाकर स्कूल की तरफ बढ़ी जा रही थी। उसे लड़कों का इस तरह से पीछे घूमना अच्छा नहीं लगता था। पूनम के चेहरे पर गुस्सा था और बेला उसके चेहरे की तरफ देखते हुए बोली।

अब तो यकीन हो गया ना कि तुझे यह किसका दीवाना है।
( बेला कि ईस बात पर पूनम आंखें तरेरते हुए उसे देखने लगी वह कुछ उसे बोल पाती इससे पहले ही स्कूल आ गया। और वह कुछ बोल नहीं पाई।
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Shivani Sharma Offline
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21-02-2018, 06:39 PM
स्कूल में पूनम का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लग रहा था। उसे बड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था। उसके सामने कभी भी आज तक ऐसी स्थिति नहीं आई थी। क्योंकि पूनम इन सब चपेड़ो में कभी पड़ती ही नहीं थी। वह बेहद भोली भाली और सीधी सादी थी प्यार व्यार की बातों से कोसों दूर रहती थी हालांकि स्कूल के कई मनचले लड़कों ने उसके सामने अपने दिल की बात रखनी तो चाही लेकिन वह किसी को भी जरा सा भी भाव नहीं दि। घर में पहले से ही उसके पापा और उसके चाचाओ ने सख्त हिदायत दे रखी थी कि अगर कभी भी उसका नाम बाहर ही लड़कों से जुड़ा प्यार व्यार के चक्कर में वह पड़ी तो उस दिन भूल जाएंगे कि वह उसकी लड़की है। तब से तो पूनम के मन में और भी ज्यादा डर गया था कि कहीं कोई भूल से भी उसे कुछ बोल ना दे इसलिए तो वह स्कूल से सीधा घर और घर से सीधा स्कूल आती जाती थी लेकिन आज उसका मन परेशान हो चुका था। बेला ने ही उसे बताई थी की उस लड़के का नाम मनोज है क्योंकि लड़कियों में काफी मशहूर है। क्योंकि वह काफी हैंडसम लगता था कद-काठी गोरा रंग एक लड़की को जिस तरह का बॉयफ्रेंड चाहिए था वह सारी खूबियां उसके मे थी,,,, और अपनी ईन्ही खूबियों की बदौलत उसने काफी लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बनाया और अपना मतलब निकल जाने पर उसे छोड़ दिया,,,,, काफी दिनों से उसकी नजर पूनम पर थी उसकी खूबसूरती उसकीे सादगी उसके चेहरे का भोलापन,,, उसे भा गया था और वह उसके पीछे लग गया था।दीन रात उठते बैठते हमेशा उसकी आंखों के सामने बस पूनम का ही चेहरा नाचता रहता था,,, इसलिए वह पूरी तैयारी के साथ पूनम के पीछे पड़ गया था लेकिन काफी दिनों से उसे बिल्कुल भी कामयाबी नहीं मिल रही थी हालांकि वह पूनम से बात करने के लिए उसकी सहेली बेला और सुलेखा दोनों को पटा रखा था। सुलेखा तो पहले से ही मनोज की दीवानी थी लेकिन मनोज ताकि उसे जरा भी भाव नहीं देता था जबकि बेला और सुलेखा अच्छी तरह से जानती थी कि मनोज किसी से भी दोस्ती करता है उसे अपने बिस्तर पर जरूर ले जाता है। और यह दोनों भी मनोज कितनी दीवानी थी कि सब कुछ जानते हुए भी उस से दोस्ती करने के लिए तड़पती थी,,, हां इतना भी था कि उमर के साथ साथ देना और जुलेखा की जांघो के बीच चीटियां रेंगना शुरू हो गई थी और वह दोनों तो अपनी बुर की खुजली मिटाने के लिए भी तैयार थी। मनोज केवल उन लोगों से बातचीत भर कर सके इतने से ही वह दोनों पूनम को मनोज से बात कराने का बहाना ढूंढ रही थी लेकिन पूनम के गुस्से को देखते हुए दोनों हमेशा बात को टाल जाती थी। लेकिन आज हिम्मत करके जब पूनम ने उस लड़के के बारे में पूछे तो वह सब कुछ बोलदी,,,, लेकिन पूनम को अपनी दोनों सहेलियों की बात पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था यही सब वह क्लास में बैठकर सोच रही थी। पूनम को इस तरह से ख्यालों में खोया हुआ देखकर बेला बोली,,,

क्या हुआ पूनम तुम पर भी उसके इश्क का जादू लगता है चढ़ने लगा है तभी तो उसके ख्यालों में खोई हुई हो,,,,,( वह पूनम को छेंड़ती हुई बोली। )

बकवास बंद कर बोला तुझे अच्छी तरह से पता है कि मुझे ऐसा बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और अगर यह बात मेरे घर वालों को पता चल गई तो मेरा जीना मुश्किल हो जाएगा इसलिए मैं परेशान हूं। 


क्यों डरती है पूनम अरे कुछ नहीं होगा आखिर वह तुझसे प्यार करने लगा है,,,।


तू खुद ही सीख प्यार की एबीसीडी मुझे नहीं सीखना,,,,,,

अरे यार तू तो नाराज होने लगी।

अब नाराज ना होऊ तो क्या करूं,,,,बात ही ऐसी है। बेला तुम नहीं जानती मेरे घरवालों को मुझ पर बहुत ज्यादा विश्वास है वह लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं कभी भी कोई भी गलत काम नहीं करूंगी, जिससे मेरे खानदान की बदनामी हो इसलिए मैं इन सब बातों से डरती हूं।

पूनम तू खाना खा चिंता करती है तू थोड़ी उसके पीछे पड़ी है वह पागल की तरह तेरे पीछे पड़ा है इसमें कौन सी बदनामी होगी जब तू आगे जाकर के उस से बात करेगी तभी ना किसी को पता चलेगा कि तुम दोनों के बीच में कुछ है तू ऐसा करेगी ही नहीं तो कितना भी तेरे पीछे पड़ जाए तुझे घबराने की जरूरत नहीं है।
( बेला अच्छी तरह से जानती थी कि अगर वह इस बात को ज्यादा तूल देगी तो पूनम खामखा बात का बतंगड़ बना देगी इसलिए वह उसे समझा बुझाकर हाथ झाँड़ने की कोशिश करने लगी,,, पूनम के चेहरे पर अभी भी परेशानी के भाव साफ नजर आ रहे थे लेकिन कुदरत ने पूनम को इतनी सादगी से बड़े ही फुर्सत से बनाया था की परेशानी की हालत में भी उसकी खूबसूरती निखरकर. आंखों को ठंडक देती थी। 
धीरे-धीरे करके कब समय गुजर गया इस बात का ख्याल पूनम को तब हुआ जब छुट्टी की घंटी बजने लगी। उसके मन में एक अजीब सा डर बन चुका था क्योंकि उसे पता था कि वह लड़का फिर से उसी जगह उसका इंतजार कर रहा होगा पहले तो उसके मन में उसके प्रति लेकर कोई भी भावना डर जैसा कुछ भी नहीं था लेकिन जब से बेला ने उस लड़के के बारे में उस को बताई थी तब से उसके मन में अजीब सा डर बैठ गया था। यह पूनम के लिए डर था लेकिन पूनम की जगह अगर कोई और लड़की होती तो उसके लिए यह मजा होता,,,, बेला और सुलेखा तो इस पल के लिए ना जाने कब से तड़प रही थी,,,,, खैर पूनम डर को अपने अंदर समेट ए अपनी दोनों सहेलियों के साथ बातें करते हैं अपने घर की तरफ चली जा रही थी लेकिन बार-बार पूनम की नजर रास्ते पर उसी को ढूंढ रही थी । और वैसा ही हुआ जैसा कि रोज होता था वह लड़का फिर से उसी मोड़ पर उसका इंतजार करता हुआ उसे दिखाई दे गया जैसे जैसे वह आगे बढ़ रही थी उस की दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी। पूनम नजरे झुका कर जल्दी-जल्दी चली जा रही थी लेकिन बार-बार उसकी नजरें अपने आप उसकी तरफ चली जाती थी जो कि वह पूनम को ही घूर रहा था। उसे यूं अपनी तरफ देखता हुआ पाकर उसका बदन पूरी तरह से गनगना जा रहा था। जैसे-जैसे उसके बीच की दूरी कम होती जा रही थी वैसे वैसे उसकी धड़कन तेज गति से दौड़ रही थी। मनोज बिना पलक झपकाए बस ऊसे ही एक टक देखे जा रहा था। उसकी आंखों से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पूनम के फुल से बदन का रस किसी भवरे की तरह धीरे धीरे करके निचोड़ता हुआ पी रहा हो। पूनम डर के मारे उसकी तरफ नजर नहीं बना पाई और तेज कदमों के साथ आगे बढ़ गई जब कुछ दूरी पर गई तो ना चाहते हुए भी वह पीछे मुड़ कर देखें लेकिन उस जगह पर अभी भी वहां खडे होकर उसे ही देख रहा था,,, पूनम उसे देखी तो मन में बड़बड़ाते हुए जाने लगी,,,,, 
पूनम को इस तरह से बड़बड़ाते हुए देखकर बेला मुस्कुराते हुए बोली।

क्या बेला क्यों उस बेचारे को तू इतना कोर्स रही है दिख नहीं रही कितना दीवानों की तरह तेरे आगे पीछे लगा हुआ है।
काश हम लोगों की भी किस्मत ऐसी होती,,,,,,


तो जा बोल दे लग जाएगा वह ं तेरे पीछे,,,,,( पूनम गुस्सा दिखाते हुए बोली।)

अरे बोल तो दूं लेकिन वह तो तेरा दीवाना होगा हम लोगों के पीछे कहां पड़ने वाला है। 

देख दिला सकती कुछ ज्यादा ही बक बक कर रही है हम लोग यहां पढ़ने आते हैं ना कि लड़कों के साथ मटरगस्ती करने और तुझे भी यही सब करना है तो पढ़ाई छोड़ दे लग जा इन लफंगों के पीछे,,,,,,


अरे यार तु तो नाराज हो जाती है।,,,

नहीं मैं तेरी पूजा करूं चल अब बस बहुत हो गया पढ़ाई पर ध्यान दे अगले महीने से एग्जाम आने वाले हैं। अगर अभी पढ़ाई में ध्यान नहीं दी तो एग्जाम पेपर पर लिखना मनोज मनोज मनोज,,,,,,,,


अरे वाह पूनम रानी एक ही दिन में उसका नाम भी तुझको याद हो गया,,,,,,

तू नहीं सुधरेगी,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह बेला को मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ी की बेला और सुबह का दोनों हंसते हुए भाग खड़े हुए,,,,, पूनम वही रुपए क्योंकि उसका घर आ चुका था और वह दोनों हंसते हुए अपने घर की तरफ चले गए पूनम भी कुछ देर में ही खड़ी होकर सोचने लगी कि यह उसे क्या हो गया है,,, क्यों उसका नाम उसके होठों पर आ गया,,,,,,, साला हरामी,,,,,, 

( पूनम मन में गाली देकर अपने घर में चली गई,,,,, जाते ही वह अपने कपड़े बदल कर खाना खाने बैठ गई उसके बाद थोड़ा बहुत काम कर के अपने कमरे में जाकर सो गई।
दोपहर में अक्सर सब लोग कुछ देर आराम ही करते थे। यह रोज का ही था। बिस्तर पर लेटते ही फिर से उसे मनोज याद आ गया जैसे तैसे करके उसे नींद आई। 
शाम को उसकी नींद खुली तो सब लोग कुछ ना कुछ काम कर ही रहे थे। वह भी अपने कमरे से बाहर आकर हाथ मुंह धो कर,,,,, झाड़ू उठाई और पूरे घर में झाड़ू लगाना शुरु कर दी वैसे तो घर में हर कोई झाड़ू लगाता था लेकिन आज उसकी मम्मी और उसकी दोनों चाहिए किसी और काम में लगे हुए थे इसलिए वह खुद ही झाड़ू उठा कर पूरे आंगन में झाड़ू लगाने लगी। तभी उसकी संध्या चाची जोकि गेहूं साफ कर रही थी वह पूनम की तरफ देख कर हंसते हुए बोली।।

पूनम आज तुमने जो सुबह-सुबह इतनी अच्छी पिक्चर दिखाई हो उसे देखने के बाद तो हम लोगों के होश ही उड़ गए हैं।( इतना कहने के साथ ही संध्या के साथ साथ उसकी छोटी चाची और उसकी बुआ तीनों ठहाके लगा कर हंसने लगे,, उनको हंसता हुआ देखकर पूनम बोली,,,,,)

चाची जितना हंसना याद करो मेरी तो तुमसे अपने आधी पिक्चर देखे थे लेकिन देखना एक दिन में तुम सब की पूरी पिक्चर देखूंगी और उस दिन बताऊंगीे कि किसकी पिक्चर अच्छी थी।

हां हां,,, देख लेना हमें भी उस दिन का इंतजार रहेगा,,,
( इसके बाद उन लोगों में हंसी मजाक का दौर शुरू हो गया हर तरह से यह परिवार पूरी तरह से सुखी और संपन्न था आपस में किसी के बीच किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं था। आपस में सभी लोग बड़े प्यार से रहते थे उन सबके बीच में पूनम सबकी लाडली थी।


शाम को सभी लोग मिलकर खाना बनाए और उसकी चाची खाना परोस परोसकर थाली लगाती और पूनम सभी को खाने की थाली ले जा कर देती,,,,, इस तरह से सभी लोग को खाना खिलाने के बाद पूनम और उसकी चाची और बुआ सब साथ में मिलकर खाना खाते थे। खाना खाने के बाद सभी औरतें और पूनम मिलकर घर के बर्तन को भी साफ करके रखते थे।
गांव में अक्सर लाइट आती थी चली जाती थी,,,, अधिकतर गांव में अंधेरा ही रहता था,, लाइट के आने और जाने का कोई समय निश्चित नहीं था। हमेशा की तरह आज भी लाइट नहीं थी एकदम अंधेरा छाया हुआ था। घर का सारा काम खत्म करने के बाद घर की औरतें बैठकर कुछ देर गप्पे लड़ाया करते थे। रोज की तरह आज भी पूनम,,, पूनम की दोनों चाचीया और उसकी बुआ बैठ कर इधर उधर की बातें करते हुए अपना समय व्यतीत कर रहीे थी। गर्मी अपने जोरों पर थी, पूनम की दोनों साथिया बहुत ही खूबसूरत और भरे हुए बदन की थी उसकी बुआ भी किसी से कम नहीं थी। या यूं कह दो कि पूनम के घर में पूनम के साथ साथ सभी औरतें बहुत खूबसूरत हैं लेकिन इन सभी में पूनम की खूबसूरती उन लोगों से एक कदम ज्यादा ही थी। उन लोगों को वहां बैठे बैठे काफी समय बीत गया था। जैसे-जैसे रात गहरा रही थी वैसे वैसे,,,,शीतल हवा का झोंका गर्मी के जोर. को कम कर रहा था। वह लोग वहां से उठकर अपने अपने कमरे में जाने वाले ही थे कि तभी पूनम के चाचा ने संध्या को आवाज लगाकर कमरे में बुलाने लगे,,,,, पूनम के चाचा की आवाज सुनकर पूनम की छोटी चाची हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,,,


जाओ दीदी लगता है,,,, की भाई साहब का खड़ा हो गया है,,,
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21-02-2018, 06:43 PM
( इतना कहने के साथ ही वहां ठहाके लगाकर हंसने लगी और साथ में उसकी बुआ भी हंसने लगी पूनम अपनी चाची की बात सुनकर थोड़ा सा शरमा गई लेकिन वह इन सब बातों को नजरअंदाज कर देती थी। तभी संध्या बोली।)

क्या यार तुम भी सबके सामने बोल देती हो,,,, हमारी देवर जी की तो तुम्हें रात भर सोने नहीं देते होंगे क्या करें यार,,,ईन मर्दों का तो कुछ समझ में ही नहीं आता है,,, कब खड़ा हो जाता है कब बैठ जाता है यह सारा दिन लोगों को भी नहीं पता चलता जब तक बैठा रहता है तब तक फुर्सत रहती है लेकिन जैसे ही खड़ा हो जाता है। हमारी नींद हराम कर देते हैं। ( संध्या बहुत धीमे से बोली थी वह ऐसा समझ रही थी कि उसकी बातें पूनम नहीं सुन रही है,,, जबकि पूनम सब कुछ सुन लेती थी लेकिन ऐसा बर्ताव करती थी की उसे कुछ सुनाई नहीं दिया,,,,,। अक्सर पूनम की चाची के बीच इस तरह की गंदी बातें होती रहती थी जिसे सुनकर पूनम के बदन में भी कुछ देर के लिए हलचल सी मच जाती थी। लेकिन वह अपने मन को कभी भी ऐसी बातें सुनकर बहकने नहीं देती थी। सभी लोग उठ कर अपने अपने कमरे की ओर जाने ही वाले थे कि तभी उसकी संध्या चाची बोली। 

अरे यार मुझे तो पेशाब लगी है चलो चलकर लेते हैं।
( संध्या की बात सुनकर पूनम की छोटी चाची चुटकी लेते हुए बोली।)
हां हां कर लो पूरी तैयारी के साथ जाना भाई साहब के पास ताकि उन्हें कोई परेशानी ना हो,,,,,
( इतना कहकर फिर से हम लोगों के बीच हंसी का फुवारा छूट पड़ा)

क्या यार तुम सब भी बात का बतंगड़ बनाती हो चलो सोना भी है कि नहीं,,,,,

हां हमको तो पता है कि तुम कितना सोओगी और भाई साहब को सोने दोगी,,,,
( अपनी दोनों चाची की बात सुनकर पूनम मन ही मन मुस्कुरा रहीे थी,,,,बाते करते हुए वह लोग घर के पीछे खाली जगह पर चले जाएं जहां पर वह लोग रात के समय के साथ किया करते थे। वहां पहुंचते ही पूनम की छोटी-चाची संध्या से बोली,,,,

लो अब बिल्कुल भी देर मत करो,,,, कर लो पेशाब भाई साहब वहां तुम्हारा इंतजार कर कर के तड़प रहे होगे,,,,,


रितु तो कुछ ज्यादा ही बंदूक कर रही है आज तेरा समय है तो बोल ले मेरी बारी आएगी तब मैं भी तुझे बिल्कुल नहीं छोडूंगी।

( इतना कहकर संध्या थोड़ा आगे बढ़ गई। चारों तरफ गहरा अंधेरा छाया हुआ था अक्सर रात को यह लोग इधर ही पेशाब करने आया करती थी क्योंकि अंधेरा भी कुछ ज्यादा ही होता था और किसी को कुछ नजर भी नहीं आता था।
संध्या धीरे धीरे करके अपनी साड़ी उपर की तरफ उठाने लगी। वैसे तो इतने अंधेरे में कुछ नजर नहीं आ रहा था बस ऐसा लग रहा था कि कोई साया खड़ा है। तभी संध्या पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई,,,, उन लोगों को भी संध्या के रूप में बस एक काली परछाई नीचे बैठते हुए नजर आई,,,, जैसे ही संध्या पेशाब करना शुरू की ऊसकी बुर से सीटी की आवाज आने लगी,,,, और ऊस आवाज को सुनते ही रितु ने तुरंत टॉर्च जला दी,,,, टॉर्च के जलते ही संध्या की बड़ी-बड़ी और एकदम गोरी गांड टॉर्च की रोशनी में चमक उठी,,,, जिस पर रितु पूनम और से सुजाता की नजर पड़ते ही वह लोगों की आंखो में भी चमक भर गई। लेकिन इस तरह से टॉर्च जलाने पर,,,,, संध्या दोनों हाथ अपनी गांड पर रखकर उसे छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए रितु को टॉर्च बंद करने के लिए बोली और रितु शरारत करते हुए टॉर्च बंद नहीं कर रहे थे जिसकी वजह से,,,, संध्या थोड़ा सा उस पर नाराज भी हुई और जल्दी से पेशाब करके उठते हुए बोली,,,,

क्या रितु तुम पागल हो गई हो क्या इस तरह से टॉर्च जलाती हो अगर कोई देख ले तो,,,,,,

अरे दीदी देख भी लेगा तो क्या होगा तुम्हारी मदमस्त गांड देख कर तो वह पागल ही हो जाएगा,,,, और वैसे भी तो गांड देख कर चेहरे का पता थोड़ी चलता है।
( रितु की यह बात सुनकर सिंध्या हंस दी,,,, रितु संध्या को टॉर्च ़ थमाते हुए बोली लो पकड़ो और मुझे भी पेशाब करना है। इतना कहने के साथ ही वह संध्या को टॉर्च थमाकर आगे बढ़ी और वह भी अपनी साड़ी उठाकर नीचे बैठ गई और पेशाब करने लगी,,,, इस बार संध्या को भी शरारत सुझी और उसने भी टॉर्च जला दी,,,, और रीतु की भी बड़ी बड़ी गांड चमक ऊठी लेकीन रीतु जरा भी एतराज नही की और वह बिंदास होके पेशाब करने के बाद ही ऊठी,,, सुजाता का भी यही हाल हुआ,,,, पुनम को जब संध्या पेशाब करने को बोली तो वह शर्म के मारे मना कर दी। ओर वो लोग अपने अपने कमरे मे चले गए।
सुबह जल्दी-जल्दी पूनम नहा धोकर तैयार हो गई लेकिन फिर भी उससे पहले ही उसकी सहेलियां आकर उसके घर के बाहर खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी। संध्या जल्दी-जल्दी पूनम को चाय नाश्ता करने को दि,,,, संध्या के चेहरे पर रात की थकान साफ नजर आ रही थी,,,, जिसे देखकर पूनम की रितु चाची बोली,,,,

क्या दीदी लगता है भाई साहब ने रात भर तुम्हें सोने नहीं दिया,,,,,,,,

तू फिर शुरू हो गई,,,,, अच्छा ने पूनम यह चाय और नाश्ता बाहर तेरे दादाजी बैठे होंगे उन्हें देते हुए स्कूल चले जाना,,,,,

अच्छा चाची में देते हुए स्कूल चले जाऊंगी,,, तुम बिल्कुल चिंता मत करो,,, 
( इतना कहने के साथ ही पूनम ने संध्या के हाथों से चाय और नाश्ता लेकर बाहर बरामदे में बैठे अपने दादा जी को देते हुए अपनी सहेलियों के साथ स्कूल की तरफ जाने लगी,,,,, पूनम सादगी में भी बेहद खूबसूरत लग रही थी उसकी बालों की लटे चेहरे पर बार-बार बिखर जा रही थी जिसे वह अपनी उंगलियों से पीछे कर ले रही थी यह रूप यह निखार इतना गजब का था कि पूनम की हम उम्र लड़कियां भी उसकी दीवानी सी हो गई थी कुछ लड़कियां हमेशा पूनम की खूबसूरती सें जला करती थी। लेकिन सोनम को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह अपने में ही मस्त रहतीे थी। दुनियादारी की फिक्र उसमे बिल्कुल भी नहीं थी। तीनों आपस में बातें करते हुए स्कूल की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। पूनम मनोज वाली बात को बिल्कुल भूल चुकी थी उसे जरा भी याद नहीं था कि मनोज उसके पीछे पड़ा हुआ है। जिसके बारे में सोचकर कल वह बेहद चिंतित थी लेकिन रात भर में ही वह सारी बातों को भूल चुकी थी इसलिए तो वह बेफिक्र होकर स्कूल की तरफ आगे बढ़ी जा रही थी। तभी बेला उसे मनोज की बात याद दिलाते हुए बोली

देखना पूनम आज भी वह लड़का वहीं खड़ा होगा,,,,
( बेला की यह बात सुनकर एक बार फिर से उसके बदन में कपकपी सी दौड़ गई,,,, उसे फिर से मनोज याद आ गया,,,, उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट होने लगी। बेला की बात सुनकर वह कुछ भी बोल नहीं पाई,,,,,, कुछ देर पहले जिसके चेहरे पर खुशी की आभा साफ झलक रही थी मनोज का नाम सुनते ही उसकी सारी हंसी ओझल हो गई,,, पूनम एक बेहद संस्कारी लड़की थी इसलिए उसका नाम किसी लड़के से जुड़े यह उस को बिल्कुल भी मंजूर नहीं था उसे अपने परिवार की इज्जत मर्यादा मान सम्मान का अच्छे से ख्याल था। इसलिए वह इस तरह के चपेड़ों में बिल्कुल भी नहीं पड़ना चाहती थी। आखिरकार उसके दिल की धड़कने तेज होने लगी उसकी नजर एक बार बार नीचे झुक जा रही थी उसके बदन में अजीब से डर का माहौल बन चुका था।
वो फिर से मनोज को उसी मोड़ पर खड़े देख चुकी थी वह डर रही थी लेकिन बेला और सुलेखा दोनों मुस्कुरा रहे थे।
उसके पैर आगे बढ़ाएं नहीं बढ़ रहे थे। मनोज लगातार उसे ही घूरे जा रहा था। अजीब कसमसाहट भरी स्थिति उसके सामने खड़ी हो गई थी। खैर जैसे तैसे करके पूनम आगे बढ़ गई। और जैसे ही कुछ दूरी पर पहुंची उसकी जान में जान आई। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, 
वह घरवालो से ऐसी बाते करने से डर रही थी।,,,,, वह पहले भी इसी तरह से खड़ा होकर उसे घूमता रहता था लेकिन पहले उसे यह नहीं पता था कि वह किस के लिए खड़ा रहता है और किस को घूमता रहता है इसलिए वह बिना किसी झिझक बिना किसी डर के आती जाती रहती थी लेकिन जब उसे मनोज के मन में क्या चल रहा है इसका भान हुआ तो,, उसके लिए स्कूल आना जाना दुभर हो गया ।अब तो यह रोज का हो गया था,,,, तकरीबन 8:00 10 दिन ऐसे ही बीत गए पूनम रोज डरते हुए उसको जाति और डरते हुए स्कूल से वापस घर आती वह ऐसी स्थिति में पहुंच गई थी कि किसी को कुछ बताने लायक भी नहीं थी उसे इस बात का डर था कि घर वालों को बताने पर कहीं घर वाले गलत न समझ बेठे ,,,, दूसरी तरफ मनोज जी काफी परेशान हो गया था उसे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था इतने दिनों से तुम किसी भी लड़की के पीछे इतना परेशान नहीं हुआ था वह जिस लड़की को चाहता उस लड़की से फ्रेंडशिप कर लेता था लेकिन पूनम के पीछे उसे कुछ ज्यादा ही पापड़ बेलने पढ़ रहे थे और पूनम की तरफ से उसे जरा सा भी इशारा नहीं मिल रहा था। 
और वह मन में ठान लिया था कि पूनम को किसी भी तरह से पटा कर ही दम लेगा। पूनम का रवैया देख कर पूनम के प्रति उसका आकर्षण और भी ज्यादा बढ़ गया था उसे लगने लगा था कि पूनम के साथ उसे बहुत मज़ा आएगा। क्योंकि इतने से वह भी अच्छी तरह से समझ गया था कि पूनम दूसरी लड़कियों की तरह बिल्कुल भी नहीं है वह कुछ खास है इसलिए तो अब पूनम के पीछे पीछे घूमने में उसे मजा आने लगा था लेकिन बात ना बनती देखकर वह अंदर ही अंदर गुस्सा भी करने लगा था। पूनम से बातचीत तो दूर पूनम कभी उसके सामने ठीक से खड़ी भी नहीं हुई थी और उससे बातचीत कराने का ठेका उसने बेला को दे रखा था लेकिन बेला और सुलेखा दोनो इस में नाकाम सी नजर आ रही थी।
एक दिन रिशेष के समय बेला उसे अकेले में मिल गई। मनोज थोड़ा गुस्से में था क्योंकि उसने वादा कि थी की वह पूनम से उसकी जान पहचान करवा देगी लेकिन अभी तक उसने उससे बात तक नहीं करवा पाई थी। वह ऊंची नीचे पतली सी पगडंडी पर चली जा रही थी,,, चारों तरफ जंगली झाड़िया और खेत लहलहा रहे थे। बेला भी खूबसूरत थी। भरे बदन की थी थोड़ी मोटी सी थी उसकी बड़ी-बड़ी नितंब बहुत ही शानदार नजर आती थी। मनोज जल्दी-जल्दी उसके पीछे गया और पीछे से उसकी बांह पकड़ कर जोर से अपनी तरफ घुमाते हुए बोला।

बेला तुमने मुझसे वादा किया था कि पूनम से मेरी जान पहचान करवा दोगे लेकिन तुमने अभी तक उससे बात भी नहीं करवा पाई हो। 
( जिस तरह से मनोज नें उसकी बांह कसकर पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया था अगर उसकी जगह कोई और होता तो वह उसके गाल पर थप्पड़ रसीद कर देती और ऐसा करने के लिए वह अपना हाथ उठाई भी थी लेकिन मनोज को देखकर उसका हाथ खुद बखुद रुक गया। और मनोज की बात को अनसुना करते हुए मुस्कुरा कर बोली।)

हाय मेरी जान कभी हमसे भी तो प्यार से बात कर लिया करो आखिर पूनम में ऐसा क्या है जो मुझ में नहीं है उसके पास भी वही सब है जो कि मेरे पास है। ( बेला अपने हाथ से अपने बदन के ऊपर से नीचे तक इशारा करते हुए बोली।,, बेला की इस अदा पर वह उसके बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देखने लगा और उसकी नजर बेला की बड़ी बड़ी चूचीयो के ऊपर आकर अटक गई,,,, चूचियों पर नजर पड़ते ही जैसे मनोज का गुस्सा कहीं फुर्र हो गया लेकिन उसके मन में पूनम पूरी तरह से बस चुकी थी। किस लिए वह बेला से फिर से बोला लेकिन थोड़ा नरम लहजे में)

देना तुम ऐसा क्यों कर रही हो तुम तो मुझसे वादा की थी कि तुम मेरी जान पहचान करवा दोगी लेकिन ऐसा क्यों नहीं कर रही हो,,,,


मनोज पूनम दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है पता है जब से उसे यह मालूम हुआ है कि तुम उसके आगे पीछे घूमते रहते हो तब से वह कितना डर कर रहती हैं। आते जाते वह तुम्हारी वजह से एकदम सहमी सहमी सी हो गई है। वह तो अपने चाचा से बताने वाली थी लेकिन उसे मैंने ही मना कर दीजिए कहकर कि अगर तूने बताई थी तो उन्हें ही कुछ गलत लगेगा कि तू ही पहले कुछ बोली होगी तभी वह पीछे पड़ा है इसलिए वह खामोश हो गई।( बेला मनोज को झूठी बात बनाते हुए बोले ताकि मनोज उसके साथ अच्छे से पेश आए और उसे विश्वास दिला सके कि वह उसकी बात उससे करा कर रहेगी,,,, लेकिन बेला के मन में कुछ और भी था वह मनोज के विश्वास के साथ साथ उसका प्यार भी पाना चाहती थी जो कि प्यार नहीं बल्कि एक वासना ही थी,,, दिला मनोज के साथ संबंध बनाना चाहती थी। बेला की बनी बनाई बात सुनकर मनोज को उस पर थोड़ा विश्वास हुआ तो उसका गुस्सा पूरी तरह से शांत हो गया और वह बोला।)

देखो मनोज तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तुमसे वादा की हो तो उसे जरुर निभाऊंगी मैं तुम्हारी जान पहचान सब कुछ पूनम के साथ करवा दूंगी लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह इधर उधर देख कर यह जानने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई उन्हें इस जगह पर देख तो नहीं रहा है लेकिन दूर दूर तक कोई भी नजर नहीं आ रहा था। बेला का इशारा खेला खाया मनोज अच्छी तरह से समझ रहा था,,, तभी तो उसकी नजर अभी भी बेला की बड़ी बड़ी चूचीयो पर ही टिकी हुई थी। तो भी वह अन्जान बनता हुआ बोला।)

क्या चाहती हो तुम,,,,,,

तुम्हारा प्यार तुम्हारा सब कुछ,,,,( बेला बड़ी हुई नशीली आंखों से मनोज की आंखों में देखते हुए बोली,,,, मनोज भी उसकी नशीली आंखों में डूबता हुआ इधर उधर देख लिया विशेष पूरी होने में अभी भी कुछ समय का वक्त था उसने तुरंत बेला का हाथ पकड़ा और उसे झाड़ियों के बीच ले गया बेला बिना ना नुकुर किए उसके साथ झाड़ियों में चली गई। झाड़ियां बड़ी घनी और लंबी लंबी थी जिसकी वजह से अंदर का कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। मनोज जल्दी-जल्दी उसका हाथ पकड़ कर एक घने पेड़ की छांव के नीचे ले गया यह जगह बिल्कुल सुरक्षित है यहां ऐसे भी कोई आता जाता नहीं था। मनोज पूनम पर मर मिटा था लेकिन उसकी जो आदत थी लड़कियों के साथ मस्ती करने कि वह कहां बंद होने वाली थी काफी दिनों से पूनम के चक्कर में उसने किसी लड़की की चुदाई नहीं किया था इसलिए बेला का इशारा एक बार फिर से उस को एकदम से चुदवासा बना दिया,,,, मनोज इस तरह से उसका हाथ पकड़कर झाड़ियों में ले जा रहा था बेला बहुत खुश हो रही थी उसकी बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी थी। बेला का यह पहली बार नहीं था,,,,, उसने भी काफी लड़कों से चुदवा चुकी थी। और आंखों ही आंखों में वह मनोज को पसंद करने लगी थी लेकिन मनोज पूनम के पीछे हाथ धो कर पड़ा था इसलिए अपना फायदा देख कर ही उसने मनोज को यह कही थी कि वह पूनम से उसकी जान पहचान करवा देगी ताकि ईसी बहाने वह भी बहती गंगा में हाथ धो ले। और यह सोच उसका इरादा आज सफल होने जा रहा था झाड़ियों के बीच घने पेड़ के नीचे पहुंचते ही मनोज पागलों की तरह बेला को अपनी बाहों में भर कर ऊसके गुलबी होठो को चूसने लगा,,,
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