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Desi आँचल : एक खूबसूरत हाउसवाइफ की अय्याशियां

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Desi आँचल : एक खूबसूरत हाउसवाइफ की अय्याशियां
Sameer303 Offline
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#11
14-01-2018, 07:49 PM
इतनी बार झड़ जाने से आँचल अब कमज़ोरी महसूस कर रही थी. उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था . उसकी आँखों में अजीब से भाव थे जैसे वो शून्य को घूर रही हो. उसके घुटने कमज़ोरी से कांप रहे थे. सलीम के काटने से उसके गालों और चूचियों पर लाल निशान पड़ चुके थे. उसकी गांड थप्पड़ मारे जाने से लाल हो चुकी थी.
 
लेकिन सलीम तो अभी शुरू ही हुआ था , उसने सुनील की टेबल से सब काग़ज़ फेंक दिए और आँचल को टेबल पर बैठा दिया फिर उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर आँचल की चूत में फिर से अपना लंड घुसेड दिया , एक जोरदार झटके में लंड पूरा चूत में अंदर तक धँस गया. फिर वो तेज़ी से लंड अंदर बाहर पेलने लगा.
 
आँचल चिल्लाई …अहह् ………..आहह…… ओइईईई… आअरहगगगघहीुई..म्म्म्माआ…
इस पोज़िशन में सलीम का लंड बहुत डीप पेनिट्रेट कर रहा था. आँचल को लगा आज तो उसकी चूत फट के चिथड़ा हो जाएगी. उसकी पहले से ही लाल हो चुकी गांड भी टेबल से रगड़ खाकर और लाल हो गयी.
 
जैसे ही सलीम झड़ने को हुआ उसने अपना लंड आँचल की चूत से बाहर निकाला और आँचल के बाल पकड़कर उसका चेहरा नीचे झुका दिया और वीर्य की धार को उसके बालों , उसके खूबसूरत चेहरे और उसकी गोरी चूचियों पर छोड़ दिया . आँचल अपना बैलेंस नही बना सकी और टेबल से नीचे गिरने लगी, तभी सलीम ने उसको पकड़कर नीचे फर्श पर बैठा दिया .
 
तभी आँचल का फोन बजने लगा. सलीम ने फोन उठाया तो देखा सुनील की कॉल थी . लेकिन आँचल उठकर फोन पर बात करने की हालत में नही थी. सलीम ने आँचल को फोन दिया और खुद उसकी चूचियाँ मसलने लगा. सुनील ने फोन पर आँचल से पूछा की वो अब कैसा फील कर रही है और तबीयत कैसी है , आँचल सिर्फ़ हूँ हाँ में ही जवाब दे पाई .
 
इतनी खूबसूरत औरत को बुरी तरह से चोदकर भी सलीम का मन नही भरा , उसको फोन पर हूँ हाँ करते देखकर उसका लंड फिर तन गया. उसने फर्श पर बैठे बैठे ही आँचल को कमर और गांड से पकड़कर उठाया और अपने लंड पर बैठा दिया . आँचल अभी फोन पकड़े हुए ही थी. लंड के चूत में घुसते ही आँचल के मुँह से आह निकली , दूसरी तरफ सुनील ने समझा की उसकी बीवी की तबीयत खराब है और वो उल्टी कर रही है.
 
आँचल डर गयी उसने समझा कहीं सुनील कुछ शक़ ना कर बैठे , इसलिए उसने नॉर्मल तरीके से बात करना चाहा , लेकिन सलीम उसकी गांड उठा उठा के धीरे धीरे चूत चोद रहा था इसलिए उसके मुँह से सिसकियाँ निकल जा रही थी. सलीम इस बात से और एक्साइटेड हो गया की मेमसाब अपने हसबैंड से फोन पर बात कर रही है और मैं उसे चोद रहा हूँ. वो समझ गया की मेमसाब डर से , सुनील से नॉर्मल होके बात करने की कोशिश कर रही है , उसने नीचे से तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिए.
 
अब आँचल सलीम की गोद में तेज धक्कों से चुदते हुए उछलने लगी उसकी तेज सिसकारियाँ निकलने लगी . लेकिन अभी भी वो फोन पकड़े हुए थी . उसको ओर्गास्म आ गया. सुनील को फोन पर सिर्फ़ आहह ….उफ़फ्फ़….अरगगगगगग…अर्र्र्र्र्ररर…..ओइईईईईईईईईई…. सुनाई दे रहा था. 
 
सुनील बोला, “ आँचल , आँचल क्या बात है ? तुम ऐसी अजीब आवाज़ें क्यूँ निकाल रही हो , तबीयत ज़्यादा ही खराब हो रही है क्या ?”
 
ओर्गास्म खत्म होने के बाद आँचल ने सुनील को बोला की उसको अभी उल्टी आई थी , इसलिए उसके मुँह से अजीब सी आवाज़ें निकल रही थी. फिर उसने कहा मेरी तबीयत ठीक नही है तुम जल्दी घर आ जाओ और फोन रख दिया.
 
आँचल को अपने पति से झूठ बोलते देखकर सलीम बोला, “ अच्छा नाटक करती है तू साली !”
 
आँचल बोली, “ आह ,....उफ़फ्फ़ अब मुझे छोड़ दो सलीम , प्लीज़ अब तुम जाओ.”
 
आँचल को फर्श पर पड़े देखकर और अपने को छोड़ देने की मिन्नतें करते देखकर सलीम ज़ोर से हंसा फिर आँचल की गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोला ,” साली अभी तो तेरी गांड चोदूँगा , क्या मस्त बड़ी गांड है तेरी.” 
 
फिर उसने आँचल को पकड़कर खड़ा कर दिया.
 
लेकिन आँचल कमज़ोरी महसूस कर रही थी इसलिए खड़ा नही हो पाई और सलीम के हाथों में झूल गयी. सलीम ने उसको पेट के बल बेड पर लिटा दिया और फिर घुटने अंदर को मोड़कर आँचल की गांड हवा में ऊपर को उठा दी. फिर उसके दोनो नितंबों को फैला कर गांड के छेद में लंड घुसाने की कोशिश करने लगा.
 
जैसे ही सलीम का लंड का सुपाड़ा आँचल की गांड में घुसा आँचल ज़ोर से चिल्लाई, “ अहह ओह फट गयी ……ईईईईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआ….”
 
“साली लगता है कभी तेरे पति ने तेरी गांड नही मारी , तभी तो तू इतना फुदकती रहती है” , आँचल की गांड के बहुत टाइट छेद को देखकर सलीम बोला.
 
फिर उसने अपना लंड छेद से हटा लिया और अपनी उँगलियों पर थूका और उंगली को गांड के छेद में घुमाने लगा.
 
आँचल फिर चिल्लाई, “आहह….मत करो सलीम…आहह ओइईई…”
 
लेकिन सलीम भोसड़ी का बहुत गांडू था , अपनी अम्मी की गांड मारते मारते अब उसको गांड मारने की आदत पड़ गयी थी. इसलिए वो नही माना और फिर उसने अपना लंड आँचल की गांड के छेद पर टिका कर धक्का मारा.
 
“आहह…..मैं मर गयी ……..कमीने कुत्ते हरामजादे ने मेरी गांड फाड़ दी...... उईईईईईईईईईई माआआआआआ…”, आँचल फिर चिल्लाई .
 
आँचल के रोने चिल्लाने से सलीम और एक्साइटेड हो गया और आँचल की कुँवारी गांड को बुरी तरह से चोदने लगा. दर्द से आँचल की आँखों से टपाटप आँसू बहने लगे. कुछ देर बाद सलीम उसकी गांड में ही झड़ गया. और आँचल को बेड पर रोता छोड़कर बेडरूम से चला गया.
 
जब सलीम अपने कमरे में पहुँचा तो उसे होश आया की मैंने ये क्या कर दिया . डर के मारे अब खुद उसकी गांड फट के हाथ में आ गयी और उसने फटाफट अपना दो कौड़ी का सामान प्लास्टिक के थैले में डाला और घर छोड़कर भाग गया.
 
तब तक दोपहर के 2 बज चुके थे और आँचल का ससुर भी क्रियाकर्म से वापस आ पहुँचा. वो दिन भर आँचल को चोदने का ही प्लान बनाने में था . इसलिए जैसे ही घर पहुँचा टाइम वेस्ट ना करते हुए सीधे आँचल के बेडरूम में घुस गया. पर बेडरूम का नज़ारा देखते ही उसकी गांड फट गयी .
ये तीसरी गांड थी जो आज उस घर में फटी थी. 
 
उसने देखा आँचल बेड पर नंगी पड़ी है और सुबक रही है. उसके पूरे बदन में निशान बने हुए हैं और बदन में जहाँ तहाँ वीर्य लगा हुआ है. 
उसकी गांड से थोड़ा खून भी निकल रहा था. जैसे ही आँचल ने अपने ससुर को देखा उसने ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया.
 
ससुर उसके पास पहुँचा और उसके नंगे बदन को अपने आलिंगन में लेकर उसको दिलासा देते हुए बोला, “ तुम्हारी ऐसी हालत किसने की ?”
 
आँचल बोली, “ वो हमारा कुक सलीम , उसी कमीने ने मेरा रेप किया है.”
 
ससुर मन ही मन सोचने लगा , इस लड़की को मैं चोदने को मरा जा रहा हूँ और यहाँ ये दो कौड़ी का नौकर सलीम इसको चोद गया और पहले दिन भी ना जाने बाहर किससे चुदवा के आई थी. पता नही और कौन कौन चोद गया इसे , सिर्फ़ मैं ही नही चोद पा रहा हूँ बस.
 
ससुर गुस्से में सलीम के कमरे की तरफ दौड़ा तो वहाँ जाकर देखा की वो भोसड़ी का तो भाग लिया. फिर वो वापस आँचल के पास आया . 
 
आँचल उससे हाथ जोड़ते हुए बोली , “ प्लीज़ आप सुनील या किसी और को ये सब मत बताना.”
 
ससुर बोला, “ ठीक है, मैं किसी को ये बात नही बताऊँगा.”
 
फिर उसने गरम पानी करके आँचल को नहाने और कपड़े पहनने में मदद की.
उसके बाद उसने आँचल का कमरा धो दिया और फिर साफ करके वीर्य और चूतरस के सभी निशान फर्श से मिटा दिए और बेड की शीट्स वगैरह सब बदल दी. ताकि सुनील के आने तक बेडरूम फिर से पहले जैसा साफ सुथरा हो जाए.
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Sameer303 Offline
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#12
14-01-2018, 07:50 PM
आँचल के ससुर ने जब आँचल को बेडरूम में नंगी चुदी हुई पड़े देखा तो इससे आँचल को बहुत एंबरेसमेंट फील हुआ. वो डर गयी और उसने झट से सलीम पर रेप का इल्ज़ाम लगा दिया. लेकिन असल बात ये थी की जब से नौकरानी रेखा ने उसे बताया था की सलीम का बहुत बड़ा लंड है और रेखा उससे खूब चुदवाती है तो तभी से आँचल के मन में भी उससे चुदवाने की इच्छा पैदा हो गयी थी. वैसे भी उसकी चूत अनचुदी ही रह जाती थी इसलिए सलीम को वो अपने को चोदने से रोक नही पाई.
 
उसके मन से अपने मायके के नौकर रामू के लंड की यादें अभी मिटी नही थी , बल्कि उन पलों को याद करके उसकी चूत पानी छोड़ देती थी. इसलिए ससुराल के नौकर सलीम से भी उसने मज़ा लेने में देर नही की.
 
सलीम के लंड के लिए वो प्यासी थी और सलीम के साथ हुई घमासान चुदाई का उसने भरपूर मज़ा भी लिया था , लेकिन तभी तक जब तक की उसने अपना लंड आँचल की गांड में नही घुसाया था. सलीम के लंड से अपनी गांड फड़वाने में आँचल को बिल्कुल भी मज़ा नही आया था , बल्कि असहनीय दर्द से वो रो पड़ी थी और सलीम बड़ी बेदर्दी से उसकी गांड मारते रहा. इसलिए सलीम के घर छोड़कर भाग जाने से उसे बहुत खुशी हुई.
 
अपने ससुर की मदद से , उसने सुनील के वापस लौटने से पहले ही बेडरूम धो कर साफ लिया था. जब सुनील वापस लौटा तो उसने समझा आँचल की तबीयत वाक़ई खराब है उसे बहुत चिंता हुई. उसने अपने पापा से कहा की जब तक आँचल अच्छा महसूस नही करती वो फैक्ट्री नही जाएगा और उसके बदले कुछ दिन तक पापा फैक्ट्री चले जाएँ.
 
बुड्ढा ये सुनकर फ्रस्टरेट हो गया पर उसको फैक्ट्री जाना ही पड़ा. वो सोच रहा था अब बहू को नंगी देख लिया है , नहला धुला भी दिया है , अब तो बहू चोदने देगी पर सुनील ने उसको फैक्ट्री भेज दिया. वाह रे फूटी किस्मत!
 
सुनील को आँचल ने झूठी कहानी सुना दी की सलीम उनके घर से कुछ रुपये चुराकर भाग गया है. ज़्यादा अमाउंट नही था इसलिए सुनील ने पुलिस कंप्लेंट के चक्कर में पड़ना ठीक नही समझा.
 
आँचल ने देखा की फैक्ट्री जाने के नाम पर उसके ससुर का मुँह कैसे उतर गया है. वो जानती थी की उसके ससुर ने सलीम के जाने के बाद उसकी बहुत मदद की थी और बेडरूम साफ किया था , उसको बाथरूम भी ले गया था , नहाने और कपड़े पहनने में भी मदद की थी , क्यूंकी उस समय गांड मरने से उसकी हालत वाक़ई खराब थी. और वो ये भी जानती थी की इसके बदले में वो ससुर अब उससे क्या माँगेगा. इसलिए उसके फैक्ट्री जाने से वो खुश हुई क्यूंकी अब ससुर सुबह जाकर शाम को थककर लौटता था.
 
आँचल जानबूझकर तबीयत खराब होने का बहाना करती रही जबकि असल में उसकी गांड में थोड़ा दर्द था बाकी वो पूरी तरह से ठीक थी. अगले कुछ दिन तक सुनील ने घर पर ही रहकर आँचल का ध्यान रखा. उसने एक बुड्ढा कुक भी रख लिया और आँचल के ज़ोर देने पर नयी नौकरानी भी रख ली. आँचल को रेखा से ब्लैकमेल होने का डर था इसलिए उसने बहाने बनाकर सुनील से उसको निकलवा दिया. आँचल बीमारी का बहाना बनाकर कुछ दिन तक आराम करती रही. उधर ससुर इन सब बातों से अलग फ्रस्टरेट हो रहा था.
 
आँचल की बीमारी की खबर सुनकर उसके माता पिता भी उसको मिलने आए. उन्होने सुनील से कहा थोड़े दिन के लिए आँचल को हम अपने साथ मायके ले जाना चाहते हैं. वैसे भी वो शादी के बाद से मायके नही जा पाई थी.
 
सुनील ने ये बात मान ली और आँचल अपने मायके चली गयी. उस दिन जब ससुर शाम को घर आया तो उसे पता चला की बहू मायके चली गयी है , वो बड़ा दुखी हो गया. आँचल की सास बहुत दिन से अपने रिश्तेदार के घर शादी में गयी हुई थी और कुछ दिन में लौटने वाली थी. ससुर दुखी हुआ की बुढ़िया के लौटने के बाद उसका बहू को चोदने का कोई चांस नही है.
 
मायके पहुँचने के बाद आँचल का सामना अपने नौकर रामू से हुआ. वो हरामी छोकरा आँचल को वापस देखकर बहुत खुश हुआ और आँचल को वासना भरी नज़रों से ताकने लगा. आँचल का चेहरा शरम से लाल हो गया क्यूंकी वो ससुराल में रामू के लंड को याद करके बहुत मूठ मारा करती थी. अपने मायके आकर आँचल ने बहुत खुशी महसूस की . रामू को देखकर उसने बहुत हॉर्नी फील किया.
 
आँचल के पेरेंट्स ने उसको एकदम से खुश देखा तो उन्होने सोचा की मायके आने की खुशी से ये बीमार से खुशी महसूस कर रही होगी , उन्हे आँचल पर कोई शक़ नही हुआ की इसमे इतना चेंज एकदम कैसे आ गया की अभी तो ससुराल में बीमारी से लेटी थी और यहाँ इतनी खुश दिख रही थी.
 
रामू भी आँचल के जाने के बाद उसको मूठ मारते समय बहुत याद करता था , उसको लगा अब इसकी शादी हो गयी है अब इसको चोदने में कोई लफड़ा नही है.
उस रात को आँचल ने रामू के लंड को याद करके मूठ मारी. उसने फैंटसाइज किया की रामू का बड़ा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा है. एक तरह से रामू का लंड उसके पहले प्यार के जैसा था क्यूंकी सबसे पहले उसने उसी का देखा था, अपनी शादी से कुछ ही दिन पहले.
 
जब सुबह हुई तो बेड पर लेटे लेटे आँचल सोचने लगी की रामू के साथ अकेले वक़्त बिताने का मौका कैसे मिलेगा , इस ख्याल से उसको अपनी चूत से रस बहता महसूस हुआ.
 
पिछले कुछ सालों से मायके में रामू उसके लिए बेड टी ला रहा था . आँचल जानबूझकर उसको अपने बदन को देखने देती थी , कभी कभी उसकी नाइटी ऊपर उठ जाती थी तो रामू को उसकी मांसल जांघें भी देखने को मिल जाती थी, और कभी कभी चूचियाँ भी देखने को मिल जाती थी.
 
आँचल ने आज जानबूझकर पैंटी नही पहनी थी और वो पेट के बल लेटी थी और उसने अपनी टाँगें फैला ली थी. उसने अपनी नाइटी भी ऊपर को खींच ली थी , जिससे जब रामू सुबह की चाय ले के आए तो उसको आँचल की जांघों के साथ ही उसकी गीली चूत का भी नज़ारा दिखे . तभी उसको कदमों की आहट सुनाई दी , उसने सोचा रामू चाय ले के आ रहा होगा. और उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी.
 
लेकिन उसको अपनी माँ के बोलने की आवाज़ आई , वो झटके से उठ के सीधी हो गयी . तभी उसके बेडरूम में उसकी माँ , नौकर रामू के साथ आई.
 
रामू ने कमरे में अंदर घुसते समय नाइटी में आँचल का अधनंगा बदन देख लिया था , फिर जब वो झटके से सीधी हुई तो उसकी नाइटी के अंदर , बिना ब्रा के , ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे को हिलती हुई बड़ी बड़ी चूचियाँ भी उसको देखने को मिली. उस पतली नाइटी में आँचल के तने हुए निप्पल साफ साफ दिख रहे थे. रामू समझ गया की आँचल बहुत एक्साइटेड हो रखी है.
 
ये सब देखकर आँचल की माँ ने रामू को तुरंत कमरे के बाहर भेज दिया.
फिर वो आँचल से बोली, “ कैसे कपड़े पहन रखे हैं, सब कुछ तो दिख रहा है. अब तुम्हारी शादी हो चुकी है . ऐसे झीने झीने कपड़े तुम सिर्फ़ अपने पति के सामने पहना करो. यहाँ थोड़ा ढंग के कपड़े पहना करो. आया समझ में ? ”
 
आँचल को निराशा हुई पर मजबूरी में सहमति में सर हिलाना पड़ा. कहाँ वो रामू को बेड टी के टाइम सिड्यूस करने की सोच रही थी और यहाँ उसे माँ के साथ बेड टी पीनी पड़ी और तमीज़ से रहने का लेक्चर अलग से.
 
अगले दो दिन तक आँचल को अकेले रामू के साथ कोई मौका नही मिला. उसकी माँ घर पर ही थी. आँचल बहुत फ्रस्टरेटेड हो गयी. वो रामू के इतने नज़दीक़ थी पर चुदाई का मौका नही मिल पा रहा था.
 
आज उसको अपनी ससुराल वापस जाना था. शाम को सुनील उसको ले जाने आने वाला था. अब उसका फ्रस्ट्रेशन और भी बढ़ गया कि मायके में आकर भी रामू के साथ कोई मौका नही मिला.
 
लेकिन दोपहर में उसकी माँ मार्केट चली गयी. माँ के जाते ही आँचल रामू को ढूंढने लगी. लेकिन उसको घर में रामू नही दिखा. फिर वो घर के पिछवाड़े में बने सर्वेंट क्वॉर्टर्स की तरफ गयी. वहाँ रामू के कमरे के दरवाज़े को उसने हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया पर अंदर कोई नही था. कमरे को खाली देखकर वो निराश हुई. लेकिन उसने देखा कमरे की दीवारों में फिल्म स्टार्स , मॉडल्स के कुछ अधनंगे और कुछ पूरी नंगी मॉडल्स के पोस्टर चिपके हुए हैं. रामू की चारपाई में तकिये के नीचे उसे मस्तराम की सेक्स कहानियों की हिन्दी किताब मिली. आँचल वहीं बेड में बैठकर वो गंदी किताब पढ़ने लगी. कमरे में नंगे पोस्टर्स के बीच वो गंदी कहानियों की किताब पढ़ने से आँचल बहुत उत्तेजित हो गयी और उसकी चूत से रस बहने लगा. उसने अपने जीन्स का बटन खोला और रामू के बेड में लेटकर अपनी गीली चूत में उंगली करने लगी.
 
रामू के बिस्तर में लेटकर मूठ मारने से उसे एक अलग सा रोमांच हुआ , ऐसा रिस्क लेने से उसकी उत्तेजना बहुत ही बढ़ गयी और उसको ओर्गास्म आने ही वाला था की तभी कमरे में रामू आ गया. रामू ने देखा की आँचल मेरे बेड पर लेटी हुई है और जीन्स नीचे को खिसका के चूत में उंगली कर रही है. वो हैरान रह गया. आँचल ने भी रामू को देख लिया लेकिन तभी उसको जबरदस्त ओर्गास्म आ गया , वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.
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Sameer303 Offline
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14-01-2018, 07:53 PM
लेकिन दोपहर में उसकी माँ मार्केट चली गयी. माँ के जाते ही आँचल रामू को ढूंढने लगी. लेकिन उसको घर में रामू नही दिखा. फिर वो घर के पिछवाड़े में बने सर्वेंट क्वॉर्टर्स की तरफ गयी. वहाँ रामू के कमरे के दरवाज़े को उसने हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया पर अंदर कोई नही था. कमरे को खाली देखकर वो निराश हुई. लेकिन उसने देखा कमरे की दीवारों में फिल्म स्टार्स , मॉडल्स के कुछ अधनंगे और कुछ पूरी नंगी मॉडल्स के पोस्टर चिपके हुए हैं. रामू की चारपाई में तकिये के नीचे उसे मस्तराम की सेक्स कहानियों की हिन्दी किताब मिली. आँचल वहीं बेड में बैठकर वो गंदी किताब पढ़ने लगी. कमरे में नंगे पोस्टर्स के बीच वो गंदी कहानियों की किताब पढ़ने से आँचल बहुत उत्तेजित हो गयी और उसकी चूत से रस बहने लगा. उसने अपने जीन्स का बटन खोला और रामू के बेड में लेटकर अपनी गीली चूत में उंगली करने लगी.
 
रामू के बिस्तर में लेटकर मूठ मारने से उसे एक अलग सा रोमांच हुआ , ऐसा रिस्क लेने से उसकी उत्तेजना बहुत ही बढ़ गयी और उसको ओर्गास्म आने ही वाला था की तभी कमरे में रामू आ गया. रामू ने देखा की आँचल मेरे बेड पर लेटी हुई है और जीन्स नीचे को खिसका के चूत में उंगली कर रही है. वो हैरान रह गया. आँचल ने भी रामू को देख लिया लेकिन तभी उसको जबरदस्त ओर्गास्म आ गया , वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.
 
रामू से अब रहा नही गया , उसने फटाफट अपने कपड़े उतार फेंके और सिसकारियाँ लेती आँचल के चेहरे के पास अपना लंड हिलाने लगा. फिर लंड पूरा खड़ा होते ही उसने आँचल की जीन्स और पैंटी एक झटके में उतार फेंकी. फिर आँचल की गांड को एक हाथ से पकड़कर दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली करने लगा. वो अपने अंगूठे से उसकी क्लिट को मसल रहा था और गीली , रस से भरी चूत में फचाफच उंगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था. आँचल अपनी गांड ऊपर को उछालने लगी. जल्दी ही उसको एक और ओर्गास्म आ गया और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेती हुई दूसरी बार झड़ गयी.
 
फिर रामू ने आँचल के बाकी कपड़े भी उतार दिए और उसको पूरी नंगी कर दिया. आँचल की बड़ी बड़ी चूचियों को खुली हवा में हिलते देखकर रामू उत्तेजना से भर उठा और उसने चूचियों के बीच निप्पलों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हे चूसने और काटने लगा. साथ ही साथ चूचियों को ज़ोर ज़ोर से हाथों में पकड़कर मसलने लगा.
 
आँचल को रामू का लंड चूसने की तड़प हुई . वो अपने हाथ में रामू का लंड पकड़कर उसे ऊपर नीचे हिलाने लगी. फिर रामू ने आँचल को उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी चूत की छेद में अपने लंड का सुपाड़ा घुसा दिया. फिर धीरे धीरे उसने आँचल को अपने लंड पर बिठा दिया.
 
जैसे ही सुपाड़ा चूत के अंदर घुसा , आँचल चिल्लाई, “ आररर्ग्घह...... उंगग्गग..... अहह.... ओइईईईईईई….”
 
अपनी गोद में बैठी आँचल को सिसकारियाँ लेते देखकर रामू उत्तेजना में भर गया और उसने आँचल की चूत में अंदर तक पूरा लंड घुसा दिया. आँचल को ऐसा लगा जैसे रामू के बड़े लंड से उसकी चूत पूरी भर गयी है और चूत की दीवारें पूरी तरह से स्ट्रेच हो गयी हैं. रामू ने आँचल की चूत की टाइटनेस को महसूस किया , उसे लगा आँचल की टाइट चूत ने उसके लंड को बिल्कुल जकड़ लिया है , आनंद से वो पागल सा हो गया. उसने पहले रंडियां चोदी थी पर रंडी चोदते समय उसे लगता था जैसे किसी थैली में टूथब्रश डाल रहा हो.
 
इतनी खूबसूरत और एकदम टाइट चूत वाली लड़की को चोदने में ऐसा आनंद उसे आ रहा था जो उसके पूरे खानदान में शायद किसी को भी नही आया होगा.
फिर रामू ने लंड को अपनी जगह पर बिना हिलाए रखकर आँचल को कसकर आलिंगन में भर लिया और उसके गोरे खूबसूरत बदन को चूमने , चाटने और काटने लगा. आँचल दर्द और उत्तेजना से ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.
 
फिर रामू आँचल की गांड को हाथों से पकड़कर उसको अपने लंड पर ऊपर नीचे उछालने लगा , रामू का लंड अब चूत में तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा . उछलने से आँचल की बड़ी चूचियाँ भी ऊपर नीचे उछलने लगी . इससे उत्तेजित होकर रामू ज़्यादा देर रोक नही पाया और उसने आँचल की चूत को अपने गरम वीर्य से पूरा भर दिया. वीर्य गिरते गिरते वो आँचल की चूचियों को चूसने काटने लगा. फिर उसने अपना लंड आँचल की चूतरस से भीगी हुई चूत से बाहर निकाला. इतने बड़े लंड के बाहर निकलने से प्वाक की आवाज़ हुई और आँचल की चूत का मुँह खुला रह गया.
 
फिर उसने अपने मुरझा चुके लंड को आँचल के मुँह में डाल दिया. आँचल सटासट उसका लंड चूसने लगी. आँचल के लंड चूसने से थोड़ी ही देर में छोकरे रामू का लंड फिर खड़ा हो गया. अब उसने आँचल को लिटाकर उसकी टाँगे पकड़ के ऊपर को घुटने से मोड़ दी और फिर चूत में लंड घुसेड दिया.
अब रामू , आँचल की चूत में हल्के हल्के धक्के लगाने लगा. आँचल भी उत्तेजित होकर उसका पूरा साथ देने लगी और अपनी गांड ऊपर को उछालने लगी जैसे वो नीचे से रामू को चोद रही हो. ये देखकर रामू खुश हो गया. आँचल के ऐसे गांड ऊपर को उछालने से उसकी गोरी गोरी मक्खन जैसी जांघें भी उछल रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ भी ऊपर नीचे हिल रही थी.
 
आँचल तो अपने पहले लंड , रामू के साथ चुदाई से इतने आनंद में थी की उसको दीन दुनिया की कुछ ना होश ना डर ना शरम , सब कुछ वो भूल गयी थी. वो इतनी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी की रामू को उसके मुँह में हाथ रखना पड़ रहा था की कहीं कोई सुन ना ले. उसके तेज तेज आवाज़ निकालने से रामू का हाल ऐसा था की ये खुद तो मरेगी साथ में मुझे भी मरवाएगी.
 
आँचल उत्तेजना से चिल्लाई, “ आहह......श....माआ..... , बहुत मज़ा आ रहा है रामू , ओह्ह......ओह्ह......... आहह…..ओइईईईईईईईई “.
 
उसको ओर्गास्म पर ओर्गास्म आते रहे और वो झड़ती रही , झड़ती रही और झड़ती रही ना जाने कितनी बार………
 
रामू उसकी चूत को धमाधम चोदे जा रहा था और उसकी ना जाने कब की प्यास बुझाए जा रहा था . आँचल बहुत खुश थी उसकी प्यास आज कोई जी भरकर बुझा रहा था. रामू की रस्सी वाली चारपाई में लेटे लेटे धक्के खाते खाते उसके नितंब दुखने लगे थे , पर उसे इसकी कोई परवाह नही थी , जो मज़ा उसे मिल रहा था उसके आगे बाकी परेशानियों का कोई महत्व नही था.
 
रामू के तेज तेज धक्कों से वो पुरानी चारपाई ऐसे आवाज़ कर रही थी की डर था कहीं टूट ना जाए. तभी आँचल ने दूर कहीं किसी के डोरबेल बजाने की आवाज़ सुनी , लेकिन वो रामू से , "और तेज ! और तेज !" ही कहती रही.
रामू ने भी डोरबेल की आवाज़ सुन ली थी , पर उत्तेजना में उसने भी उनसुना कर दिया.
 
“चोदो ….....मुझे चोदो रामू ……और चोदो …ज़ोर से ….और ज़ोर से….आ आहह…… ओइईईईई माआ…….” आँचल को ओर्गास्म पर ओर्गास्म आते गये.
 
इतनी खूबसूरत लड़की को चुदासी औरत के जैसे चिल्लाते देखकर रामू भी रुक नही पाया और जोरदार स्ट्रोक लगाते हुए उसने आँचल की चूत एक बार फिर अपने वीर्य से भर दी . फिर झड़ते झड़ते , अपना पूरा वज़न आँचल के बदन में डालकर वो उत्तेजना में उसकी चूचियों को चाटने और काटने लगा.
 
जब चुदाई खत्म हुई तो रामू को होश आया , कोई बहुत देर से डोरबेल बजाए जा रहा था. वो झट से उठा और आँचल को खींचकर उठाने लगा.
 
लेकिन आँचल मदहोश थी वो उठी ही नही. रामू घबराहट में उसको नंगी ही छोड़कर फटाफट अपने कपड़े पहनकर उनके घर की तरफ में दरवाज़ा खोलने को भागा .
 
रामू के कमरे के दूसरी तरफ पड़ोसी के नौकर का कमरा था. दोनो घर के बीच में दीवार थी. अपने कमरे में वो नौकर दोपहर की नींद ले रहा था. लेकिन आँचल की ज़ोर ज़ोर से कामोत्तेजक सिसकारियों से उसकी नींद खुल गयी . वो दीवार के उस पार से तांका झांकी करने लगा. वो दीवार फांदकर रामू के कमरे की खिड़की से चुपचाप चुदाई देखने लगा और बहुत उत्तेजित हो गया. वो रामू का दोस्त था और कई बार साथ साथ उन दोनो ने रंडियां चोदीं थी. रामू ने उसको शादी से पहले आँचल को लंड चुसाने वाला किस्सा भी बताया था. 55 साल की उमर का होने के बावजूद चिकनी आँचल को चुदते देखकर उसका लंड पाजामा फड़कर बाहर आने को हो गया.
 
जब उसने रामू को घर के अंदर जाते हुए देखा तो मौका ताड़कर वो रामू के कमरे में घुस गया. कमरे में आँचल टाँगे फैलाए नंगी पड़ी हुई थी , उसकी चूत का छेद जोरदार चुदाई से अभी खुला हुआ ही था. आँचल ने उसको देख लिया पर तब तक वो नौकर आँचल के ऊपर चढ़ गया. अपना लंड आँचल की चूत में घुसाकर उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए. धक्कों से वो पुरानी चारपाई , चूं ! चूं ! की आवाज़ करने लगी.
 
चूत में लंड अंदर बाहर होने से आँचल की सिसकारियाँ निकलने लगी. उसका जिस्म बुड्ढे के धक्कों का जवाब देते हुए गांड ऊपर को उछालने लगा.
लेकिन उसका दिमाग़ कह रहा था की ये ग़लत है , वो बोली, “ मत करो….उहह …..अहह…..मुझे छोड़ो………..ओइईईईई माआअ…”
 
नौकर चोदते रहा और आँचल को ओर्गास्म आ गया , उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया. लेकिन वो “मुझे छोड़ दो, मत करो “ कहती रही. ये सुनकर नौकर ने आँचल के मुँह पर अपना हाथ रख कर मुँह बंद कर दिया. और फिर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. जब आँचल को ओर्गास्म आया तो उसने उत्तेजना में अपने मुँह पर रखे हुए नौकर के हाथ में ज़ोर से दाँत काट दिया.
अब बुड्ढा नौकर भी झड़ने लगा . झड़ते समय वो चिल्लाया, “ आह….साली चूत…….”
और फिर आँचल की चूत में अपना वीर्य गिरा दिया.
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#14
14-01-2018, 07:54 PM
उनकी खुश-किस्मती से सर्वेंट क्वॉर्टर घर के पिछवाड़े में होने से उनकी ये आवाज़ें घर के अंदर नही गयीं . झड़ने के बाद नौकर अपना मुरझाया हुआ झाँटु लंड फटाफट अपने पाजामा में घुसाकर , अपने ज़ख्मी हाथ (आँचल के दाँत काटने से) को सहलाता हुआ दीवार फांदकर अपने कमरे में भाग लिया.
 
आँचल गहरी गहरी साँसे लेती हुई नंगी चारपाई में पड़ी रही. उसने बुड्ढे नौकर को अपने बदन का मज़ा लेने से रोकने की कोई कोशिश नही की थी , सिर्फ़ मुँह से " मत करो मत करो" कह दिया बस. उसका बदन चुदाई के मज़े चाहता था , पर दिमाग़ इन सब के लिए मना करता था. पर हर बार की तरह जिस्म और दिमाग़ की लड़ाई में जीत जिस्म की ही होती थी.

उधर रामू ने मेन दरवाज़ा खोला तो बाहर आँचल की माँ और सुनील खड़े थे. पिछले 10 मिनिट्स से सुनील डोरबेल बजाए जा रहा था लेकिन आँचल की माँ मार्केट से अभी पहुँची थी. 
जब सुनील ने उसको बताया की वो काफ़ी देर से बाहर खड़ा है तो आँचल की माँ ने रामू को खूब हड़काया , " कहाँ मरा था इतनी देर तक , जमाई के लिए दरवाज़ा क्यूँ नही खोला."
 
रामू ने बहाना बनाया की वो अपने कमरे में सो रहा था इसलिए डोरबेल नही सुनी. उसका थका हुआ चेहरा और उलझे बाल देखकर उन्होने उसकी बात पर विश्वास कर लिया. सुनील ने बताया वो आँचल को घर ले जाने के लिए आया है. अब रामू की गांड फट गयी. 
 
आँचल की माँ , आँचल को आवाज़ देते हुए उसके रूम में गयी, पर आँचल अपने बेडरूम में नही थी. 
 
फिर उसने रामू से पूछा, “ आँचल कहाँ है ?”
 
रामू को कुछ समझ नही आया , वो बोला, “ मेमसाब तो अपने घर चली गयी है.”
 
आँचल की माँ बोली,” घर चली गयी ? बिना बताए ? लेकिन उसका सूटकेस तो यहीं है.”
 
रामू बोला, “ वो ऑटो से चली गयी है और सूटकेस जब सुनील आएगा उसको दे देना, बोल के गयी है.”
 
सुनील की भी कुछ समझ नही आया की आँचल ने ऐसा क्यूँ किया , पर उसे कोई शक़ नही हुआ.
 
आँचल की माँ ने सुनील से कहा , “ बेटा सुनील , तुम चाय पानी पी के ही जाओगे. रामू जल्दी से चाय बना के ला.”
 
रामू किचन में जाने की बजाए जल्दी से अपने कमरे की ओर भागा , वहाँ आँचल अभी भी आँखें बंद करके चारपाई में नंगी लेटी हुई थी. उसने फटाफट आँचल को सब बातें बताई और जल्दी जल्दी उसका जीन्स और टॉप पहना के उसको सर्वेंट क्वॉर्टर के पीछे के रास्ते से रोड पर जाकर ऑटो पकड़ के सीधे अपने ससुराल जाने को कहा. 
उधर आँचल की माँ, " रामू ! रामू ! " चिल्ला रही थी. रामू आँचल को वहीं छोड़ के फिर फटाफट अंदर चाय बनाने किचन में भागा.
 
आँचल अभी भी मदहोशी में थी , उसका दिमाग़ सही से काम नही कर रहा था. वो जैसे तैसे उठी और पीछे के रास्ते रोड पर आ गयी, वहाँ उसको वही बुड्ढा नौकर मिला . नौकर को अपनी तरफ गंदी वासना भरी नज़रों से घूरते देखकर आँचल का सर शरम से झुक गया. खुश-किस्मती से किसी ने भी उसे बुड्ढे नौकर से चुदते हुए नही देखा था. बुड्ढा जल्दी जल्दी चोदकर झड़ गया था और फिर वापस चला गया था. 
 
आँचल लड़खड़ाते कदमों से ऑटो ढूंढने लगी. उसने देखा सब लोग उसी को घूर रहे हैं और गंदी तरह से हंस रहे हैं. वो शक्ल से ही बहुत चुदी हुई लग रही थी. ऊपर से हुआ ये की जल्दबाज़ी में रामू ने उसे सिर्फ़ टॉप और जीन्स पहना दिया. ब्रा और पैंटी रामू के ही कमरे में रह गयी. उसके बाल बिखरे हुए थे और होंठ सूज़े हुए थे. पसीने से उसका टॉप उसके बदन से चिपक गया था. 
 
ब्रा ना होने से बड़ी बड़ी चूचियाँ और सूज़े हुए निप्पल टॉप से बाहर को निकल रहे थे. जीन्स भी जल्दबाज़ी में ढंग से नही पहनी थी और पीछे गांड की दरार दिखाई दे रही थी , अंदर से पैंटी थी नही. ऐसी हालत में सब के घूरने से वो शरम से ज़मीन में गड़ गयी लेकिन तभी एक ऑटो वाला मिल गया और वो झट से उसमे बैठ गयी. अब घूरने की बारी ऑटोवाले की थी. उसने पहले तो अच्छी तरह से ऊपर से नीचे तक आँचल को घूरा फिर साइडमिरर में उसकी हिलती हुई चूचियों को देखते हुए ऑटो चलाने लगा. रास्ते भर उसने ऑटो को जानबूझकर झटके देते हुए चलाया ताकि झटकों से आँचल की बड़ी हिलती हुई चूचियों का मज़ा ले. आँचल सब समझ रही थी लेकिन अपने होंठ दाँतों में दबाकर सर नीचे झुकाए बैठी रही.
 
ससुराल पहुँचते ही सबसे पहले सामना हुआ संस्कारी ससुर से. ससुर ने ऐसी हालत में आँचल को देखा तो माथा पीट लिया , " हे भगवान फिर चुद गयी बहू . साला सबका नंबर लग गया. मेरी किस्मत ही फूटी है जो घर में होकर भी मेरा इसको चोदने का नंबर नही लग पा रहा."
 
आँचल ने ससुर को देखा तो एक नर्वस सी स्माइल दी और फटाफट अपने बेडरूम में भाग गयी. उसने सोचा ये बुड्ढा बार बार मुझे चुदा हुआ देख लेता है , अब मैं ज़्यादा दिन तक इसके हाथ से बच नही पाऊँगी.
 
लेकिन उसकी खुश-किस्मती थी की उसकी सास अपनी भतीजी की शादी से वापस आ गयी थी और घर पर सास के होने से ससुर को ज़्यादा ताक झाँक का मौका नही मिलने वाला था.
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Sameer303 Offline
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14-01-2018, 07:56 PM
अपने बेडरूम मे जाने के बाद आँचल ने दरवाज़ा बंद किया और वो जल्दी से बाथरूम में नहाने चली गयी. उसे मालूम था मायके में उसे ना पाकर सुनील भी आता ही होगा. नहाने के बाद उसने तरोताज़ा और खुशी महसूस की. खूब चुदाई होने से अब वो बहुत सॅटिस्फाइड फील कर रही थी . लेकिन सुनील के बारे में सोचकर उसे गिल्टी भी फील हुआ. वो सोचने लगी सुनील में थोड़ी कमी ज़रूर है , पर है तो वो अच्छा आदमी. उसका ख्याल रखता है सब ज़रूरते पूरी करता है.
 
आँचल ने सोचा अब वो सुनील से किसी अच्छे सेक्स क्लिनिक जाकर वहाँ डॉक्टर से एडवाइस लेने को कहेगी , रोज़ अख़बार में कितने सेक्स क्लिनिक्स के एड आए रहते हैं. सुनील को अपनी सेक्स ड्राइव बढ़ाने और शीघ्र पतन की समस्या के इलाज़ के लिए डॉक्टर को दिखाना ही चाहिए. आँचल ने देख लिया था की समीर, रामू, सलीम ये सब लोग कितनी देर तक उसे चोदते रहे थे और एक बार झड़ने के तुरंत बाद फिर से उनका लंड तनकर खड़ा हो जाता था. इन सबने ने आँचल को एक चुदाई सेशन में कई कई बार ओर्गास्म दिया था और जबरदस्त चुदाई से आँचल को बहुत मज़ा मिला था. वो सोचने लगी की अगर उसका पति सुनील भी अपना इलाज़ करवा ले तो उसको घर पर ही भरपूर चुदाई का मज़ा मिलेगा .
 
यही सब बातें सोचते हुए आँचल ने नहाकर एक पारदर्शी नाइटी पहन ली और सुनील का इंतज़ार करने लगी. फिर उसने सोचा की अब तक किस्मत ने साथ दिया है और सुनील या किसी और ने उसे चुदते हुए नही पकड़ा , लेकिन कभी पकड़ लिया तो बहुत बदनामी होगी और माँ बाप को मुँह दिखाने लायक नही रहेगी. उसका ससुर ज़रूर जान गया था की ये कई बार चुद के घर आई है पर अपने परिवार की और बेटे सुनील की बदनामी के डर से वो मुँह नही खोलेगा ये बात आँचल समझ गयी थी. वैसे भी ससुर उल्टा इस जानकारी का फायदा उठाकर उसे चोदने की कोशिश में लगा रहता था. लेकिन अब अपनी सास के वापस लौट आने से ससुर को तो कोई मौका वो देने वाली नही थी.
 
अगर किसी तरह से वो सुनील को इलाज़ के लिए राज़ी करने में सफल हो जाती है तो फिर उसे दूसरे मर्दों का मुँह ताकने की ज़रूरत नही पड़ेगी. सुनील ही उसको खुश रख पाएगा. वरना कभी ना कभी तो वो पकड़ी जाएगी और फिर अंज़ाम बहुत बुरा भी हो सकता था. उसने निश्चय कर लिया की वो सुनील को इलाज़ के लिए मनाने की पूरी कोशिश करेगी.
 
उधर आँचल का ससुर आँचल को चोद पाने का कोई मौका ना मिल पाने से बहुत ही फ्रस्टरेट हो गया. वो सोचता था घर के नौकर तक मेरी बहू को चोद गये और मैं मालिक होकर भी सूखा बैठा हूँ. आज ही अपने मायके से जब आँचल लौटी थी तो उसके भरपूर चुदाई से मिली संतुष्टि से दमकते चेहरे को देखकर ससुर बहुत एक्साइटेड हो गया और साथ ही साथ झल्ला भी गया की फिर कहीं से चुदा के आ गयी ये आज. लेकिन वो ठरकी ससुर कर ही क्या सकता था सिर्फ़ बाथरूम में जाकर आँचल के दमकते चेहरे को याद करके उसके नाम की मूठ लगा आया. वैसे भी अब उसकी बीवी अपनी भतीजी की शादी से वापस आ गयी थी तो बहू के साथ ज़्यादा कुछ वो कर भी नही सकता था. लेकिन वो हार मानने वालों में से नही था उसने सोचा मौके का इंतज़ार करना ही ठीक रहेगा , जब भी सही मौका लगेगा चोद डालूँगा साली को.
 
उधर सुनील को उसकी सास यानी आँचल की माँ ने जल्दी लौटने नही दिया. घर में आँचल के ना होने से उसे बहुत एंबरेसमेंट हुई तो उसने सुनील की खूब आवभगत करी ताकि जमाई राजा खुश हो जाए और बुरा ना माने कि आँचल बिना बताए चली गयी. जब सुनील अपने घर पहुँचा तो रात हो गयी थी. वो अपने साथ आँचल के कपड़ों से भरा सूटकेस भी उसके मायके से लाया था जिसे आँचल वहीं छोड़ आई थी. वो अपनी बीवी को मिस कर रहा था , इसलिए जब उसने आँचल को पारदर्शी नाइटी पहने बेड पर लेटे हुए देखा तो खुश हो गया . उसे इस बात की भनक ही नही थी की उसकी प्यारी बीवी अपने मायके में क्या गुल खिलाके आई है. बेड पर लेटी आँचल को देखकर सुनील का चुदाई का मूड बन गया और वो आँचल को आलिंगन में भरके किस करने लगा और उसकी चूचियाँ मसलने लगा. आँचल भी उत्तेजित होने लगी और उसे खुशी हुई की चलो आज तो पतिदेव की सेक्स की इच्छा बढ़ी हुई लग रही है , आज तो ये मज़ा देगा ही देगा. थी वो सुनील की बाँहों में लेकिन फिर उसको याद आने लगे दोपहर के वो सीन , जब रामू के कमरे में उसकी ठोक ठोक कर चुदाई हुई थी. अब वो गरम होने लगी.
 
तभी किसी ने बेडरूम का दरवाज़ा खटखटाया . हद है यार ये कौन है जो ठीक चुदाई के टाइम में डिस्टर्ब कर रहा है .
 
आँचल और सुनील दोनो का मूड ऑफ हो गया. दरवाज़ा खोला तो सामने सास ससुर खड़े थे. उसकी सास ने उसको चूमा और शादी में मिली हुई दो साड़ी उसको भेंट की. आँचल को पारदर्शी नाइटी में देखकर ससुर का लंड वहीं पैंट में तंबू बनाने लगा. उसने “ वेलकम होम बहू “ कहके बहू को आलिंगन में भर लिया और अपना तंबू उसके पेट पर रगड़ दिया. और ज़ोर से आलिंगन करके उसकी बड़ी चूचियाँ अपनी छाती से दबा दी. फिर उसने आँचल के गाल से अपने गाल भी रगड़ दिए और एक हल्का गालों का किस ले लिया.
 
आँचल ने अपने पेट पर ससुर का लंड महसूस किया , वो अपने ससुर के इस बोल्ड व्यवहार से भौंचक्की रह गयी. ससुर के इस ठरकीपन से वो सास के सामने शरम से लाल हो गयी.
 
सुनील अपनी चुदाई का प्रोग्राम डिस्टर्ब होने से अपसेट था लेकिन उसको अपने बाप के व्यवहार में कोई ग़लत बात नही लगी. उन लोगों को बातें करता हुआ छोड़कर वो नहाने चला गया. आँचल देख रही थी की उसका ससुर पारदर्शी नाइटी में उसके अंदरूनी अंगों को खा जाने वाली नज़रों से ताक रहा है. उसके ऐसे ताकने से आँचल को अपनी चूत में गीलापन महसूस हुआ और फिर उसने बेड पर बैठे बैठे ही पोज़िशन बदलने के बहाने ससुर को अपना बदन दिखाकर तड़पाना शुरू कर दिया. वो बात अपनी सास से कर रही थी पर ध्यान उसका ससुर की हरकतों की तरफ था. उसके जिस्म ने दिमाग़ को फिर अपने कंट्रोल में ले लिया और वो मासूम बहू की तरह सास से बात करते हुए ससुर को बदन की झलकियाँ दिखाने लगी.
 
ठरकी ससुर सब समझ रहा था , मन ही मन सोचने लगा , “ साली टीज़िंग बिच! अगर उसी दिन जब सलीम तुझे बेड पर नंगी छोड़कर भाग गया था , तब मैंने भी मौके का फायदा उठाकर तुझे चोद दिया होता तो आज ऐसे नखरें करके मुझे नही तड़पाती . पर मुझे उस दिन तेरी हालत पर दया आ गयी और मैंने चोदने का मौका गवां दिया. और अब तू मेरी बीवी के सामने मुझे टीज़ कर रही है क्यूंकि तू जानती है की अब मैं बीवी के सामने कुछ नही कर सकता .”
 
तभी सुनील भी नहाकर आ गया और फिर पूरा परिवार डिनर के लिए डाइनिंग रूम मे जाने लगा.
सबसे लास्ट में आँचल के पीछे ससुर चल रहा था. आँचल की मटकती गांड को देखकर उसने अपना हाथ गांड पर रख दिया और फिर थोड़ी गांड दबा दी. आँचल असहाय थी , सास और पति के सामने कुछ नही कर पाई , ससुर मज़े लेता रहा और मन ही मन सोचने लगा, “ ये तो रोक नही रही है, लगता है मुझसे चुदवाने को तैयार है. अहा! मज़ा आ गया आज पहली बार इस चिकनी की गांड पर हाथ फेरा है.”
 
डिनर के बाद जब आँचल और सुनील अपने बेडरूम में वापस आए तो दोनो ही उत्तेजित फील कर रहे थे. सुनील इसलिए क्यूंकी उसकी बीवी कई दिन से मायके में थी तो वो चोद नही पाया था. और आँचल इसलिए उत्तेजित थी क्यूंकी उसके ठरकी ससुर ने अपनी हरकतों से उसके बदन में आग लगा दी थी.
 
आँचल ने जब सुनील का तना हुआ लंड देखा तो जल्दी से घुटनों के बल बैठ गयी और लंड मुँह में लेकर चूसने लगी . अपनी खूबसूरत बीवी को फटाफट लंड चूसते देखकर सुनील भौचक्का रह गया . आँचल के खूबसूरत चेहरे में लंड अंदर बाहर जाते देखकर वो बहुत उत्तेजित हो गया और तुरंत मुँह में ही झड़ गया . आँचल गटागट सारा वीर्य निगल गयी , सुनील ये देखकर और भी हैरान हो गया. छी ! ये तो सब पी गयी. उसकी नज़र में सेक्स करना मतलब बीवी की टाँगे फैलाओ और चूत में वीर्य गिरा दो , बस इतना ही था. लंड चूसने , चूत चाटने , गांड मारने , डॉगी पोज़ और भी अन्य कई तरीक़ो से भी सेक्स किया जा सकता है , इसका उसे कोई ज्ञान नही था ना ही वो इन सब में कोई इंटरेस्ट रखता था . वैसे भी उसे अपनी फैक्ट्री से फ़ुर्सत ही नही मिलती थी.
 
आँचल ने सुनील का लंड तब तक मुँह से नही निकाला जब तक वो मुरझा के बिल्कुल छोटा नही हो गया. आँचल को बहुत उत्तेजना चढ़ी हुई थी और एक मोटा लंड उसको अपनी चूत में चाहिए था. लेकिन सुनील उसके मुँह में झड़ चुका था और उसका लंड अब मुरझा चुका था. सुनील बेड पर लेट गया. आँचल ने सुनील के बदन में हर जगह चूमना शुरू कर दिया. उसने सुनील के चेहरे , छाती को चूमा उसके कंधे को दांतो से काट लिया और फिर मुरझाया हुआ लंड फिर से मुँह में डालकर उसको खड़ा करने की कोशिश करने लगी पर सब बेकार. सुनील ने ,मुझे नींद आ रही है, कहते हुए आँचल को अपने ऊपर से हटा दिया और चादर ओढ़कर करवट लेकर सो गया.
 
आँचल को बहुत गुस्सा आया और उसने बहुत फ्रस्टरेटेड फील किया. लेकिन उसने अपने ऊपर काबू रखा और सुनील को कुछ भी भला बुरा नही कहा. रात में एक बार और उसने सुनील के लंड को खड़ा करने की कोशिश की पर सुनील ने उसको एक तरफ को धकेल दिया.
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#16
14-01-2018, 07:56 PM
अगली सुबह सुनील जब नहाकर बाथरूम से बाहर आया तो आँचल ने हाथ पकड़कर उसे अपने पास बैठाया और बोली, “ देखो सुनील, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है.”
 
सुनील ने कहा, “ . क्या बात है ?”
 
आँचल : “ देखो हमारी शादी हुए 6 महीने बीत गये हैं और तुम्हारी माँ और मेरी माँ , दोनो ही बच्चे के लिए मुझे पूछ रही थी.”
 
फिर उसने सुनील से झूठ बोला की वो कोई पिल भी नही ले रही है और तुम भी कंडोम यूज नही करते फिर भी मैं प्रेग्नेंट नही हो रही हूँ. इसलिए हमको अपने फैमिली डॉक्टर से कन्सल्ट करना चाहिए.
(असल बात ये थी की जब समीर ने उसे चोदा था वो तबसे प्रेग्नेंट होने के डर से पिल ले रही थी.)
 
फैमिली डॉक्टर के पास जाने की सलाह से सुनील गुस्सा हो गया , वो किसी जान पहचान वाले आदमी से अपनी सेक्स लाइफ के बारे में डिस्कस करने को तैयार ही नही हुआ.
 
फिर उसने कहा, “ अभी हमारी शादी को 6 महीने ही तो हुए है. टाइम आने पर तुम प्रेग्नेंट भी हो जाओगी , चिंता मत करो.”
 
आँचल चुप रही पर मन ही मन बोली, अगर हफ्ते में एक दिन मुझे चोदोगे तो मैं कैसे प्रेग्नेंट होऊँगी ईडियट!
वैसी भी प्रेग्नेन्सी का तो बहाना था , वो तो सिर्फ़ सुनील को किसी डॉक्टर को दिखाना चाहती थी. ताकि उसके जल्दी झड़ जाने का इलाज़ हो सके. प्रेग्नेंट वो होती कैसे जब पिल ले रही थी. वैसे भी अभी वो जवानी के मज़े लेना चाहती थी और इतनी जल्दी बच्चा नही चाहती थी. और अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए जितने लोगों से उसने चुदवाया था और जितना वीर्य उसकी चूत की गहराईयों में पड़ चुका था , उससे तो वैसे ही वो अब तक प्रेग्नेंट हो जाती अगर पिल ना लेती तो. लेकिन सुनील को डॉक्टर के पास जाने को तैयार ना देखकर उसने बात आगे नही बढ़ायी और कोई दूसरा तरीका आज़माने की सोची.
 
कुछ दिन बाद आँचल की सास ने उससे बच्चे की बात छेड़ी. आँचल ने पूछने पर बताया की वो कोई कॉन्ट्रासेप्टिव नही ले रही है. उसकी सास पुराने विचारों की थी , उसका कहना था कि शादी के बाद बहू का तुरंत बच्चा होना ज़रूरी है इससे पति पत्नी में जोड़ और मजबूत हो जाता है. फिर वो कहने लगी की तुम मेरे साथ एक स्वामी बाबा के पास चलो. स्वामी भोगानंद चमत्कारी बाबा है. जो भी औरत उनके पास जाती है उसको बच्चा ज़रूर पैदा होता है.
 
आँचल इसके लिए राज़ी नही थी पर सास को मना नही कर पाई. इलाज की ज़रूरत सुनील को थी आँचल को नही. फिर उसकी सास ने स्वामी भोगानंद से अगले हफ्ते का अपायंटमेंट ले लिया. आँचल ने सोचा की वो इसमे सुनील को भी इन्वॉल्व कर लेगी तो सुनील जाने के लिए मना कर देगा और उसे भी स्वामी के आश्रम में नही जाना पड़ेगा. लेकिन हुआ उल्टा . सुनील को जब आँचल ने ये बात बताई तो वो बोला, “ मम्मी ने बिल्कुल ठीक सजेशन दिया है. तुम स्वामी को अपने को दिखा लाओ.”
 
आँचल के पास अब कोई चारा नही था , वो मन ही मन सुनील पर गुस्सा हुई, तुम बस मम्मी मम्मी ही करते रहो. जो मम्मी ने कहा वही सही.
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