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Incest Meri Jawan Bahu (Part 02)

काम्या :--- हाँ बाबूजी। नींद नहीं आ रही क्या ?
मदनलाल :-- बहु प्लीज पांच मिनिट के लिए आ जाने दो बहुत मन कर रहा है
काम्या :-- बिलकुल नहीं आप पागल हो गए हैं क्या ? कल वो आ रहे हैं। आप को मौका मिला तो आप तो हमारा आज ही कबाड़ा कर देंगे
मदनलाल :-- कसम से कुछ नहीं करेंगे ,प्रॉमिस। मदनलाल घिघियाते हुए बोला
काम्या :-- कुछ करना ही नहीं है तो आना क्यूँ है ,
मदनलाल :-- बस ऐसे ही आपको देखने का मन कर रहा है।
काम्या :-- अभी आधा घंटे पहले डिनर करते समय तक तो देख ही रहे थे।
मदनलाल :-- वो कोई देखना है हमको दूसरी तरह देखना है
काम्या :-- दूसरी तरह मतलब
मदनलाल :--- जैसे उस दिन बाथरूम में देखा था। मदनलाल ने माहौल बनाते हुए बोला
काम्या :-- क्या sss . आप बहुत गंदे हो। गन्दी बात करते हो
मदनलाल :-- बहु प्लीज। बस एक बार देख लेने दो ,दिल को चैन आ जायेगा
काम्या :- कोई चैन नहीं आएगा उल्टा आप कंट्रोल खो देंगे
मदनलाल :-- नहीं नहीं। हम बिलकुल कंट्रोल में रहेंगे। कसम से
काम्या :-- रहने दीजिये हमें सब मालूम है। जब आप पहली बार बाथरूम में ही कंट्रोल नहीं पाये तो अब तो आप हमें परेशान भी करने लगे हैं। अब आप अन कंट्रोल हो जायेंगे और फिर तो हमें
भगवान भी नहीं बचा पायेगा
मदनलाल :-- कैसी बात कर रही हो बहु। हमने कभी आप से जबरदस्ती की है। जब और जहाँ आप रुकने बोली हम तुरंत रुक गए। प्लीज मान जाओ न
काम्या :-- नहीं बाबूजी। आज तो हम कोई रिस्क नहीं ले सकते। sorryyyyyy
मदनलाल :;-- अच्छा बहु एक काम करो हम खिड़की में खड़े रहेंगे वहीँ से दिखा दो। प्लीज बहु बच्चे पर रहम करो
काम्या :---- ओहो हो बच्चे वो भी आप। एक नम्बर के बिगड़े बच्चे हो।
मदनलाल :-- बिगड़े भी हैं तो क्या हुआ। हैं तो आप के ही न। प्लीज बहु प्लीज
मदनलाल की मिन्नतें करने पर काम्या कुछ पसीज गई। थोड़ा तो वो खुद भी परेशान थी इतने दिनों से कोई उसकी जवानी को देख नहीं पा रहा था अतः बोली
काम्या :-- बस दो मिनिट देखने मिलेगा ,वो भी कमरे के बाहर खिड़की से ठीक
मदनलाल :-- ठीक। मंजूर है
काम्या :-- ओके दस मिनिट बाद नीचे आ जाना।
मदनलाल दस मिनिट बाद नीचे पहुंचा और जैसे ही अंदर झाँका उसकी उपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे ही रह गई
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अंदर काम्या बिलकुल नंगी बेड में थी। उसके बदन का एक -२ अंग लाइट में चमक रहा था। वो करवट लेकर लेटी हुई थी।करवट में लेटने से वैसे भी स्त्री का कमर बल खा जाती है और नितम्ब और चौड़े दिखने लगते हैं। काम्या के नितम्ब तो वैसे ही भारी भरकम थे बिलकुल गज गामिनी लगती है। मदनलाल एकटक अपलक काम्या की गाण्ड को देखने लगा। बहु की नंगी जवानी को देख मदनलाल पागल हो गया। गाण्ड के बीच की दरार भी जान लेने पर उतारू थी दोनों फांके दो खरबूजों के सामान लग रही थी एकदम चिकनी ,मख्खन के सामान मुलायम पर ठोस। उसने लुंगी
से अपने घोड़ा पछाड़ सांप निकाला और तेज़ी से मुठियाने लगा। मदनलाल के मुख से सिसकारी निकलने लगी। सिसकारी की आवाज़ सुनकर काम्या समझ गई की बाबूजी खिड़की में आ गए हैं
वो कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और मदनलाल को अपनी जवानी का जाम दूर से ही पिलाती रही। मदनलाल भी चक्षु चोदन कर रहा था। उसका लण्ड आज फटने को उतारू था। मदनलाल ने सोचा
यहीं खिड़की में खड़े खड़े माल न निकाला तो एक आध नस फट जाएगी और वो जोर -२ से घस्से मारने लगा। काम्या कुछ देर तक ऐसे ही लेटी रही और फिर बड़ी नजाकत के साथ बैठ गई।
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बैठने से
उसके मतवाले चुचे भी अपनी झलक दिखलाने लगे। अब बहु को सुन्दर सेक्सी मनमोहनी सूरत भी थोड़ी -२ दिख रही थी। बहु की मांसल जांघे भी कहर ढा रही थी। काम्या की जांघे बेहद सुडोल थी गोल गोल भरी हुई लम्बी लेकिन बहुत ही संतुलित आकर में थी उसकी जांघे इतनी सुन्दर थी कि कोई भी उसे घंटो चाट सकता था। गांड और जांघों का मिलन बिंदु तो बिंदु पतन करा देने लायक था
मदनलाल काम्या की गांड देख कर पूरा बावला हो गया था बहु भी जानबूझ कर पीछे का हिस्सा दिखा रही थी क्योंकि वो अपने ससुर की कमजोरी जानती थी। जब मदनलाल का माल उबाल
मारने लगा तो उसके मुख से अजीब -२ सी आवाज़ आने लगी जिसे सुनकर काम्या समझ गई की बाबूजी का काम होने ही वाला है। उसने स्थिति को शांत करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया और
लाइट ऑफ कर दिया। इधर मदनलाल ने भी खिड़की के पास छटाक भर रबड़ी गिरा दी।

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are ye kya ittusa update kiya hai??? kahani aage bdhao

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काम्या अपने bed show के कारण बहुत गरम हो गई थी और जोर -२ से उंगली करने लगी। थोड़ी देर की कोशिश से ही वो झड़ गई। लगभग आधा घंटे के बाद पेशाब लगी तो वो बाहर निकली और जैसे ही खिड़की के पास पहुंची उसे अपने पैर में कुछ चिपचिपा लगा उसने बरामदे की लाइट जलाया तो देख कर हैरत में पड़ गई नीचे ढेर सारा वीर्य गिरा था।"" हे भगवान इतना सारा माल लगता है तीन चार लोगों का है "" फिर खुद ही बुदबुदाई "" नहीं नहीं घर में तो सिर्फ एक ही मर्द हैबाबूजी तो फिर लगता है तीन चार बार किये हैं लेकिन एक दिन में तो एक बार ही कर सकते है सुनील तो रात में एक बार ही करते हैँ। इतना माल कहाँ से आ गया। "" काम्या कुछ देर सोचती रही फिर मन ही मन बोली "" लगता है जबसे हम दूर रहे इतने दिन तक शीशी में इकठ्ठा किये थे और आज गुस्से में सब यहाँ डाल गए। "" खैर कोई बात नहीं मर्दों को गुस्सा शोभा देता है। उसने फ़ौरन वहां साफ़ सफाई की और कमरे में आ गई। बिस्तर में लेट कर वो अपने और ससुर जी के संबंधों के बारे सोचने लगी। उसने तो यों ही बाबूजी को थोड़ा छूट दे दिया था ताकि बुढ़ापे में उनका मन बहल जाए लेकिन लगता है बाबूजी थोड़े से मानने वाले नहीं हैं उन्हें तो पूरा चाहिए। खिड़की में अपना माल गिराकर शायद बताना चाहते हैं कि ये माल तुम्हारे लिए है। लेकिन ये कैसे हो सकता है। भला मैं सुनील को धोखा कैसे दे सकती हूँ। मुझे बाबूजी को इतने में ही रोकना होगा। जिस दिन सुनील आया उस दिन तो काम्या बाबूजी के पास भी नहीं आ रही थी रात को चारों ने एकसाथ खाना खाया ,कुछ गपशप के बाद बेटा बहु अपने कमरे में चले गए शांति भी नींद की गोली खा कर सोने चली गई। उधर मदनलाल की आँखों से नींद उड़ चुकी थी एक तो बहु इतने दिन से छूने नहीं दे रही थी उपर से कल बहु ने अपनी जवानी के जो जलवे दिखाए थे उसने सुबह से मदनलाल पगला दिया था उसे मालूम था कि आज बहु का बाजा बजना है आखिर सुनील लगभग छह माह बाद आया था। आज सुबह से ही काम्या के चेहरे पर रहस्मयी मुस्कान थी जो शायद आने वाली खुशियों को बयां कर रही थी। मदनलाल की इच्छा हो रही थी कि खिड़की से जाकर बहु का नंगा बदन देखे लेकिन वो सुनील
को इस हालत में नहीं देखना चाहता था। काम्या को नंगी देखने में उसे कोई एतराज नहीं था उसे तो वो अपने हाथों से नंगी करना चाहता था लेकिन अपने बेटे को इस अवस्था में देखने में उसे
अच्छा नहीं लग रहा था। वो अनिर्णय की स्थिति में था। शास्त्र कहते हैं कि काम वासना बड़े बड़े ज्ञानियों भी परास्त कर देती है फिर मदनलाल तो संसारी था उपर से ठरकी।

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एक बार वेदव्यास
एक ग्रन्थ लिख रहे थे.वो श्लोक बोलते जाते उनके शिष्य जेमिनी ऋषि लिखते जाते। एक श्लोक व्यास जी ने ऐसा बोला जिसका अर्थ था कि कामवासना ज्ञानियों को भी हरा देती है। जिसे देख कर जेमिनी ने टोका गुरूजी यहाँ ज्ञानी की जगह अज्ञानी शब्द होना चाहिए। व्यास जी बोले जो कहा है तुम वही लिखो समय आने पर मैं तुम्हे समझा दूंगा। कुछ दिनों बाद एक दिन जेमिनी अपनी कुटिया में अकेले थे बाहर बड़ी जोर से बारिस हो रही थी तभी वहां एक अत्यंत सुन्दर रूपवती कन्या भीगते हुए पहुंची और झोपड़ी के बाहरखड़ी गयी। भीगी होने कारण वो अर्धनग्न सी दिखाई दे रही थी। जेमिनी उसकी अंग प्रत्यंग को देख कर काममोत्तेजित हो गए। गीले कपडे में उसकी चूचियाँ ,बड़ी बड़ी उभरी गाण्ड ,मांसल जांघे चिकनी पीठ दिख रही थी। जेमिनी ने सम्मोहित से होते हुए कहा
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जेमिनी :-- देवी अंदर आ जाओ बाहर घनघोर वर्षा हो रही है. वो कन्या युवा जेमिनी को अकेला देख झिझकते हुए बोली
कन्या :-- लेकिन आप अकेले हैं। उसके डर को देख ऋषि ढांढस देते हुए बोले
जेमिनी :-- देवी मैं तीनो लोकों में प्रसिद्ध महिर्षि वेद व्यास का शिष्य जेमिनी हूँ मुझसे किंचित भी न डरो।
ऋषि की बात से निश्चिन्त हो वो सुंदरी अंदर आ गई। जेमिनी ने अपने कपडे उसे देते हुए कहा
जेमिनी :-- देवी तुम्हारे समस्त वस्त्र भीग गए हैं ऐसे में अस्वस्थ होने का खतरा है कृपया इन वस्त्रों को पहन लो। ऐसा कहकर जेमिनी दूसरी तरफ घूम गए।
सुंदरी ने जल्दी -२ कपडे लिए। जब जेमिनी पलटे तो उसे देखते ही जेमिनी के पूरे बदन में आग लग गई। पुरुष वस्त्र में वो बहुत ही कामुक रही थी ,धोती सिर्फ एक फेंटा ही लिपटी थी
जिसमे से उसके मादक नितम्ब और कदली गदराई जांघे स्पष्ट दिख रही थी। युवती का ऐसा यौवन देख जेमिनी कामांध होने लगे ,वो सोचने लगे काश ये मेरी हो जाए तो स्वर्ग का सुख यहीं मिल जाए। यदपि युवती वेश भूषा और श्रृंगार से ही अविवाहित लग रही थी फिर भी बातचीत करने के लिए ऋषि ने कहा
जेमिनी ::-- देवी तुम्हारा विवाह तो हो गया होगा।
कन्या :-- ऋषिवर ,कदाचित विवाह हमारे भाग्य में लिखा ही नहीं। दुखी मन से कन्या ने कहा। कन्या अभी कुंवारी है ये जानकार जेमिनी मन ही मन प्रषन्न होते हुए बोले
जेमिनी :- देवी तुम्हारे जैसी सर्वांग सुंदरी कन्या से विवाह के लिए तो कोई भी युवक तत्पर हो जायेगा।

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कन्या : - ऋषिवर , हमारे विवाह के लिए पिताजी ने ऐसी प्रतिज्ञा कर ली है कि जिसे सुनकर कोई भी स्वाभिमानी युवक हमसे विवाह की इच्छा त्याग देता है।
जेमिनी :-- देवी ऐसी क्या प्रतिज्ञा की है आपके पिता ने ?
कन्या :-- ऋषिवर उन्होंने प्रतिज्ञा की है कि जो भी युवक अपना मुंह काला करके उन्हें पीठ पर बैठा कर पहाड़ी वाली माताजी के दर्शन करा के लाएगा उससे ही मेरा विवाह करेंगे।
प्रतिज्ञा सुन कर जेमिनी का मुंह लटक गया। दोनों चुपचुाप खड़े रहे। बाहर जोरदार बारिस हो रही थी लेकिन ऋषि का ह्रदय जल रहा था। सुंदरी उनकी ओर पीठ किये खड़ी थी
पीछे से उसकी अत्यंत मनोहारी गाण्ड और मक्खन सी चिकिनी गोल -२ जांघे देख -२ कर जेमिनी अपना आपा खोते जा रहे थे। सुंदरी ने जो अपना पता बताया था और जो मंदिर था वो दोनों
जेमिनी ने देख रखा था ,उन्होंने अनुमान लगाया कि मुश्किल से तीन घण्टे में ये यात्रा हो सकती है। अगर तीन घंटे की यात्रा के बदले ऐसी सुन्दर युवती सारा जीवन भोगने मिले तो व्यापार लाभ का था। उन्होंने अपने स्वाभिमान को किनारे रखा युवती के पास जाकर उसके मादक नितम्बों में हाथ फेरते हुए बोले
जेमिनी :-- सुंदरी मैं तुम्हारे पिता की प्रतिज्ञा पूरी करूंगा। जेमिनी की बात सुनकर कन्या चौंकते हुए बोली
कन्या :-- ऋषिवर आप ! महाज्ञानी व्यास महाराज शिष्य आप ऐसा करेंगे ?
जेमिनी :- सुंदरी मैं तुम्हारे जैसी युवा और सर्वांग सुंदरी का जीवन व्यर्थ होते नहीं देख सकता। जेमिनी बात बनाते हुए बोला
नियत समय पर यात्रा आरम्भ हुई। जेमिनी ने काला मुह कर कन्या के पिता को पीठ पर बैठाया मंदिर जा पहुंचा। कन्या के पिता ने उसे बाहर ही खड़ा किया और पुत्री साथ मंदिर में चला गया। जेमिनी बाहर प्रतीक्षा करने लगे। तभी पीछे से आवाज़ आई "" अब बताओ मेरा श्लोक सही था या नहीं जो प्रतिज्ञा कोई साधारण मानव भी पूरी नहीं कर रहा था उसे काम के वशीभूत हो तुमने कर दिया "" जेमिनी ने पलटकर देखा तो गुरूजी खड़े थे वो उनके चरणो में गिर पड़ा। व्यास जी ने कहा उनको छोडो अब चलो यहाँ से।
इधर मदनलाल खिड़की के पास खड़ा हो अपने मन से लड़ रहा था लेकिन अंत में मन जीत गया इसी लिए तो कहा गया है "" मन मतंग माने नहीं ""
मदनलाल आगे बड़ा और खिड़की से आँख लगा दी। अंदर का दृश्य देखकर मदनलाल का कोबरा फुफकार मारने लगा

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(03-11-2016, 08:42 AM)rakeshy : Nice stories plz update more

Thanks

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(04-11-2016, 04:40 PM)balveerpasha555 : are ye kya ittusa update kiya hai??? kahani aage bdhao

Don't worry ab age badhegi story

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(05-11-2016, 03:29 PM)dkattri : Update pls

Update posted check out

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